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बिहार में गंगा और कोसी का कहर अभी थमा भी नहीं था कि अब गंडक नदी का प्रकोप देखने को मिल है. दूसरे चरण की बाढ़ से अभी तक सर्वाधिक तबाही पश्चिम चंपारण एवं सारण जिले में हुई है. गंडक नदी में अचानक आई बाढ़ से सारण में कुछ जगहों पर तटबंध टूट गए, इससे कई नए इलाकों में पानी भर गया. बाढ़ की स्थिति को देखते हुए केंद्रीय जल आयोग की ओर से जिले के 28 स्थानों पर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है. मकेर में दो स्थानों पर तटबंध टूटने से बाढ़ का पानी तेजी से गांवों में फैल गया है. मकेर की सभी पंचायतों के साथ अमनौर की कुछ पंचायतें भी प्रभावित हैं. वहीं, पानापुर में भी तटबंध टूटने से कई इलाकों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया है.
जान बचाने के लिए पलायन मजबूरी
ऐसे मुश्किल हालात में जिला प्रशासन ने राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है. एनडीआरएफ की दो और एसडीआरएफ की 48 टीमें बचाव कार्य में जुटी हैं. जिलाधिकारी और एसएसपी खुद अभियान की निगरानी कर रहे हैं. नावों के सहारे बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित निकाला जा रहा है. लोग अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित ठिकानों की तलाश में हैं. इस आपदा के बीच जिला प्रशासन राहत और बचाव कार्य में पूरी मुस्तैदी से जुटा है, लेकिन इन सबके बीच सारण के जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव और एसएसपी रौशन कुमार ने खुद बाढ़ग्रस्त इलाकों में उतरकर लोगों की मदद की.
आपदा की घड़ी में प्रशासन पूरी तरह साथ
जिले के शीर्ष अधिकारियों का खुद मैदान में उतरना यह दिखाता है कि आपदा की इस घड़ी में पीड़ितों के साथ खड़ा होना ही सबसे बड़ी जिम्मेदारी है. बाढ़ की भयावहता के बीच जिले के दोनों वरिष्ठ अधिकारी खुद मैदान में उतरकर लोगों की मदद करते नजर आ रहे हैं. एसएसपी रौशन कुमार जहां नंगे पांव, पैंट को घुटनों तक समेटकर बाढ़ के पानी में राहत और बचाव कार्य में जुटे हैं, वहीं जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव भी हवाई चप्पल पहनकर प्रभावित इलाकों में लोगों की मदद करते दिखाई दे रहे हैं. बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के दौरान जिलाधिकारी खुद बच्चों को रेस्क्यू करते और उन्हें सुरक्षित उनके परिजनों के हवाले करते दिख रहे हैं. आपदा की इस घड़ी में एक प्रशासनिक अधिकारी का खुद बच्चों को गोद में लेकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना, संकट में फंसे परिवारों के लिए बड़ी राहत और भरोसे का दृश्य है.
जिले में 51 सामुदायिक रसोई चल रहीं
जिलाधिकारी और एसएसपी खुद अभियान की निगरानी कर रहे हैं. नावों के सहारे बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित निकाला जा रहा है. वहीं, प्रभावित परिवारों तक भोजन पहुंचाने के लिए सामुदायिक रसोई संचालित की जा रही है. शुक्रवार को जिले में 51 स्थानों पर सामुदायिक रसोई के माध्यम से बाढ़ पीड़ितों को भोजन उपलब्ध कराया गया. इसके अलावा मेडिकल टीमों को भी प्रभावित इलाकों में लगाया गया है. जरूरतमंद परिवारों के बीच पॉलिथीन शीट और पशुपालकों को पशुचारा भी उपलब्ध कराया जा रहा है.
डीएम-एसएसपी के कार्य की तारीफ हो रही
बाढ़ की इस कठिन घड़ी में राहत और बचाव कार्य के साथ अधिकारियों का खुद प्रभावित लोगों के बीच पहुंचना, उन्हें सुरक्षित निकालना और बच्चों को अपने हाथों से बचाकर उनके परिवार तक पहुंचाना प्रशासन की मानवीय भूमिका को सामने लाता है. संकट के समय जब लोगों को सबसे अधिक सहारे और भरोसे की जरूरत होती है, तब अधिकारियों की ऐसी मौजूदगी पीड़ित परिवारों के लिए उम्मीद की किरण बन रही है.