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संसद को लोकतंत्र का मंदिर कहा जाता है, जहां देश के नीति-निर्देशक बैठकर जनता के हितों और देश के विकास पर गंभीर चर्चा करते हैं. लेकिन जब यही मंदिर अखाड़े में बदल जाए, तो लोकतंत्र का सिर शर्म से झुक जाता है. कुछ ऐसा ही नजारा हाल ही में आर्मेनिया की संसद में देखने को मिला है. यहां सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदों के बीच ऐसी हिंसक झड़प हुई कि सदन का माहौल किसी कुश्ती के मैदान जैसा लग रहा था. इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है, जिसे देखकर हर कोई हैरान है.
इस पूरे हंगामे की शुरुआत सत्तारूढ़ पार्टी के सांसद तारोन चखोयान के एक भाषण से हुई. रिपोर्ट के मुताबिक, तारोन ने अपने भाषण के दौरान विपक्षी 'सिविल कॉन्ट्रैक्ट पार्टी' को लेकर कुछ ऐसी अपमानजनक टिप्पणियां कर दीं, जो विपक्ष को नागवार गुजरीं. तारोन के बोलते ही विपक्षी दल के नेता और 'स्ट्रॉन्ग आर्मेनिया पार्टी' के मुखिया नारेक कारापेटयन ने इसका कड़ा विरोध किया. देखते ही देखते दोनों नेताओं के बीच तीखी बहस शुरू हो गई. बात इतनी बढ़ गई कि जुबानी जंग ने चंद मिनटों में ही हिंसक मारपीट का रूप ले लिया.
दरअसल, कुछ समय पहले एक समाजशास्त्री ने दावा किया था कि आर्मेनिया में अधेड़ उम्र की महिलाओं की राजनीति में बढ़ती दिलचस्पी का कारण उनकी यौन असंतुष्टि है और इसी वजह से वे सोशल मीडिया पर ज्यादा राजनीतिक राय रखती हैं. जब एक पॉडकास्ट में विपक्षी नेता नारेक कारापेटयन के चचेरे भाई सरगिस कारापेटयन से इस पर बात की गई, तो उन्होंने बेहद विवादित टिप्पणी कर दी. सरगिस ने कहा कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है, तो देश में कोई भी महिला यौन संतुष्टि से वंचित नहीं रहेगी. बातचीत के दौरान जब दूसरे शख्स ने मजाक में 'सेक्स मंत्रालय' बनाने का जिक्र किया, तो सरगिस ने जोर देकर कहा कि यौन संबंधों के बिना देश की घटती जन्म दर की समस्या दूर नहीं हो सकती.
संसद की कार्यवाही के दौरान सत्तारूढ़ पार्टी के सांसद तारोन चखोयान ने इसी पुराने पॉडकास्ट का जिक्र छेड़ दिया. उन्होंने इस बयान को महिलाओं का अपमान बताते हुए विपक्षी नेता पर निशाना साधा और सवाल किया कि इस शर्मनाक टिप्पणी के लिए अब तक महिलाओं से माफी क्यों नहीं मांगी गई? इसी बात को लेकर बहस इतनी बढ़ गई कि दोनों नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक हुई और मामला आखिरकार मारपीट तक जा पहुंचा.
वायरल हो रहे वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे विपक्षी दल के सांसद गुस्से में भरकर स्पीकर के पोडियम की ओर आगे बढ़े. सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच पहले जमकर तू-तू, मैं-मैं हुई और फिर देखते ही देखते सदन के भीतर ही हाथापाई शुरू हो गई. हालात इतने बेकाबू हो गए कि मारपीट के दौरान एक सांसद को फर्श पर गिरा दिया गया. संसद के गलियारों (कॉरिडोर) में भी तनाव का माहौल फैल गया. स्थिति को बिगड़ता देख तुरंत सुरक्षाकर्मियों को एक्शन लेना पड़ा. सुरक्षाकर्मियों ने दोनों पक्षों के बीच एक दीवार की तरह खड़े होकर उन्हें अलग किया, ताकि हिंसा और ज्यादा न बढ़े.
इस पूरी घटना के दौरान संसद के स्पीकर रुबेन रुबियान का रवैया बेहद चौंकाने वाला रहा. उन्होंने इस हंगामे और मारपीट को तुरंत रोकने से साफ इनकार कर दिया. स्पीकर का कहना था कि वे इस सदन की कार्यवाही को नहीं रोकेंगे, ताकि देश और दुनिया यह सब देख सके. स्पीकर ने सांसदों से कहा, "यह सत्र जारी रहेगा. अब आप लोग खुद फैसला करें कि आपको ऐसे ही मारपीट करनी है या फिर अलग-थलग होकर शांत बैठकर काम करना है." स्पीकर के इस कड़े रुख के बाद भी सदन में अफरा-तफरी का माहौल बना रहा.
आर्मेनिया की संसद में इस तरह की हिंसा कोई पहली बार नहीं हुई है. इसी साल अक्टूबर के शुरुआती दौर में भी 'सिविल कॉन्ट्रैक्ट' और विपक्षी दलों के बीच इसी तरह की झड़प देखने को मिली थी. उस दौरान 'स्ट्रॉन्ग आर्मेनिया पार्टी' के नेता एडगार घजरयान की एक टिप्पणी ने विवाद खड़ा कर दिया था. ऐसा लगता है कि संसद में गर्मागर्म बहस और हिंसक झड़पें अब वहां की राजनीति का एक खतरनाक ट्रेंड बनती जा रही हैं.
हंगामे के दौरान कई समझदार और शांत स्वभाव के सांसद ऐसे भी थे, जो दोनों पक्षों के बीच बचाव करते नजर आए. उन्होंने लड़ते हुए सांसदों को खींचकर अलग किया और मामला शांत कराने की कोशिश की. हालांकि, इस पूरी मारपीट में कई सांसदों के घायल होने की भी खबर सामने आई है. संसद जैसी जगह पर इस प्रकार की हिंसक घटनाएं यह सोचने पर मजबूर कर देती हैं कि जब देश के कानून बनाने वाले ही कानून को ताक पर रखकर आपस में भिड़ जाएंगे, तो आम जनता को क्या संदेश मिलेगा. इस घटना के बाद से आर्मेनिया की राजनीति में सरगर्मी और ज्यादा तेज हो गई है.