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सैन्य अभ्यास या बड़ी जंग की आहट? US Army ने शुरू की कब्रें खोदने की स्पेशल ट्रेनिंग, वजह हैरान कर देगी

अमेरिकी सेना (US Army) द्वारा हाल ही में शुरू की गई कब्रें खोदने की स्पेशल ट्रेनिंग ने वैश्विक स्तर पर हलचल बढ़ा दी है. क्या यह किसी बड़े सैन्य अभ्यास का हिस्सा है या किसी आसन्न भीषण युद्ध की आहट?

Written By Ravindra Pratap Singh
Published: Nov 02, 2026, 11:32 PM IST | Updated: Nov 02, 2026, 11:38 PM IST
Image Credit: जंग की तैयारी या कुछ और? अमरीकी फौजी दिन-रात खोद रहे कब्रें, आंकड़े देखकर उड़ जाएंगे होश
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दुनिया की सबसे आधुनिक और ताकतवर मानी जाने वाली अमेरिकी सेना इन दिनों एक ऐसी खौफनाक तैयारी में जुटी है, जिसकी जरूरत उसने कोरियाई युद्ध के बाद से महसूस नहीं की थी. अमेरिकी सैनिकों को युद्ध के मैदान में मारे जाने वाले अपने ही जवानों के लिए सामूहिक अस्थायी कब्रें तैयार करने की ट्रेनिंग दी जा रही है. इसके लिए भारी-भरकम बुलडोजर, खुदाई करने वाली मशीनों और विशेष इंजीनियरिंग यूनिट्स की मदद ली जा रही है.

सवाल यह उठता है कि जिस देश की सेना की तकनीक और ताकत का लोहा पूरी दुनिया मानती है, उसे अचानक अपने ही हजारों सैनिकों की मौत की आशंका क्यों सताने लगी है? क्या यह ईरान के साथ बढ़ते तनाव का नतीजा है या अमेरिका किसी वैश्विक महायुद्ध की तैयारी कर रहा है?

इराक-अफगानिस्तान के दौर से बिल्कुल अलग रणनीति

अमेरिकी सेना का यह अभ्यास इसलिए भी दुनिया भर में चर्चा और चिंता का विषय बना हुआ है, क्योंकि इराक और अफगानिस्तान जैसे हालिया सैन्य अभियानों के दौरान अमेरिका को कभी इस पैमाने पर कब्रें खोदने की जरूरत नहीं पड़ी. अब करीब सात दशकों (लगभग 70 साल) के लंबे अंतराल के बाद इस तरह की ट्रेनिंग दोबारा शुरू की गई है. इस कवायद का मुख्य मकसद किसी भीषण युद्ध की स्थिति में भारी संख्या में मारे जाने वाले सैनिकों के शवों को सड़ने और बीमारियों से बचाना है. साथ ही, उनकी पहचान सुरक्षित रखना और युद्ध खत्म होने के बाद उन्हें सम्मानपूर्वक उनके परिवारों तक पहुंचाना सुनिश्चित करना है.

24 घंटे में 2,400 शव दफनाने का गणित

हाल ही में अमेरिकी सेना की थर्ड कोर सस्टेनमेंट कमांड और इंजीनियर टीमों ने मिलकर एक बड़ा अभ्यास पूरा किया. इस दौरान असली युद्ध जैसे हालात का अनुकरण करने के लिए नकली कंकालों और पानी से भरे कंटेनरों का इस्तेमाल किया गया. भारी मशीनों और बुलडोजरों से लंबे और गहरे गड्ढे खोदे गए. 

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इस प्रैक्टिस के बाद अमेरिकी सेना के अधिकारियों ने अनुमान जताया है कि यदि उनकी एक इंजीनियर कंपनी बिना रुके काम करे, तो वह 24 घंटे के भीतर 2,400 सैनिकों के लिए अस्थायी कब्रें खोदकर उन्हें दफना सकती है. इस अभ्यास में 20 से अधिक वर्षों में पहली बार सैन्य पादरियों को भी शामिल किया गया. उन्हें यह सिखाया गया कि युद्ध के मैदान में बिना किसी देरी के धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए जमीन को कैसे पवित्र किया जाए.

अचानक क्यों पड़ी इस भयानक ट्रेनिंग की जरूरत?

बीते दो-तीन दशकों में अमेरिका ने जितने भी युद्ध लड़े, उनमें अमेरिकी सैनिकों के हताहत होने की संख्या इतनी कम थी कि शवों को तुरंत विशेष उड़ानों के जरिए अमेरिका स्थित उनके घर भेज दिया जाता था. लेकिन अब पेंटागन का मानना है कि वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य पूरी तरह बदल चुका है. इस तैयारी के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े कारण हैं:

महाशक्तियों से सीधे टकराव की आशंका: अमेरिकी सैन्य विशेषज्ञों का आकलन है कि यदि भविष्य में चीन, रूस या ईरान जैसी महाशक्तियों से सीधी जंग छिड़ती है, तो पारंपरिक या उच्च-तीव्रता वाले इस युद्ध के पहले ही दिन हजारों की संख्या में सैनिक मारे जा सकते हैं.

सप्लाई चेन और ट्रांसपोर्ट का ठप होना: भीषण युद्ध के दौरान एयरस्पेस (हवाई क्षेत्र) पूरी तरह बंद हो सकता है या दुश्मन के हमलों के कारण ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट की भारी कमी हो सकती है. ऐसी स्थिति में हजारों शवों को तुरंत एयरलिफ्ट करके अमेरिका वापस लाना नामुमकिन होगा.

स्वास्थ्य सुरक्षा और सम्मान की प्रक्रिया: युद्ध के मैदान में शवों को सड़ांध, संक्रमण और बीमारियों से बचाने के लिए उन्हें अस्थायी रूप से पूरी पहचान दर्ज करके तुरंत दफनाना आवश्यक हो जाता है. इस अस्थायी व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि हालात सामान्य होने पर उन्हें सुरक्षित निकालकर उनके परिजनों को सौंपा जा सके.

'कल जंग हुई, तो हम अंधेरे में तीर चला रहे होंगे'

सेना के भीतर इस अभ्यास को लेकर कितनी गंभीरता है, इसका अंदाजा थर्ड कोर के ऑफिसर सार्जेंट फर्स्ट क्लास डेलबर्ट रुएडे के बयान से लगाया जा सकता है. उन्होंने कहा, 'अगर हम कल अचानक युद्ध के मैदान में उतर जाएं, तो इस विशेष ट्रेनिंग के बिना हम सिर्फ अंधेरे में तीर चला रहे होते.'

इस अभ्यास के दौरान सेना के पुराने नियमों की खामियां भी सामने आईं. सेना के पुराने मैनुअल के अनुसार कब्रों की पंक्तियों के बीच सिर्फ 7 फीट की दूरी रखने का नियम था. लेकिन अभ्यास में देखा गया कि आधुनिक और भारी बुलडोजरों को चलाने के लिए यह जगह बहुत कम थी. इस अनुभव के बाद अब अमेरिकी सेना अपने संचालन नियमों (Manual Standards) में बदलाव करने जा रही है.

भविष्य के सुरक्षा हालात और पेंटागन की नई सोच

रक्षा जानकारों के मुताबिक, अमेरिका का यह कदम साफ दर्शाता है कि पेंटागन अब किसी छोटे-मोटे आतंकवादी संगठन या विद्रोही गुटों से लड़ने की रणनीति नहीं बना रहा. इसके बजाय, वह भविष्य में होने वाली 'लार्ज-स्केल कॉम्बैट ऑपरेशंस' (बड़े पैमाने की भीषण जंग) को ध्यान में रखकर तैयारियां कर रहा है.

अमेरिकी सेना का अगला चरण साल 2027 में शुरू होने वाला है. इस अगले फेज में युद्धक्षेत्र के भीतर मेडिकल सुविधाओं के विस्तार और बड़े पैमाने पर डेडबॉडीज के प्रबंधन (Mortuary Affairs) की एडवांस्ड प्रैक्टिस की जाएगी. पेंटागन की यह तैयारी इस बात का स्पष्ट संकेत है कि आने वाले सालों में दुनिया एक बेहद संवेदनशील और खतरनाक दौर से गुजर सकती है.

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About the Author

रवींद्र प्रताप सिंह ने साल 2015 में जागरण.कॉम से डिजिटल मीडिया में कदम रखा मौजूदा समय वो ज़ी न्यूज डिजिटल में चीफ सब एडिटर हैं. अगस्त 2025 में उन्होंने ज़ी न्यूज ज्वाइन किया है. रवींद्र देश और दुनिया की खबरों के अलावा खेलों में क्रिकेट जगत और क्राइम की खबरों पर बेहतरीन पकड़ रखते हैं. इसके पहले रवींद्र रिपब्लिक भारत में इवनिंग शिफ्ट के इंचार्ज रहे और शाम की शिफ्ट संभालते हुए होम पेज की जिम्मेदारी रवींद्र के ऊपर थी. उससे पहले रवींद्र ने जनसत्ता और न्यूज नेशन में भी शाम की शिफ्ट और होम पेज की जिम्मेदारी बखूबी निभाई. इसके पहले रवींद्र ने 5 सालों तक पी7 और लाइव इंडिया जैसे न्यूज चैनलों में काम किया था. रवींद्र आकाशवाणी में काम करने का अनुभव रखते. अवध यूनिवर्सिटी से मॉस कम्युनिकेशन से पोस्ट ग्रेजुएट रवींद्र पिछले डेढ़ दशक से सक्रिय पत्रकारिता कर रहे हैं. आप रवींद्र से जुड़ने के लिए Ravindra.Singh@India.com पर मेल कर सकते हैं या फिर फेसबुक पर संपर्क करने के लिए https://www.facebook.com/pintu.singh.397 और एक्स पर https://x.com/rs66533 रवींद्र से संपर्क किया जा सकता है. 
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