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रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे भयानक युद्ध को साढ़े 4 साल से ज्यादा का वक्त हो चुका है. अपनी ताकत का इस्तेमाल कर रूस, यूक्रेन के करीब 20 फीसदी हिस्से पर कब्जा कर चुका है. इसके बावजूद यूक्रेन हार मानने को तैयार नहीं है और पश्चिम देशों से मिल रही मदद के बल पर रूस को कड़ी टक्कर देने में लगा है. इस भीषण जंग में अब अपने मुल्क से गद्दारी की एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने रूस को हैरान कर दिया है. उसका एक युवा अफसर जंग के बीच में यूक्रेन की खुफिया एजेंसी संपर्क में आया, जिसके बाद उससे मिली टिप के बल पर यूक्रेन ने रूस के 300 से ज्यादा सैनिक मार गिराए. लेकिन सवाल ये है कि उस रूसी अफसर ने ऐसा क्यों किया और गद्दारी के बाद उसका क्या हुआ.
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, अपने देश रूस से गद्दारी करने वाले इस लेव स्तूपनिकोव है. वह रूसी सेना में लेफ्टिनेंट था और उसे डोनबास क्षेत्र की रक्षा के लिए तैनात की गई बटालियन की मदद के लिए मुख्य सिग्नल अधिकारी बनाकर भेजा गया था. उसका काम इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस के जरिए दुश्मन की लोकेशन और उसकी ओर से आने वाले हमलों के बारे में समय रहते आगाह करना था. लेकिन उसने ऐसा नहीं किया. इसके बजाय उसने यूक्रेन की खुफिया एजेंसी से हाथ मिला लिया.
हैरानी की बात ये थी कि उसे ऐसा करने के लिए प्रेरित उसकी मां तातियाना यान्टसेन (49 वर्ष) ने ही किया था. वह मॉस्को के सरकारी कार्यालय में तैनात एक कर्मचारी थी और पुतिन की नीतियों की घोर विरोधी थी. वह पुतिन के शासन के खिलाफ होने वाले कई प्रदर्शनों में भी शामिल हो चुकी थी. जब उसे पता चला कि उसका फ्रंटलाइन पर यूक्रेन के खिलाफ लड़ रहा हा है तो उसने दिमित्रो कार्पेनको नामक व्यक्ति से संपर्क किया.
रिपोर्ट के मुताबिक, दिमित्रो कार्पेनको एक कंप्यूटर प्रोग्रामर था, जो यूक्रेनी सैन्य खुफिया विभाग के लिए काम करता था. तातियाना ने उससे कहा कि उसका बेटा डोनबास एरिया में फ्रंट पर तैनात है और वह यूक्रेन की काफी मदद कर सकता है. अपनी मां की तरह लेव स्तूपनिकोव भी पुतिन विरोधी था और वह यूक्रेन के खिलाफ छेड़ी गई इस जंग के खिलाफ था. तातियाना की बात सुनने के बाद दिमित्रो कार्पेनको ने यूक्रेनी खुफिया एजेंसी से स्तूपनिकोव का गुप्त संपर्क करवाया. इसके बाद वह यूक्रेन का सीक्रेट एजेंट बन गया.
उसने एक दिन यूक्रेनी सेना को रूसी सेना की सटीक लोकेशन भेजी. साथ ही हमला करने का सही वक्त भी बताया. उस तय वक्त से पहले स्तूपनिकोव पेट में ऐंठन का बहाना कर वहां से दूर चला गया. थोड़ी ही देर बाद वहां पर यूक्रेनी मिसाइल गिरी, जिससे 68 रूसी सैनिक मौके पर मारे गए, जबकि 60 गंभीर रूप से घायल हो गए. इसके बाद भी कई हमले उसकी सूचना पर हुए, जिसमें कुल मिलाकर 300 से ज्यादा रूसी सैनिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी.
हमलों में बार-बार उसकी जान बच जाने पर रूसी सेना को उस पर शक होने लगा. इसकी भनक लगते ही स्तूपनिकोव ने यूक्रेनी सेना से संपर्क किया और एक दिन मौका देखकर वह अपने तैनाती वाले इलाके से भाग निकला. वहां पर तैनात यूक्रेन की 72वीं ब्रिगेड के सैनिकों ने जब देखा कि रूसी सेना की ड्रेस में एक आदमी उनकी ओर आ रहा है तो उन्होंने बंदूक तान दी. पास में आने पर उन्होंने स्तूपनिकोव से कोडवर्ड पूछा. इस पर उसने जवाब दिया, 'मूंगफली की दुकान'. इस पर उन्होंने उसे अपनी हिरासत में ले लिया और सुरक्षित तरीके से कीव पहुंचा दिया.
कीव पहुंचने पर स्तूपनिकोव यूक्रेनी सेना की एक विशेष इकाई रूसी वॉलंटियर कॉर्प्स (RVC) में शामिल हो गए. यह यूनिट पुतिन की सरकार के खिलाफ लड़ने वाले विद्रोही रूसियों के लिए बनाई गई थी. वहीं, स्तूपनिकोव के लापता होने पर रूसी सेना ने उनकी मां और बहन पर दबाव बनाना शुरू किया. अफसरों ने उनसे कहा कि अगर स्तूपनिकोव जिंदा है तो वे उससे सरेंडर के लिए मनाएं. लेकिन बेहद घाघ तातियाना ने असहाय मां की एक्टिंग करते हुए अफसरों को बुरी तरह चकमा दे दिया.
रूसी सेना के अफसरों के घर आने पर वह हर बार यही कहती कि उसे बेटे की कोई जानकारी नहीं है और उसे ढूंढकर लाने की जिम्मेदारी सेना की है. इसके बाद उसने मौका मिलते ही फरवरी 2025 में अपनी बेटी के साथ मिलकर सूटकेस पैक करके मोल्दोवा के जरिए रूसी सीमा कर लिया और यूक्रेन पहुंच गई. अपनी मां और बहन के यूक्रेन पहुंचने के बाद स्तूपनिकोव पहली बार दुनिया के सामने आया.
उसने एक यूट्यूब इंटरव्यू में अपनी कहानी सुनाते हुए कहा कि उसने रूसी सेना के साथ गद्दारी करके कुछ भी गलत नहीं किया है. वह सेना यूक्रेन के निर्दोष लोगों को मार रही है, जो उसकी सेना में ली गई शपथ के एकदम खिलाफ था. इसलिए उसने यह कदम उठाया. इस वीडियो के सामने आने के बाद हैरान रूसी सेना ने उसे दबोचने के लिए अभियान शुरू कर दिया है. अब देखना होगा कि इस कहानी का आखिरी अंजाम क्या होगा.