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मिडिल ईस्ट में जारी भीषण तनाव के बीच एक बड़ी खबर आई है. ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका से बातचीत के लिए ईरान सरकार को खास अधिकार दे दिए हैं. इस बात की जानकारी ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने खुद दी है. पेजेशकियान के मुताबिक, देश बातचीत से हल चाहता है. यह कदम बेहद नाजुक समय पर उठाया गया है, क्योंकि ईरान इस वक्त अमेरिका के साथ तनाव घटाने और बाकी मसलों को सुलझाने के लिए काफी एक्टिव है.
ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी इरना (IRNA) के मुताबिक, राष्ट्रपति पेजेशकियन ने कहा, 'हम बातचीत के जरिए इस पूरे मसले का हल निकालने की कोशिश कर रहे हैं. इस सिलसिले में सुप्रीम लीडर ने सरकार को कुछ विशेष अधिकार भी दिए हैं.' पेजेशकियन का यह बयान ऐसे वक्त में आया है, जब कुछ ही समय पहले ईरानी विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की थी कि तेहरान मध्यस्थों के जरिए वाशिंगटन के साथ संदेशों का आदान-प्रदान कर रहा है.
सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह मोजतबा खामेनेई की तरफ से मिले स्पेशल पावर के जरिए यह साफ हो गया है कि ईरानी सरकार के पास अमेरिका के साथ सीधी या परोक्ष बातचीत में कूटनीतिक फैसले लेने की अधिक आजादी होगी.
यह नया कदम दिखाता है कि ईरान के सिस्टम में अंदरूनी तालमेल कितना मजबूत है. इसमें सुप्रीम लीडर ने यह तय किया है कि मुख्य रणनीतिक फैसले और सीमाएं (रेड लाइन) सीधे उनके हाथ में रहेंगी. वहीं दूसरी तरफ, सरकार को जो अधिकार मिले हैं, उनके दायरे में रहकर वह बातचीत और कूटनीति से जुड़ी बारीकियों को संभालेगी.
यह तरीका बताता है कि ईरानी नेतृत्व एक लचीला रुख अपनाने की कोशिश कर रहा है. यह ठीक वही रास्ता है, जिससे देश के बुनियादी उसूलों से भी समझौता न हो और बातचीत का दरवाजा भी खुला रहे.
दरअसल, मिडिल ईस्ट में काफी समय से इजरायल, हमास, हिजबुल्लाह और दूसरे हथियारबंद गुटों के बीच लड़ाई जारी है. यह एक बड़े युद्ध का रूप ले चुकी है. इसी टकराव के चलते ईरान और अमेरिका के रिश्ते तल्ख हो रखे हैं. अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक प्रतिबंध लगा रखे हैं. उसके परमाणु कार्यक्रम पर खींचतान चल रही है. इसके अलावा मिडिल ईस्ट में ईरानी समर्थित गुटों के हमलों की वजह से अमेरिका और ईरान के बीच संवाद पूरी तरह ठप है. दोनों देशों के बीच चल रहे संघर्ष के बीच ओमान और कतर जैसे मुल्क मीडिएटर्स की भूमिका में हैं.