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बाल्कन प्रायद्वीप के देश सर्बिया में संसदीय चुनाव खत्म हो चुके हैं. अनुमानों के मुताबिक, इस चुनाव में 'स्टूडेंट लिस्ट' नाम के आंदोलन को 53 प्रतिशत वोट हासिल होने जा रहे हैं. अगर ऐसा होता है तो सर्बिया की 250 सदस्यीय संसद में उसे 141 सीटें मिल जाएंगी, जिससे वह आसानी से अपनी सरकार बना सकेगा. वहीं निवर्तमान सत्तारूढ़ सर्बियन प्रोग्रेसिव पार्टी' को चुनाव में लगभग 39 प्रतिशत वोट हासिल हो सकते हैं. जिससे उसका 14 साल से चला आ रहा शासन खत्म हो जाएगा.
द गार्जियन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 'स्टूडेंट लिस्ट' नाम के आंदोलन की ओर से चुनाव में खड़े किए गए 250 उम्मीदवारों में 160 पीएचडी होल्डर हैं. अगर वे सभी कैंडिडेट चुनाव जीत जाते हैं तो यह केवल सर्बिया ही नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे ज्यादा पढ़ी-लिखी संसद होगी. लेकिन असल चुनौती इसके बाद ही शुरुआत होती है.
असल में स्टूडेंट्स के नाम पर चुनाव लड़ने वाले इस आंदोलन में एक भी छात्र या छात्रा नहीं है. इसके बजाय डॉक्टर, प्रोफेसर, बास्केटबॉल स्टार जैसे दिग्गजों नें इस आंदोलन के नाम पर चुनाव लड़ा और अब वे अनुमानित रूप से जीत हासिल करने जा रहे हैं. लेकिन सरकार के विरोध में खड़ा हुआ यह आंदोलन कोई संगठित पार्टी नहीं है और न ही उनका कोई सर्वमान्य नेता है. ऐसे में सरकार कैसे बनेगी, उनका नेता कौन होगा. जीत हासिल करने वाले लीडर आपस में पदों का बंटवारा कैसे करेंगे, सरकार चलाने के लिए उनकी नीतियां क्या होंग, इसके बारे में कुछ भी तय नहीं है.
सरकार विरोधी इस 'स्टूडेंट लिस्ट' आंदोलन का नेतृत्व कार्डियोलॉजिस्ट प्रोफेसर इलिजा सरदानोविक कर रहे हैं. अर्थशास्त्री देजान सोसकिक सरकार के विरोध में चुनाव लड़े हैं और उनके जीतने की संभावना है. उनके साथ ही, रसायन विज्ञान के प्रोफेसरों, 'सर्बियन एकेडमी ऑफ साइंसेज एंड आर्ट्स' के सदस्य भी इस बार के इलेक्शन में खड़े हुए हैं.
'यूरोलीग बास्केटबॉल' के अध्यक्ष पूर्व बास्केटबॉल स्टार देजान बोडिरोगा और समाजशास्त्री जोवो बाकिक भी सरकार के खिलाफ चुनाव लड़ने वालों में शामिल हैं. इस आंदोलन की ओर से इलेक्शन में खड़े हुए लोगों में यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर, वकील, डॉक्टर, कलाकार, किसान और कार्यकर्ता शामिल हैं.
ये सब लोग अलग-अलग जगह और पेशे से जुड़े लोग हैं. वे आपस में एक-दूसरे को ज्यादा जानते भी नहीं है. इसके बावजूद वे सब लोग अलेक्जेंडर वुसिक की 'सर्बियन प्रोग्रेसिव पार्टी' के खिलाफ चुनाव लड़ने के लिए साथ आए. यही उनमें एकमात्र समानता है, इसके अलावा कुछ नहीं.
द गार्जियन की रिपोर्ट के मुताबिक, अभी चुनाव के नतीजे आने बाकी हैं. उसके बाद ही पता चलेगा कि सर्बिया में किसकी सरकार बनेगी. लेकिन अगर 'स्टूडेंट लिस्ट' आंदोलन के नेता जीत हासिल करते हैं तो उनमें बड़े पद हासिल करने के लिए आपस में घमासान हो सकता है. अगर किसी भी तरह सरकार बन गई तो उसकी स्थिरता पर संकट की आशंका रहेगी. सरकार की नीतियों को लेकर आपस में मतभेद की स्थितियां रह सकती हैं. ऐसे में सबसे ज्यादा पढ़ी-लिखी सरकार होने पर भी उसके असफल होने की आशंका है.
राजनीतिक पंडितों का कहना है कि इन सब सवालों का जवाब नतीजे आने के बाद ही दिया जा सकेगा. जरूरी नहीं कि नई सरकार असफल ही हो. अगर आंदोलन के नेता कॉमन एजेंडे पर सहमत हो जाते हैं और पदों को लेकर तालमेल बना लेते हैं तो वह सर्बिया में नया इतिहास भी रच सकती है.
सर्बिया में नवंबर 2024 में नोवी साद के एक रेलवे स्टेशन की कंक्रीट की छत गिर गई थी. उस घटना में 16 लोगों की मौत हुई थी. इस घटना के बाद लोगों का गुस्सा भड़क उठा और 'स्टूडेंट लिस्ट' नाम के आंदोलन का जन्म हुआ. छात्रों की अगुवाई में शुरू हुए इस आंदोलन में निर्माण कार्य में कथित भ्रष्टाचार, तय मानकों की अनदेखी और सरकारी अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की गई.
इसके लिए जगह-जगह प्रदर्शन हुए और यूनिवर्सिटीज के स्टूडेंट्स ने क्लासेज बंद करके हड़ताल शुरू कर दी. अब यह आंदोलन अपने अंतिम मुकाम पर पहुंचता नजर आ रहा है. हालांकि, इस राह में अभी चुनौतियां भी कई हैं.