PoK में सुलगे 'शोले': शहबाज की चुप्पी पर फिर भड़के प्रदर्शनकारी, डेडलाइन खत्म होते ही आजादी की मांग तेज
पीओके यानी पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर में शासन के तरीके को लेकर एक बार फिर बगावत तेज हो गई है. यहां के प्रदर्शनकारी लंबे समय से पाकिस्तान से आजाद होने की मांग कर रहे हैं. 2026 में जिस तरह आंदोलनकारियों को गोली चलाकर मौत के घाट उतारा गया. उससे हालात बेकाबू हो गए हैं.
पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में अवामी एक्शन कमेटी की अगुवाई वाले आंदोलन की डेडलाइन 3 अक्टूबर को खत्म होने के बाद एक बार फिर प्रदर्शनकारियों के अंदर का आक्रोश चरम पर पहुंचता जा रहा है. महीनों से जारी आंदोलन में 50 से ज्यादा लोगों की मौतें हो चुकी हैं. सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारियों का कहना है शहबाज शरीफ की सरकार गूंगी और बहरी हो चुकी है. इस बार महिला प्रदर्शनकारियों की संख्या पहले से कहीं ज्यादा है. वो सीधे सुरक्षाबलों और PAK फौजियों को ललकार रही हैं. हजारों लोगों की लामबंदी ने इस संकट को गहरा दिया है.
सड़कों पर फिर उतरे लाखों लोग
पीओके में एक बार फिर से लोग सड़कों पर हैं. इस्लामाबाद जिन दो राजनीतिक संकटों को महीनों से काबू करने की कोशिश कर रहा था, वे अब तेजी से आपस में टकरा रहे हैं. पाकिस्तान में इमरान खान की जेल से रिहाई की मांग के बीच पीओके में एक बार फिर से आंदोलनकारी आर-पार की लड़ाई की चेतावनी दे रहे हैं.
पाक फौज पर दमन करने का आरोप
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पाकिस्तान की पुलिस और सेना प्रदर्शनकारियों को गोलियों से भून रही है. तमाम जुल्म और सितम सहने के बावजूद हम अपनी मांगों को पूरी करवाने के लिए किसी भी हद से गुजर सकते हैं.
साफ है कि पाकिस्तानीे कब्जे वाले कश्मीर में हजारों लोग एक बार फिर से सड़कों पर उतर आए हैं. यह पूरा इलाका इस साल हुए चुनावों के बाद से लगातार अशांत है. इमरान खान की पार्टी PTI ने चुनावी धांधली और दखलंदाजी के आरोपों के कारण इन चुनावों का बहिष्कार किया था.
PAK Army को चुनौती
करीब पांच दिन पहले आंदोलन का ऐलान हुआ. इस दौरान सरकार को 3 अक्टूबर तक उनकी मांगे मानने का अल्टीमेटम दिया गया. उसके बाद आंदोलन को तेज करने की धमकी दी गई थी. पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मंधोल में हुई एक रैली में पुंछ-मेंढर का रास्ता खोलकर भारत से पुराने संपर्क बहाल करने की मांग उठी थी.
उस समय प्रदर्शनकारी नेता सरदार अमान खान ने भीड़ से पूछा, 'क्या LoC खत्म होनी चाहिए? क्या पुंछ-मेंढर के रास्ते खुलने चाहिए?' तब हजारों की भीड़ ने एक सुर में जवाब दिया, 'हां!'
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में सेना प्रमुख आसिम मुनीर की फौज के दमन के खिलाफ उठी आवाजें अब सिर्फ सुविधाओं की मांग और चुनावों में अपना प्रतिनिधित्व बढ़ाने तक ही सीमित नहीं रह गई हैं. पीओके के लोग सीधे-सीधे पाकिस्तान के नियंत्रण को ही खुली चुनौती देकर आजादी की मांग कर रहे हैं.
भारत ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से पीओके में जारी प्रदर्शनों में जारी हिंसा पर चिंता जताते हुए बयान जारी किया था. भारत 1947 से कहता आया है कि पूरा कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है. इस पर किसी तीसरे देश की बयानबाजी स्वीकार्य नहीं है.