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रूस में विपक्षी नेता नवलनी को ‘जहरीले मेंढक’ से कैसे मारा गया? 2 साल पुरानी वो कहानी, जिसने पूरी दुनिया को चौंकाया

Alexei Navalny Death Mystery: क्या रूस में विपक्षी नेता नवलनी को ‘जहरीले मेंढक’ से मारा गया था? आज हम आपको 2 साल पुरानी कहानी बताने जा रहे हैं, जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया था.

रूस में विपक्षी नेता नवलनी को ‘जहरीले मेंढक’ से कैसे मारा गया? 2 साल पुरानी वो कहानी, जिसने पूरी दुनिया को चौंकाया

Did Putin have Alexei Navalny Killed? रूस की आर्कटिक जेल में देश के विपक्षी नेता एलेक्सी नवलनी 3 साल से बंद थे. वे पूरी दुनिया भर में व्लादिमीर पुतिन के धुर विरोधी चेहरे के तौर पर उभर रहे थे. नवलनी ने पुतिन सरकार पर भ्रष्टाचार के बड़े गंभीर आरोप लगाए थे. इससे गुस्साई रूस की पुलिस ने उन्हें देश विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाकर आर्कटिक की काल कोठरी में कैद कर दिया था.

जेल में अचानक बिगड़ी तबियत और चली गई जान

लेकिन नवलनी के खिलाफ साजिश का असली मकसद अभी पूरा नहीं हुआ था. असली कहानी इसी जेल में लिखी जानी थी. इस जेल की जो कहानी रूसी अधिकारियों ने बताई, उसके मुताबिक फरवरी 2024 में नवलनी रोज की तरह टहलकर लौटे. इसके बाद अचानक उनकी तबियत बिगड़ती चली गई और आखिरकार उनकी मौत हो गई.

नवलनी की मौत की खबर इसलिए सुर्खियों में आई, क्योंकि उनकी पत्नी यूलिया नवलनी पहले ही आशंका जता चुकी थीं कि रुसी एजेंसियां उनके पति की हत्या कर सकती हैं. जब ये खबर रूस की आर्कटिक जेल बाहर आई, तो यूलिया का पहला बयान यही था.

'मेरे पति को पुतिन ने मार डाला'

पत्नी यूलिया नवलनी ने कहा, मेरे पति को 2020 में ‘नोविचोक’ नाम का जहर दिया गया था. इसका इलाज और जहर की पुष्टि जर्मनी में हुई थी. इस बार भी उनके साथ कुछ ऐसा ही किया गया है. मेरे पति की हत्या की गई है.

यूलिया के 2 साल पुरानी वो आशंका इन न्यूज हेडलाइन्स के साथ सच साबित हो गई. ब्रिटेन समेत यूरोप के पांच देशों ने अपनी अपनी लैब्स के हवाले से दावा किया कि नवलनी की हत्या मेंढक के जहर से की गई थी.

नवलनी की मर्डर मिस्ट्री में यहीं से एक ऐसे मेंढक की एंट्री होती है, जिसकी प्रजाति दुर्लभ है. ये दक्षिण अमेरिका के कोलंबिया और इक्वाडोर जैसे देशों के ट्रॉपिकल रेन फॉरेस्ट में पाया जाता है. इसी मेंढक का जहर नवलनी को दिया गया, ऐसा ब्रिटेन और जर्मनी समेत यूरोप के पांच देशों का दावा है. इनमें से जर्मनी वो देश है, जहां साल 2020 में नवलनी का पहले जहरीले इंजेक्शन के बाद इलाज चला था.

मेंढक के जहर से किया काम-तमाम

पूरी दुनिया में रूसी खुफिया एजेंसी केजीबी के सीक्रेट एजेंट्स इसी मॉडस ऑपरेंडी के लिए कुख्यात हैं. अपने दुश्मनों को सीक्रेट प्वाइजन से निपटाना. एलेक्सी नवलनी इनका सबसे लेटेस्ट टारगेट थे.

नवलनी को मौत के घाट उतारने के लिए इस बार रूसी सीक्रेट एजेंट्स ने जिस लैटिन अमेरिकी मेंढक का इस्तेमाल किया, उसके जहर से हत्या का ये पहला केस है. इस मेंढक का नाम है ‘प्वायजन डार्ट फ्रॉग’. डार्ट फ्रॉग का साइज 2 से 5 इंच तक होता है.

गोल्डन रंग की वजह से इसे गोल्डन फ्रॉग कहा जाता है. 2 इंच के डार्ट फ्रॉग में 2 हाथियों को मारने जितना जहर होता है. इसके जहर में ‘एपिबाटिडाइन’ केमिकल होता है जो और किसी जीव में नहीं होता. जहर की माइक्रो डोज भी इंसान को मौत की नींद सुला सकती है.

कहां पाया जाता है ये दुर्लभ जहरीला मेंढक?

दक्षिण अमेरिका के वर्षा वनों का ये दुर्लभ मेंढक जहरीला है, ये बात स्थानीय लोग सदियों जानते थे. इसके जहर के इस्तेमाल करने के भी कुछ रिकार्ड्स हैं. लेकिन ब्रिटेन ने आरोप लगाया है कि नवलनी को मारने के लिए पुतिन ने इसे केमिकल वेपन की तरह इस्तेमाल किया है.

अपनी पति की मौत के बाद राष्ट्रपति पुतिन पर बरसते हुए यूलिया नवलनी ने कहा था, हम पुतिन और पुतिन की सरकार का भरोसा नहीं कर सकते. ये हमेशा झूठ बोलते हैं. आज मैं पूरी दुनिया से ये कहना चाहती हूं कि हमें इस शैतान को हराने के लिए एकजुट होना पड़ेगा. पुतिन को मेरे पति जैसे तमाम लोगों की हत्याओं की जिम्मेदारी लेनी होगी.

नवलनी की तरह यूरोपीय देशों के संगठन ऑर्गनाइजेशन ऑपर द प्रोहिबिशन ऑफ केमिकल वेपन्स ने स्टेटमेंट जारी कर कहा है कि नवलनी की हत्या सिर्फ पुतिन ही करा सकते हैं. ये नवलनी की बॉडी में मिले जहर और पुतिन के निजी मकसद से साफ हो चुका है.

मारने के लिए मेंढक का जहर ही क्यों?

आप हैरान हो रहे होंगे कि जब किसी को मारना ही है, तो किसी भी जहर से मारा जा सकता है. सांप, बिच्छू या सायनाड कोई भी जहर हो सकता है. इसके लिए दुर्लभ मेंढक की तलाश क्यों की गई, वो भी डार्ट फ्रॉग की, जो रूस क्या पूरे यूरोप में नहीं मिलता. इस सवाल का जवाब आपको तभी मिलेगा, जब नवलनी की मौत और डार्ट फ्रॉग से जुड़ी ये रहस्यमयी कड़ी समझेंगे.

एलेक्सी नवलनी पुतिन के करप्शन का पर्दाफाश करने ही वाले थे कि रूसी पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया. ये जनवरी 2021 की बात है. लेकिन इससे पहले ही नवलनी को रूसी सीक्रेट एजेंट्स ने नोविचोक नाम का जहर दे दिया था.

नोविचोक एक नर्व एजेंट है, जिसे नवलनी को कब दिया गया, इसका पता तब चला, जब अगस्त 2020 में रूस के अस्पताल में उनकी हालत बिगड़ने के बाद मेडिकल सपोर्ट के लिए जर्मनी ले जाया गया. यहीं इलाज के दौरान पता चला कि नवलनी को नोविचोक नाम का जहर दिया गया था, जिसका इस्तेमाल रूसी एजेंसियां करती हैं.

नवलनी से क्यों खार खाए हुए थे पुतिन?

यहां एक बात नोट कीजिए, नोविचोक जहर की वजह से रूसी एजेंसियों पर संदेह बढ़ा. इससे ये बात और पक्की हो गई कि जिस नवलनी को पुतिन राष्ट्रपति बनने के बाद से ही रास्ते से हटाना चाहते थे, अब वो उनकी हत्या कराने पर आमादा थे. इस बात के आरोप खुद नवलनी ने लगाए थे.

जनवरी 2021 में नवलनी इलाज के बाद रूस लौटे, तो उन्हें कोर्ट की डेट पर हाजिर नहीं होने का आरोप लगाकर गिरफ्तार किया गया. इस बार ऐसा जहर देने की तैयारी की गई, जिसका सुराग शायद ही कभी मिलता.

नवलनी को क्यों दिया डार्ट फ्रॉग का जहर?

पहली वजह ये थी, कि डार्ट फ्रॉग की सिर्फ जंगली प्रजाति ही जहरीली होती है. अगर किसी डार्ट फ्रॉग को आप नर्सरी में पालें, तो वो बिलकुल जहरीला नहीं होगा. दरअसल डार्ट फ्रॉग के भीतर जहर का कनेक्शन उन कीटों से होता है, जिनका वो  जो वो भोजन करता है

वैज्ञानिकों ने यह जानने के लिए बहुत रिसर्च की कि डार्ट फ्रॉग खाता क्या है, जिससे उसका जहर इतना ताकतवर बन जाता है. दक्षिण अमेरिका के वर्षा वनों में वो कौन सी वनस्पति या जीव है, जो इसे इतना जहरीला बनाती है. डॉर्ट फ्रॉग का जहर इतना दुर्लभ है, कि किसी लैब में इसका पता लगाना नामुमकिन है.

यूरोपीय दावों के मुताबिक फरवरी 2024 में नवलनी को डार्ट फ्रॉग का जहर देने के पीछे रूसी एजेंसियों का मकसद था कि पुतिन का दुश्मन मारा भी जाएगा और दुनिया को पता भी नहीं चलेगा.

कौन थे पुतिन के विरोधी नवलनी?

नवलनी की मौत 48 साल की उम्र में हुई. वो पूरे रूस में एंटी करप्शन एक्टिविस्ट के रूप में चर्चित थे. पुतिन के खिलाफ उनके आरोप साल 2011 से ही सुर्खियों में छाए हुए थे. तब उन्होंने पुतिन की पार्टी को चोरों और ठगों की पार्टी कहा था. इसे साबित करने के लिए वो तमाम डॉक्यूमेंट्स और सबूत होने की बात कहते थे. इसी दावे के साथ वो 2013 में मॉस्को के मेयर का चुनाव लड़े, लेकिन हार गए.

इसके बाद 2018 में नवलनी को राष्ट्रपति का चुनाव लड़ने से रोका गया और फिर गिरफ्तारी हुई. रूस में कहते हैं पुतिन का ये तरीका कोई नया नहीं है. वे अक्सर इसी रहस्यमय तरीके से अपने विरोधियों को निपटाते हैं.

रूस के अंदर क्या चल रहा है, इसका पता दुनिया को कम ही चलता है. बस दुनिया हैरान होती है कि रूस में पुतिन का कोई विपक्षी क्यों नहीं. जो विरोधी है, वो अचानक गायब कैसे हो जाता है, जैसे नवलनी हुए.

रूसी एजेंसियों ने इन्हें जिस आधार पर अरेस्ट किया, उसमें सीक्रेट जेल में रखने की कोई वजह नहीं थी. लेकिन रूस में ऐसा हुआ. इसी जेल में नवलनी को जहर देकर मारने का आरोप है. लेकिन ये पुतिन का कोई पहला शिकार नहीं था.

पुतिन से पंगा मतलब मौत?

वर्ष 2004 में यूक्रेनी विपक्षी नेता और आलोचक विक्टर यानुकोविच को राष्ट्रपति चुनाव के प्रचार के दौरान जहर दिया गया. इलाज के बाद जब वह लौटे, तो उनके चेहरे पर धब्बे पड़ चुके थे, जो अक्सर डाइऑक्सिन विष दिए जाने के बाद होता है.

वर्ष 2006 में केजीबी के पूर्व एजेंट और क्रेमलिन के आलोचक अलेक्जेंडर लिट्विनेंको की मौत रेजिएशन पॉइजनिंग की वजह हुई. लंदन के एक होटल में उन्हें चाय दी गई थी, जिसको पीने के बाद उनकी मौत हो गई. 2016 की ब्रिटिश जांच के दौरान उनकी मौत में व्लादिमीर पुतिन का हाथ होने की बात सामने आई.

पूर्व रूसी जासूस सर्गेई स्क्रीपाल और उनकी बेटी यूलिया इंग्लैंड के सैलिसबरी के एक पार्क में बेहोश पाए गए. डॉक्टरों ने बताया कि उन्हें रशियन आर्मी की ओर से विकसित नोविचोक जहर दिया गया था.

क्या डिक्टेटर बन चुके हैं व्लादिमीर पुतिन?

यूरोपियन एजेंसियों का दावा है कि पुतिन रूस के ऐसे डिक्टेटर हो चुके हैं, जो अपने विरोधी को खत्म करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं. नवलनी न पुतिन के पहले शिकार थे और न ही आखिरी.

पुतिन के इशारे पर रूस के सीक्रेट एजेंट्स पूरी दुनिया में किसी को भी कहीं भी मौत की नींद सुला सकते हैं. ये आरोप लगाते हुए ब्रिटेन समेत पांच देशों ने पुतिन के खिलाफ रासायनिक हथियार के इस्तेमाल का गंभीर केस दर्ज कराया है.

(पैकेज स्टोरी)
 

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About the Author

Devinder Kumar

Devinder Kumar

अनुभवी पत्रकार और अंतर्राष्ट्रीय मामलों के विश्लेषक हैं. पिछले 18 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. अमर उजाला और नवभारत टाइम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में काम करने के बाद, वर्तमान में वे Zee News में कार्यरत हैं. देश-दुनिया और ब्रेकिंग न्यूज पर नजर रखते हैं. अंतर्राष्ट्रीय राजनीति, वैश्विक घटनाक्रमों और खोजपरक पत्रकारिता में विशेष पकड़ है.
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