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UK का बंटवारा: सदियों में बना यूनियन, क्या अब बिखरने की बारी? यूनाइटेड किंगडम में क्यों उठी आजादी की मांग

स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड के शीर्ष नेताओं ने सोमवार (14 सितंबर) को एक MoU पर हस्ताक्षर किया और खुद को यूके यूनियन से अलग होने की मंशा जाहिर की. इस बड़ी बैठक के बाद नया सवाल खड़ा होने लगा है कि क्या यूके संघ अब टूटने की कगार पर आ गया.

UK का बंटवारा: सदियों में बना यूनियन, क्या अब बिखरने की बारी? यूनाइटेड किंगडम में क्यों उठी आजादी की मांग
Image Credit: चार हिस्सों में बंटने जा रहा यूनाइटेड किंगडम? (फोटो- एआई)

समय के साथ काफी कुछ बदल जाता है, अलग-अलग देशों की सत्ता बदलती है, तो कई बार देशों की सीमाएं भी बदलती है. ऐसा कुछ इस समय ब्रिटेन के साथ हो रहा है. इतिहास के पन्नों पर नजर डालें, तो पता चलता है किसी जमाने में दुनिया पर राज करने वाली ये अंग्रेजी हुकूमत आज खुद खंड-खंड में बंटने जा रही है. दुनिया के नक्शे पर तो यूनाइटेड किंगडम (UK) एक बड़ा देश नजर आता है, लेकिन वास्तव में यह एक देश नहीं है. यह इंग्लैंड, स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड से मिलकर बना एक यूनियन है.

सबसे खास बात है कि इन चारों की अपनी अलग भाषा, संस्कृति और अपना अलग इतिहास है. कई सदियों की जंग, राजनीतिक समझौते और राजशाही रिश्तों के बाद ये यूनियन बना था. हालांकि, आज यह टूट की मुहाने पर आ  गया है. लेकिन ऐसा क्यों हुआ और आखिर यूके बना कैसे था, इन सभी सवालों के जवाब तलाशने की कोशिश करेंगे...

आखिर कैसे हुआ था यूके का निर्माण?

फिलहाल आज जिस यूके को नक्शे पर देखते हैं, वह जितना खूबसूरत है, उसका इतिहास भी उतना ही जटिल है. वर्तमान के यूके को बनने की कहानी सदियों पुरानी है. वेल्स, स्कॉटलैंड और आयरलैंड को मिलाकर बने ब्रिटेन की कहानी कई मायनों में दिलचस्प है.  सबसे पहले बात आती है वेल्स की, जिसे 16वीं सदी (1536 और 1543) में कानून बनाकर इंगलैंड के साथ जोड़ दिया गया.

वहीं, इंग्लैंड और स्कॉटलैंड लंबे समय तक लड़ते रहे. इतिहास के पन्नों को देखें, तो पता चलता है कि 1603 में दोनों देशों का राजा एक ही बन गया, बावजूद इसके देश अलग-अलग रहे. वहीं, 1707 में दोनों देशों की संसदों ने एक्ट ऑफ यूनियन पास किया. इस कानून के बनने के बाद दोनों मिलकर 'ग्रेट ब्रिटेन' बन गए. लेकिन इस दौरान स्कॉटलैंड ने अपना कानूनी सिस्टम और चर्च पूरी तरीके से अलग रखा.

आगे चलकर 1801 में आयरलैंड को भी ग्रेट ब्रिटेन से जोड़ा गया, जिसके बाद इस देश का नाम 'यूनाइटेड किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन एंड आयरलैंड' हो गया. हालांकि, यह गठबंधन लंबे समय तक नहीं चल सका. 1920 के दशक में आयरलैंड का एक बड़ा हिस्सा यूके से अलग हो गया और एक स्वतंत्र देश बन गया. लंदन के साथ केवल उत्तरी आयरलैंड बच गया. इस प्रक्रिया के तहत वर्तमान यूके का निर्माण हो सका.

लंबा युद्ध लड़े, फिर भी कैसे साथ आए इंग्लैंड और स्कॉटलैंड

यूके के निर्माण की कहानी जानने के बाद मन में सवाल आता है कि जब इंग्लैंड और स्कॉटलैंड इतने बड़े दुश्मन थे और एक दूसरे से लंबे समय तक लड़ाई करते रहे, तो आखिर ये दोनों देश एक साथ आने को राजी कैसे हो गए. 

बताया जाता है कि 1603 में स्कॉटलैंड के राजा जेम्स VI इंग्लैंड के भी राजा जेम्स I बने. इसके बाद दोनों देशों की राजशाहियां एक हुईं. हालांकि, ये देश अलग ही रहे. आगे चलकर 17वीं शताब्दी में गृहयुद्ध और राजशाही संघर्षों ने दोनों देशों के रिश्तों को और मुश्किल बनाया.

धीरे-धीरे दोनों देशों की राजनीतिक व्यवस्था को एक करने की कवायद चलने लगी और 1707 में चल दोनों देशों के संसदों ने यूनियन को मंजूरी दी थी. कुछ जानकार मानते हैं कि इस मंजूरी के पीछे केवल दोस्ती ही नहीं, बल्कि आर्थिक और राजनीतिक हित को आगे रखा गया था.

सदियों तक लड़ाई के बाद कैसे इंग्लैंड से जुड़ा वेल्स?

एक जमाने में वेल्स को भी एक अलग देश या राज्य के तौर पर देखा जाता रहा है. हालांकि, अब वह यूके का हिस्सा है. बताया जाता है कि मध्यकाल में वेल्स में कई स्वतंत्र वेल्श राजघराने और राजनीतिक इकाइयां थीं. वेल्स और इंग्लैंड के बीच लंबे समय तक संघर्ष देखने को मिला. आगे चलकर 13वीं सदी के अंत में इंग्लैड के राजा एडवर्ड प्रथम ने वेल्स पर अपना नियंत्रण मंजबूत किया.

1536 में Laws in Wales Act और उसके बाद कानूनों में बदलाव करके वेल्स को पूरी तरीके से इंग्लैंड में शामिल किया गया. यही कारण है कि ऐतिहासिक रूप से वेल्स एक अलग देश या राष्ट्र के रूप में देखा जाता है. वेल्स की संस्कृति, भाषा और अपनी अलग पहचान आज भी जीवित है.

आयरलैंड कैसे बना यूके का हिस्सा, लेकिन फिर खुद को किया सेपरेट

यूके के लिए आयरलैंड का इतिहास सबसे मुश्किलों से भरा रहा है. एक जमाने में स्कॉटलैंड यूके का हिस्सा बना, फिर खुद को अलग कर लिया. 1801 में आयरलैंड यूके के साथ मिला और यूनाइटेड किंगडम ऑफ ग्रेट ब्रिटेन एंड आयरलैंड' का निर्माण हुआ.

वहीं, 20वीं सदी की शुरुआत में स्वतंत्रता आंदोलन जब तेज हुआ, तो ब्रिटिश सरकार ने 1920 के Government of Ireland Act के जरिए आयरलैंड को दो हिस्सों में बांटने की व्यवस्था कर दी. इसके बाद 1921 में आयरलैंड का अधिकांश हिस्सा यूके से अलग हो गया और आयरिश फ्री स्टेट बना. वहीं, बाद में आयरलैंड रिपब्लिक बना. हालांकि, उत्तरी आयरलैंड यूके के साथ बना रहा.

स्कॉटलैंड क्यों होना चाहता है यूके से अलग?

स्कॉटलैंड यूके से अलग होने की मांग पहली बार नहीं कर रहा है. पिछले कई दशकों से स्कॉटलैंड अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को लेकर चिंतित नजर आए हैं. उनका मानना है कि उनके देश से जुड़े फैसले लंदन में नहीं, बल्कि उनके ही देश में होने चाहिए.

हालांकि, एक बड़ी वजह ब्रेक्जिट है. साल 2016 में जब यूके ने यूरोपीय संघ (EU) से बाहर निकलने (ब्रेक्जिट) का फैसला किया, उस वक्त स्कॉटलैंड के अधिकांश लोगों ने ईयू में रहने के लिए वोट किया था. बावजूद इसके लिए पूरे यूके को ईयू से बाहर किया गया. ऐसे में स्कॉटलैंड इसे अपने साथ धोखा मानता है. अब स्कॉटलैंड के लोग यूके से अलग होकर अपना स्वतंत्र देश चाहते हैं.

उत्तरी आयरलैंड का मामला भी समझिए

उत्तरी आयरलैंड की कहानी स्कॉटलैंड से थोड़ी अलग है. यहां पर मांग आजादी की नहीं है, बल्कि आयरलैंड रिपब्लिक के साथ दोबारा मिलने की बहस चल रही है. उत्तरी आयरलैंड की आबादी अब दो हिस्सों में बंट चुकी है. एक हिस्सा खुद को ब्रिटिश बताता है, तो कुछ लोग एक बार फिर से आयरलैंड के साथ मिलना चाहते हैं.

साल 1998 में हुए 'गुड फ्राइडे एग्रीमेंट' के दौरान यह तय किया गया था कि अगर किसी समय बहुमत आयरलैंड के साथ मिलने के पक्ष में हुआ, तो वहां पर वोटिंग कराई जाएगी, जिसके बाद यह फैसला किया जा सकेगा. इसी महीने में ब्रिटिश पीएम के कार्यालय की ओर से कहा गया कि फिलहाल वोटिंग कराने के लिए जनसमर्थन नहीं है. वहीं, इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि अंदर ही अंदर ये आग सुलग रही है.

यूके के टूटने पर क्या होगा असर?

हाल में ही वेल्स,स्कॉटलैंड और नॉर्थ आयलैंड के शीर्ष नेताओं ने एक MoU पर हस्ताक्षर किए, जिसके बाद यूके में टूट का  डर फैल गया है. ये कागज अब यूके के पीएम के पास जाएगा. इस बीच लोगों के जेहन में सवाल खड़े हो रहे हैं कि भविष्य इन तीनों देशों में कोई एक या फिर सभी यूके से अलग होते हैं, तो इसका क्या असर पड़ेगा.  

माना जा रहा है कि इसका सबसे बड़ा प्रभाव अर्थव्यवस्था पर देखने को मिलेगा. ऐसे में स्कॉटलैंड के साथ अन्य देशों को भी अपनी नई करेंसी बनानी होगी, नया सेंट्रल बैंक और नया टैक्स सिस्टम बनाना होगा. वहीं, यूके के साथ इन देशों के व्यापार के नियम भी बदल जाएंगे.

इस फैसले का राजनीतिक प्रभाव भी देखने को मिलेगा. यूके की सेना, उसके परमाणु हथियार और दुनिया में उसकी धाक भी कम होगी. ब्रिटेन की संसद का आकार भी काफी छोटा हो जाएगा.

स्कॉटलैंड, वेल्स की पहले से मंशा है कि वह फिर से ईयू का हिस्सा बनें. ऐसे में ये देश यूके से अलग होने के तुरंत बाद यूरोपीय संघ में शामिल होने की कोशिश करेंगे. इसके बाद यूके और ईयू के बीच एक नई लकीर देखने को मिलेगी.

ब्रिटेन की सरकार के सामने मजबूरी

भले ही स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड यूके से अलग होना चाहते हैं, लेकिन  यूके की सरकार किसी भी कीमत पर इस यूनियन को बचाए रखना पसंद करेगी. हालांकि, इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता है कि इस यूनियन की दीवार अब दरकने लगी है. 

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About the Author

abhinav tripathi

abhinav tripathi

अभिनव त्रिपाठी जी न्यूज हिंदी में बतौर सब एडिटर कार्यरत हैं।  पत्रकारिता के क्षेत्र में 3 साल से अधिक समय का अनुभव रखते हैं। डेस्क पर रियल टाइम की देश-विदेश की खबरों को कवर करते हैं। राष्ट्रीय राजनीति और अंतरराष्ट्रीय खबरों को लिखना पसंद है। वैश्विक घटनाक्रम के किसी भी जटिल मुद्दे को आसान भाषा में समझाना अच्छी तरीके से आता है। इससे पहले जागरण डॉट कॉम के साथ सब एडिटर के तौर पर काम कर चुके हैं।  करियर की शुरुआत एक सैटेलाइट चैनल से की थी। पत्रकारिता की पढ़ाई काशी विद्यापीठ वाराणसी से की है। 
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