बांग्लादेशः मोहम्मद यूनुस को लेकर हुई थी गुप्त प्लानिंग, 2 साल पहले हुए छात्र आंदोलन पर चौंकाने वाला खुलासा
प्रधानमंत्री मोहम्मद यूनुस के प्रेस सचिव रहे शफीकुल आलम ने बांग्लादेश में हुए छात्र आंदोलन और तख्तापलट पर बड़ा खुलासा किया है. उन्होंने दावा किया कि शेख हसीना को सत्ता से हटाने का प्लान बड़े ही सीक्रेट तरीके से तैयार किया गया था. इसमें पत्रकार कद्रुदीन शिशिर की बड़ी भूमिका थी.
बांग्लादेश में 2 साल पहले हुए तख्तापलट को लेकर 2 साल बाद अब बड़ा खुलासा हुआ है. बांग्लादेश के प्रधानमंत्री मोहम्मद यूनुस के प्रेस सचिव रहे शफीकुल आलम ने दावा किया है कि शेख हसीना को सत्ता से हटाने के बड़ी सीक्रेट प्लानिंग की गई थी. शफीकुल आलम के मुताबिक, बांग्लादेशी पत्रकार कद्रुदीन शिशिर ने इस पूरी साजिश में अहम किरदार निभाया था. शफीकुल के मुताबिक, छात्र नेता हर हाल में शेख हसीना को हटाना चाहते थे. इसके लिए उन्होंने मोहम्मद यूनुस से बड़े ही गुप्त तरीके से मुलाकात की थी. इस मुलाकात के दौरान ही मोहम्मद यूनुस को सत्ता सौंपने का प्लान तैयार हो गया था और हसीना सरकार को इसकी भनक तक नहीं लगी थी. शफीकुल के मुताबिक, छात्र नेताओं और मोहम्मद यूनुस के बीच पत्रकार कद्रुदीन शिशिर मध्यस्थ का काम कर रहे थे. उन्होंने काफी सीक्रेट तरीके से दोनों पक्षों के मैसेज को एक-दूसरे तक पहुंचाने का काम किया था.
शफीकुल के खुलासे से मचा सियासी संग्राम!
शफीकुल ने एक फेसबुक पोस्ट से इस बात का खुलासा किया. अपने फेसबुक पोस्ट में शफीकुल ने कहा कि 2024 में शेख हसीना सरकार के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्र नेताओं को एक ऐसे भरोसेमंद शख्स की तलाश थी, जो मोहम्मद यूनुस के साथ उनका संपर्क स्थापित करा सके. उन्होंने कहा कि पत्रकार कद्रुदीन शिशिर ने इस भूमिका बेहतर ढंग से निभाया था.
शफीकुल ने कहा कि AFP के ढाका ब्यूरो में बैठकर ही कद्रुदीन शिशिर इस संवेदनशील कार्य को बेहद गोपनीय तरीके से अंजाम दे रहे थे. शफीकुल ने कहा कि शिशिर का काम इतना ज्यादा गोपनीय था कि शेख हसीना सरकार और पूरी मशीनरी को इसकी भनक तक नहीं लगी. उन्होंने आगे कहा कि अगर शासन-प्रशासन को इसका पता चल जाता, तो आज सभी लोग जेल की सलाखों के पीछे होते.
अमेरिका पर साजिश रचने का आरोप
उधर, पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के बेटे सजीब वाजेद जॉय ने अमेरिका पर उनकी मां की सरकार गिराने की साजिश रचने का आरोप लगाया है. सजीब वाजेद का आरोप है कि अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडेन ने उनकी मां की सरकार गिराने के लिए कथित तौर पर 50 मिलियन डॉलर यानी 4 अरब रुपये से भी ज्यादा की फंडिंग की थी. सेंटर फॉर यूएस-बांग्लादेश रिलेशंस की ओर से आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस उन्होंने कहा था कि कुछ चरमपंथी संगठनों को पैसे देकर अमेरिकी प्रशासन ने मेरी मां को सत्ता से हटाया था.
उन्होंने दावा किया कि अमेरिका से हुई फंडिंग के पैसे का इस्तेमाल कुछ असामाजिक तत्वों को एकजुट करके उनसे हिंसक प्रदर्शन कराए गए. उन्होंने आरोप लगाया कि छात्र आंदोलन की आड़ में देशविरोधी ताकतों ने काफी हिंसा फैलाई. सजीब वाजेद ने छात्र आंदोलन में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े लोगों के शामिल होने का भी दावा किया था. हालांकि, वह इससे जुड़ा कोई सबूत पेश नहीं कर सके.
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