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लाल सागर के दक्षिण-पश्चिमी तट पर स्थित यमन के हूती आतंकवादियों ने अमेरिका के खासमखास सऊदी अरब का सिरदर्द बढ़ा दिया है. हूतियों ने सऊदी के नियंत्रण वाले रणनीतिक रूप से अहम मोखा पोर्ट पर कब्जा करके दम दिखाया है. मोखा पर कब्जे के बाद हूतियों की पहुंच बाब अल-मंदेब स्ट्रेट यानी उस समुद्री रास्ते से महज 45 मील दूर रह गई है. जिसे होर्मुज स्ट्रेट के चोक होने के बाद दुनिया की एनर्जी सप्लाई का दूसरा अहम रास्ता माना जा रहा था.
बाब अल-मंदेब एशिया और यूरोप को जोड़ने वाले व्यापार मार्ग का दक्षिणी प्रवेश द्वार है. हूतियों, यमनी सरकार और सऊदी अरब के बीच संघर्ष बढ़ने से तेल की कीमतों में तेजी आई है. उधर ईरान स्पॉन्सर्ड हूती ने खुली धमकी दी है कि वो सऊदी अरब के बिजनेस से जुड़े जहाजों को लाल सागर से गुजरने नहीं देंगे. हूतियों ने ये भी कहा है कि उन्हें बाकी देशों के जहाजों से कोई दिक्कत नहीं है.
मोखा पर कब्जा सऊदी और उसके समर्थन वाले यमन के सुरक्षा बलों के लिए तगड़ा झटका है, तो ईरान के लिए यह गुड न्यूज़ है, क्योंकि वो हूतियों का सरपरस्त यानी संरक्षक है. इसके साथ वो वैश्विक ऊर्जा कीमतों पर अपना दबाव बनाए रखने की कोशिश कर रहा है.
होर्मुज से अगर दुनिया के कुल इस्तेमाल का करीब 25 फीसदी तेल-गैस जाता है, जो भारत को सामान मंगाने के लिए पास पड़ता है, उससे इतर बाब अल-मंदेब जलमार्ग लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ता है, जिससे दुनिया के करीब 12 फीसदी माल की आवाजाही इसी रास्ते से होती है.
जब हूती के आतंकी सऊदी की फौज को मार रहे थे, तब 'सऊदी सरकार' ने पाकिस्तान को फोन करके खुद को बचाने की अपील करते हुए मक्का पैक्ट की दुहाई दी, शुरुआत में ये संकेत दिया गया कि पाकिस्तान अपनी एयरफोर्स भेज रहा है, लेकिन दगाबाद पाकिस्तान ने इसे सऊदी और हूती का पर्सनल मैटर बताकर धीरे से पल्ला झाड़ लिया.
इस बीच कुछ रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि पाकिस्तान के कन्नी काटने के बाद अमेरिका ने भी सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को ठेंगा दिखाते हुए मदद करने से इनकार कर दिया. अमेरिकी फौज की सेंट्रल कमांड ने कहा है कि उन्हें अब तक हूतियों को सबक सिखाने का कोई ऑर्डर नहीं मिला है.
सूत्रों के हवाले से आ रही खबर के मुताबिक ट्रंप प्रशासन का लाल सागर में सीधे दखल देने का फिलहाल कोई इरादा नहीं है. ऐसी खबरों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है. हूती, बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के काफी करीब पहुंच गए हैं, जो वैश्विक व्यापार और सऊदी तेल निर्यात के लिए एक अहम रास्ता है.
अमेरिका, यमन में बढ़ती लड़ाई को लेकर चिंतित तो है, वो सऊदी अरब के लिए लगातार समर्थन बढ़ाने की बात तो कह रहा है, लेकिन हूतिओं पर सीधे बम गिराने से बच रहा है. ट्रंप के इसी 'वेट एंड वॉच' वाले रुख ने सऊदी को असहज कर दिया है.