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अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में ट्रंप की अग्निपरीक्षा: संसद पर कब्जा गंवाया तो दुनिया के लिए क्या-क्या बदल जाएगा

अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप की ताकत दांव पर है. नतीजों से अमेरिकी संसद पर रिपब्लिकन पार्टी का नियंत्रण तय होगा. इसका असर ईरान के साथ तनाव, होर्मुज संकट, वैश्विक तेल कारोबार, भारत-अमेरिका ट्रेड डील और वीजा नीति पर भी पड़ सकता है.

अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में ट्रंप की अग्निपरीक्षा: संसद पर कब्जा गंवाया तो दुनिया के लिए क्या-क्या बदल जाएगा
Image Credit: Ai की मदद से बनाई गई तस्वीर

अमेरिका के मिडटर्म इलेक्शन के लिए आज वोटिंग होगी. इस चुनाव का असर सिर्फ अमेरिका पर नहीं, पूरी दुनिया पर पड़ने वाला है. अमेरिकी मतदाता कल तय कर देंगे कि दुनिया के लिए मुसीबत बढ़ा रहे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ज्यादा ताकतवर होंगे या फिर वो कमजोर पड़ जाएंगे. इस वक्त दुनिया में कई युद्ध चल रहे हैं, ईरान और अमेरिका में तनाव और होर्मुज में हमलों की वजह से दुनिया तेल संकट का भी सामना कर रही है. आज ही ट्रंप के बड़े सहयोगी ने दावा किया है कि अमेरिका ईरान पर परमाणु हमला कर सकता है.

आज आपको ये भी समझना चाहिए अमेरिका में हो रहे चुनाव के नतीजों का ईरान पर संभावित हमले और दुनिया के तेल कारोबार पर क्या असर पड़ेगा. अमेरिका और भारत के बीच ट्रेड डील होनी है. अमेरिका में ट्रंप सरकार अपनी वीजा नीति में भी बदलाव कर रही है. आपके लिए ये जानना भी जरूरी है कि अमेरिका में ट्रंप का मजबूत होना या कमजोर होना भारत के लिए क्या ज्यादा फायदेमंद है. अमेरिकी चुनाव में अब्दुल का मुद्दा भी छाया हुआ है. आज आपको जानना चाहिए, अमेरिका में ट्रंप के अब्दुल कार्ड का क्या असर पड़ा है. अब्दुल के नाम पर ट्रंप के विरोधी वोटिंग से ठीक पहले कैसे बंट गए हैं लेकिन सबसे पहले हम, अमेरिका में कल होने वाली वोटिंग को डिकोड करेंगे.

अमेरिका में मिडटर्म इलेक्शन का एक अनोखा सिस्टम बनाया गया है, जो अमेरिकी राष्ट्रपति के 4 साल के कार्यकाल के बीच में करवाया जाता है. जिसमें राष्ट्रपति खुद चुनाव नहीं लड़ते, बल्कि उनकी पार्टी चुनाव लड़ती है. इस चुनाव से तय होता है उनके कार्यकाल के बाकी दो सालों तक अमेरिका की संसद जिसे अमेरिकी कांग्रेस कहते हैं उस पर किसका नियंत्रण रहेगा, वहां पर कौन बहुमत में रहेगा. अमेरिका के मिडटर्म चुनाव को समझने के लिए आप अमेरिकी संसद के दोनों सदनों और उनके चुनाव की प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी को बहुत ध्यान से पढ़ने की जरूरत है.

भारत की तरह अमेरिकी संसद के भी दो सदन होते हैं. पहला हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स, जो भारत की लोकसभा की तरह होता है. अमेरिका की लोकसभा में कुल 435 सीटें हैं. अमेरिका में भी राज्यों की आबादी के हिसाब से सीटें तय होती हैं. औसतन साढ़े 7 लाख लोगों पर एक सीट है. हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के सांसदों का कार्यकाल सिर्फ 2 साल का होता है. यानी अमेरिका की लोकसभा की सभी 435 सीटों पर चुनाव होंगे. यहां पर पिछला चुनाव नवंबर 2024 में हुआ था.

अमेरिका की संसद का दूसरा सदन है सीनेट. इसकी तुलना आप भारत की राज्यसभा से कर सकते हैं. हालांकि इसका चुनाव भारत की राज्यसभा जैसा नहीं होता. भारत में राज्यों के विधायक राज्यसभा के सदस्यों को चुनते हैं, जबकि अमेरिका में जनता ही सीनेट के प्रतिनिधियों को चुनती है. यहां कुल मिलाकर 50 राज्य हैं. अमेरिका में हर राज्य से दो सीनेटर चुने जाते हैं. अमेरिका में किसी राज्य की आबादी कितनी भी हो, उसे सीनेट में प्रतिनिधित्व के लिए केवल 2 सीटें मिलती हैं. यानी अमेरिका की लोकसभा यानी हाउस आफ रिप्रेजेंटेटिव्स में प्रतिनिधि आबादी के हिसाब से और अमेरिका की राज्यसभा यानी सीनेट में प्रतिनिधि प्रति राज्य दो प्रतिनिधियों के हिसाब से चुने जाते हैं.

इस तरह अमेरिका की सीनेट में कुल 100 सदस्य होते हैं. अमेरिका में सीनेट सदस्यों का कार्यकाल 6 साल का होता है. इसकी 100 सीटों में से करीब एक-तिहाई यानी 33 से 35 सीटों में हर 2 साल में चुनाव होता है. इस बार अमेरिका के मिडटर्म इलेक्शन में अमेरिकी लोकसभा की सभी 435 सीटों और राज्यसभा की 35 सीटों पर चुनाव होने हैं.

अमेरिका में होने जा रहे मिडटर्म इलेक्शन, जो दुनिया और खुद डोनाल्ड ट्रंप के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं, उसमें फिलहाल ट्रंप की स्थिति कमजोर है. ट्रंप भले ही अपनी रैलियों में सिग्नेचर डांस करते दिख रहे हों, चुनाव को लेकर बड़े दावे कर रहे हों, लेकिन इस वक्त अमेरिका में ट्रंप की अप्रूवल रेपिंग ऑल टाइम लो चल रही है. अमेरिका में अप्रूवल रेटिंग बताती है कि राष्ट्रपति के कामकाज से कितने प्रतिशत अमेरिकी नागरिक संतुष्ट हैं. यानी जितनी ज्यादा रेटिंग उतने लोग संतुष्ट, जितनी कम रेटिंग उतने लोग नाराज.

जनवरी 2025 में जब ट्रंप चुनाव जीतकर आए थे, तब अमेरिका में उनकी अप्रूवल रेटिंग 47 प्रतिशत थी, लेकिन दो साल बाद मिडटर्म से ठीक पहले ट्रंप की अप्रूवल रेटिंग गिरकर 32 प्रतिशत तक आ गई है. यानी ज्यादातर लोग उनके कामकाज से खुश नहीं लग रहे.

इसके अलावा मिडटर्म इलेक्शन को अमेरिकी राष्ट्रपतियों के लिए 'श्राप' माना जाता है. पिछले 20 में से 18 बार, यानी 90% चुनावों में मौजूदा राष्ट्रपति की पार्टी मिडटर्म हारी है. सिर्फ दो अमेरिकी राष्ट्रपति इस श्राप से बच पाए हैं. यानी मिडटर्म इलेक्शन जीत पाए हैं.ॉ

  • 1998 में बिल क्लिंटन मिडटर्म में जीते थे.
  • 2002 में 9/11 हमले के बाद जॉर्ज बुश ने मिडटर्म इलेक्शन जीता था.

इसके अलावा मिडटर्म इलेक्शन में राष्ट्रपति की पार्टी ने हाउस में औसतन 26 सीटें और सीनेट में 4 सीटें गंवाई हैं. इस बार अमेरिका में करवाए गए 7 बड़े सर्वे भी ट्रंप की हार की भविष्यवाणी कर रहे हैं.

डोनाल्ड ट्रंप को भी अब समझ में आने लगा है कि चुनाव में उनकी स्थिति बहुत अच्छी नहीं है. शायद इसीलिए वो चुनाव हारने की स्थिति में आगे की रणनीति बनाने में जुट गए हैं. ट्रंप ने कहा है कि अगर वो मिडटर्म इलेक्शन हारे तो मिस्टर वीटो बन जाएंगे. आज आपको ट्रंप का ये बयान बहुत ध्यान से सुनना चाहिए.

अमेरिका में हाउस और सीनेट से कोई बिल पास होने के बाद राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए व्हाइट हाउस भेजा जाता है. राष्ट्रपति उसे मंजूरी दे सकते हैं या वीटो करके वापस भेज सकते हैं. यही ट्रंप का प्लान बी है. यानी रिपब्लिकन पार्टी चुनाव हारती है. डेमोक्रेट्स दोनों सदनों में बहुमत हासिल कर लेते हैं और अपनी मर्जी के विधेयक दोनों सदनों से पास करवा भी लेते हैं, तो ट्रंप अमेरिकी राष्ट्रपति के तौर पर बार-बार बिलों पर वीटो पॉवर का इस्तेमाल करेंगे.

इसके बाद एक-दो महीने में वे विधेयक बेकार हो जाएंगे और आखिरकार दोनों पक्षों को बातचीत की मेज पर आकर समझौता करना पड़ेगा और इस तरह दबाव बनाकर डोनाल्ड ट्रंप अपने एजेंडे अमेरिका में लागू करवाएंगे. यानी डोनाल्ड ट्रंप ने हारकर भी हार नहीं मानने की तैयारी की है. हालांकि, तमाम बुरी खबरों के बीच ट्रंप के लिए कुछ अच्छी खबरें भी आ रही हैं.

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Tahir Kamran

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Zee News में नेशनल डेस्क पर देश–विदेश और राजनीति से जुड़ी खबरें लिखते हैं. करियर का आगाज 2015 से 'पंजाब केसरी' ग्रुप के उर्दू अखबार ‘हिंद समाचार’ से किया, जहां वे कंटेट राइटर से पेज डिजाइनर तक पहुंचे. इसके बाद उर्दू, हिंदी और पंजाबी - तीनों भाषाओं में काम करने का मौका मिला. 2018 में डिजिटल की तरफ कूच करते हुए पंजाब केसरी ग्रुप की उर्दू वेबसाइट की लॉन्चिंग टीम का नेतृत्व किया. इसके बाद 2020 में 'Zee Salaam' ज्वाइन किया, यहां भी वेबसाइट को लॉन्च करने के साथ-साथ तीन साल टीम का नेतृत्व भी किया. इसी दौरान ZEE Delhi NCR वेबसाइट भी लॉन्च हुई, जिसमें उनका अहम योगदान रहा. 2023 में India Daily Live की लॉन्चिंग टीम के साथ काम किया और शुरुआती दिनों में हिंदी के अलावा पंजाबी, तमिल, तेलुगु और गुजराती वेबसाइट टीमों को मैनेज किया. अक्टूबर 2024 में फिर से Zee Media में में वापसी करते हुए नेशनल टीम का हिस्सा बने. तकनीक में दिलचस्पी की वजह से उन्होंने React.js और वेब डिजाइनिंग सीखी. यही कारण है कि उनकी खबरों में HTML-CSS के छोटे-छोटे ग्राफिक्स दिख जाते हैं, जो मुश्किल बातों को भी आसान बना देते हैं. करियर की शुरुआत में कुछ दिनों तक फोटो स्टूडियो में भी काम किया, जहां कैमरा, Adobe Photoshop और ग्राफिक डिजाइनिंग सीखी, जो आज भी उनके डिजिटल काम में मदद करता है. उर्दू शायरी से प्यार अलग ही है. ग़ज़लें, नज़्में, गीत भी लिखते हैं और कई अखबारों में उनकी शायरी छप भी चुकी हैं. राहत इंदौरी, मुनव्वर राणा, अनवर जलालपुरी खुशबीर सिंह शाद और नवाज देवबंदी, माजिद देवबंदी  जैसे शायरों के इंटरव्यू व बातचीत का अनुभव भी उनके पास है. आप tahir.kamran@india.com पर सीधे ईमेल या फिर नीचे X और Facbook से जुड़ सकते हैं. 
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