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यूक्रेन का ऑपरेशन विवाल्डी: जंग में उतरी विस्फोटकों से लैस रोबोट सेना, 3,000 रूसी सैनिकों को उतारा मौत के घाट; पुतिन के लिए और बढ़ी टेंशन

Ukraine Using Robots In War: ड्रोन-मिसाइलों और मशीन गन्स के बाद अब यूक्रेन ने रूस के साथ जंग के लिए रोबोट्स को मैदान में उतारा है. ये सुसाइड ग्राउंड रोबोट्स दुश्मन के इलाकों में घुसकर उनपर विस्फोट करते हैं.

यूक्रेन का ऑपरेशन विवाल्डी: जंग में उतरी विस्फोटकों से लैस रोबोट सेना, 3,000 रूसी सैनिकों को उतारा मौत के घाट; पुतिन के लिए और बढ़ी टेंशन

Ukraine-Russia War: जैसे-जैसे दुनिया आधुनिकता की तरफ बढ़ रही है, वैसे ही जंग में एडवांस हथियारों का  इस्तेमाल भी बढ़ रहा है. हाथी-घोड़े, तलवारें, बंदूकें, फिर मिसाइलें और ड्रोनों के बाद अब युद्ध के मौदान में रोबोट सैनिक भी मोर्चा संभालने लगे हैं. बता दें कि रूस-यूक्रेन जंग के बीच कीव ने पहली बार बड़े पैमाने पर सुसाइड ग्राउंड रोबोट का इस्तेमाल करने का दावा किया है.

यूक्रेन का दावा है कि उसने रूसी सेना पर हमले के लिए इन रोबोट्स का इस्तेमाल किया है. कीव की आर्मी कॉर्प्स के मुताबिक,'  जंग में ऑपरेशन विवाल्डी के तहत ड्रोन-रोबोट्स की मदद से रूस के लगभग 3,000 सैनिकों को निशाना बनाया गया. इसके साथ ही  पूर्वी यूक्रेन के डोनेट्स्क इलाकों में 3 बस्तियों और 5 गावों पर दोबारा कंट्रोल स्थापित किया गया.'  यूक्रेनी मिलिट्री के अनुसार, यह मिशन मई 2026 में शुरू किया गया था, जो सितंबर 2026 के आखिरी हफ्ते में पूरा हुआ. गुरुवार ( 24 सितंबर 2026) को इसकी जानकारी सार्वजनिक की गई है. तब तक रोबोट ने कुल 15,700 से अधिक मिशन पूरे किए.

जंग में उतारे रोबोट्स 


यूक्रेन ने इस मिशन को पूरा करने के लिए विस्फोटक से भरे 4 पहियों वाले रोबोट्स का इस्तेमाल किया. इन्हें ड्रोन के जरिए रूसी सेना के बॉर्डर के 14.5 किलोमीटर अंदर तक छोड़ा जाता था, जिसके बाद ये रोबोट जमीन पर चलते रूसी सैनिकों के ठिकानों पर पहुंचकर हमला करते थे. यूक्रेनी सेना इन रोबोट्स पर लगे कैमरे के जरिए आसपास के पूरे क्षेत्र की नजर रखते थे. इसकी मदद से ही रूसी सेना के कमांड सेंटर, सामान रखने की जगहों, हथियार और नदी पार करने वाले रास्तों पर अटैक किया गया. 

सुसाइड ग्राउंड रोबोट्स

इस स्ट्रैटजी का मकसद यूक्रेनी सैनिकों को नुकसान पहुंचाए बिना रूसी ठिकानों पर सटीक हमला करना था. इसको लेकर थर्ड आर्मी कॉर्प्स के कमांडर जनरल आंद्री बिलेत्स्की ने बताया कि यूक्रेन दुनिया में पहली बार ड्रोन के जरिए रोबोट्स को मैदानों में उतारकर दुश्मन इलाकों में हमले करवा रहा है.  

झटके में दुश्मनों का करते हैं चकनाचूर 


बता दें कि सुसाइड ग्राउंड रोबोट्स दिखने में बेहद छोटे होते हैं और पहिये से चलते हैं. इन्हें दूर बैठकर रिमोट से ऑपरेट किया जाता है और साथ ही इसमें विस्फोटक भी भरे होते हैं. इससे ये दुश्मन इलाकों में पहुंचकर वहां धमाका करते हैं. इन रोबोट्स के जरिए सेना गोलियों, दुश्मन के हमलों और बारूदी सुरंगों जैसे खतरों से बच सकते हैं. वहीं रोबोट्स में लगे कैमरे पूरे इलाके और आसपास की गतिविधियों पर नजर रखने का काम करते हैं. हालांकि, ये रोबोट्स कुछ भी अपनी मर्जी से नहीं करते हैं. हमले करने से लेकर इन्हें चालने तक इसके हर फैसले में इंसानों की भूमिका होती है.  

रोबोट्स की जंग में भागीदारी 


रूस और यूक्रेन पिछले साढ़े चार सालों से जंग कर रहे हैं. दोनों देश पीछे हटने के लिए तैयार नहीं हैं. वहीं, युद्ध की स्थिति को देखते हुए यूक्रेन अपने सैनिकों की जान बचाने के लिए रोबोट्स की सेना खड़ी कर रहा है. इसको लेकर खुद यूक्रेन के पूर्व रक्षा मंत्री मिखाइलो फेदोरोव ने 26 सितंबर 2026 को आर्मी ऑफ रोबोट्स नाम के एक नए प्रोजेक्ट का ऐलान किया था. इसके तहत मैदान में जोखिम भरे काम करने के लिए रोबोट्स तैनात करने की योजना बनाई जाएगी. प्रोजेक्ट के तहत इंसानों जैसे दिखने वाले रोबोट्स बनाए जाएंगे, जो मशीन गन में गोलियां भरने, सेंसर लगाने और बैटरी बदलने जैसे काम करेंगे. इससे सैनिक हथियारों-उपकरणों की देखरेख के लिए सैनिकों की सीधे मोर्चे पर उतरने की जरूरत कम हो सकती है. यूक्रेन इस प्रोजेक्ट के लिए पश्चिमी देशों के इंजीनियर्स, टेक्निकल एक्सपर्ट और इन्वेस्टर्स का सहयोग जुटा रहा है.  

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About the Author

Shruti Kaul

Shruti Kaul

ज़ी न्यूज में सब एडिटर. वनस्थली विद्यापीठ यूनिवर्सिटी, राजस्थान से जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन. ये राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय मुद्दो से जुड़े विषयों पर लिखती हैं. लिखने के अलावा श्रुति को नई जगहों पर घूमना, संगीत सुनना, फिल्में देखना और फूड एक्सप्लोर करने का बेहद शौक है. 
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