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(इजरायल के येरूशलम से दिशा यादव की रिपोर्ट)
इजरायल में मंगलवार को आम चुनाव होने वाले हैं. ये इलेक्शन बेंजामिन नेतन्याहू के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं हैं. इजरायल की राजनीति में पिछले 3 दशक से नेतन्याहू बड़ी हस्ती रहे हैं. 1996 में पहली बार प्रधानमंत्री बनने के बाद अब तक वो 6 बार पीएम बन चुके हैं. हालांकि, इजरायल के राजनीतिक हालात आज काफी अलग हैं और उनके सामने हार का खतरा खड़ा है.
इजरायल में सत्ता की जंग तेज है. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के सामने चुनौती सिर्फ चुनाव जीतने की नहीं बल्कि सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत जुटाने की भी है. सुरक्षा, युद्ध और नेतृत्व की जवाबदेही के सवालों के बीच इजरायल की राजनीति एक अहम मोड़ पर है.
बता दें कि इजरायल की संसद नेसेट में कुल 120 सीटें हैं. सरकार बनाने के लिए 61 सीटें जीतना किसी भी पार्टी के लिए जरूरी हैं. लेकिन चुनाव से पहले हुए सर्वे में नेतन्याहू का गठबंधन बहुमत के आंकड़े से पीछे नजर आया है. दूसरी तरफ, विपक्षी दल भी अकेले बहुमत हासिल करने की स्थिति में नहीं दिख रहे.
ऐसे में चुनाव के बाद छोटे दलों और गठबंधन की राजनीति की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है. इजरायल की जनता भी राजनीतिक समीकरणों और देश के हालातों को ध्यान में रखकर अपना नया नेता चुनने की तैयारी कर चुकी है.
नेतन्याहू को चुनाव में हार का डर इतना गहरा सता रहा है कि प्रायोजित टीवी डिबेट्स में भी वे आक्रोश से भरे हुए दिख रहे हैं. पत्रकारों के सामने चीख चीख कर बोल रहे हैं कि इजरायल के इतिहास में उनके जैसा बहादुर, यहूदी हितों के लिए लड़ने वाला पीएम कोई और नहीं हुआ.
डिबेट में बोलते हुए नेतन्याहू ने कहा, 'मैं खुले दिल से बोल रहा हूं. वामपंथी ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म नहीं करेंगे. गादी आईज़ेनकोट (विपक्षी उम्मीदवार) कह रहे हैं कि ईरानी परमाणु बम के साथ रह सकते हैं. लेकिन यह सही नहीं है. या तो वे हमें नष्ट करेंगे या हम उन्हें नष्ट करेंगे. हमारे पास मौका है, अभी 10% बाकी है और यह काम कौन करेगा? सिर्फ हम कर सकते हैं.'
बीबी के नाम से चर्चित नेतन्याहू ने आगे कहा, 'मैंने मोसाद और IDF को निर्देश दिया है कि ईरानी शासन को गिराने की दिशा में काम करें.'
चुनाव को इजरायल के अस्तित्व का मुद्दा बताते हुए दावा किया, 'ईरान चाहता है कि मैं चुनाव न जीतूं. मेरे विरोधी सुरक्षा मुद्दे, खासकर ईरान के परमाणु कार्यक्रम के बारे में ये कह रहे हैं कि ये इजरायल के लिए खतरा नहीं है. इसमें मुख्य मुद्दा ये है कि वामपंथी मेरे खिलाफ वोट मांग रहे हैं.'
नेतन्याहू वोटिंग से पहले ही हर चुनावी सर्वेक्षण में विपक्षी नेता गादी आइजनकोट से हारते दिख रहे हैं. यही वजह है कि नेतन्याहू उनके खिलाफ वोट मांग रहे हर चेहरे को वामपंथी घोषित करने में लगे हैं.
हैरानी की बात ये है कि गादी आइजनकोट इजरायली डिफेंस फोर्स के चीफ रह चुके हैं और नेतन्याहू के अंडर काम कर चुके हैं. लेकिन ईरान, गाजा और लेबनान में इजरायली फोर्स की नीतियों की वजह से उन्होंने इस्तीफा दिया और 2025 में पार्टी बनाकर नेतन्याहू के खिलाफ चुनाव में खड़े हुए. अब नेतन्याहू के सिपहसालार ही उनके राजनीतिक दुश्मन बन चुके हैं.