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अमेरिका की नाकेबंदी फेलः ट्रंप की नाक के नीचे से ईरान ने खरीदा 'मौत का सामान'! रिपोर्ट से मचा हड़कंप

रॉयटर्स ने अपनी एक रिपोर्ट में खुलासा किया है कि अमेरिकी नाकेबंदी के बाद भी ईरान बड़े पैमाने पर घातक हथियारों को आयात कर रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह सारा खेल ट्रंप की नाक के नीचे से हो गया और उन्हें इसकी भनक तक नहीं लगी.

अमेरिका की नाकेबंदी फेलः ट्रंप की नाक के नीचे से ईरान ने खरीदा 'मौत का सामान'! रिपोर्ट से मचा हड़कंप
Image Credit: ट्रंप की नाक के नीचे से ईरान ने खरीदा मौत का सामान! (AI तस्वीर)

अमेरिका में मिड टर्म चुनाव के चलते ईरान के ऊपर होने वाले हमले थमे हुए हैं. यह शांति कब तक रहेगी, इसकी कोई गारंटी नहीं है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार बड़ा हमला किए जाने की बात कह रहे हैं. वहीं, दूसरी ओर ईरान भी झुकने को तैयार नहीं है. वह भी अपनी ताकत बढ़ाने में जुटा है. अमेरिकी पाबंदियों के बीच ईरान की ओर से बड़े पैमाने पर घातक हथियार खरीदने की बात सामने आई है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने चीन और रूस से मिसाइल पार्ट्स खरीदे हैं. इसके अलावा यूरोपीय देशों से भी बड़े पैमाने पर घातक हथियारों की डील हुई है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त पहरे के बावजूद समुद्री मार्ग से यह हथियार ईरान पहुंच रहे हैं. इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद अमेरिकी खुफिया एजेंसी एक्टिव हो गई है.

अमेरिकी नाकेबंदी को ईरान ने दिया चकमा

दरअसल, रॉयटर्स ने अपनी एक रिपोर्ट में खुलासा किया है कि अमेरिकी नाकेबंदी के बाद भी ईरान बड़े पैमाने पर घातक हथियारों को आयात कर रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह सारा खेल ट्रंप की नाक के नीचे से हो गया और उन्हें इसकी भनक तक नहीं लगी. रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिकी खुफिया एजेसियों को चकमा देने के लिए ईरान की ओर से कथित तौर पर 5,000 से ज्यादा एजेंसियों का एक गुप्त जाल बनाकर रखा है. 

ट्रंप की नाक के नीचे से खरीदे हथियार

इसी नेटवर्क के जरिए ही ईरान दुनियाभर से ऐसी चीजों का आयात कर रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की ओर से अब तक भारी वाहनों, मिसाइलों के पुर्जों से लेकर से लेकर विस्फोटक खरीदा गया है. इस रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने जनवरी 2025 से लेकर अब तक एजेंसियों के इस पूरे ग्रुप ने करीब 2 अरब डॉलर का व्यापार किया है. रिपोर्ट में कहा गया कि ईरान गुप्त तरीके से अपने तेल को बेच रहा है और इससे जो पैसा आ रहा है, उसका इस्तेमाल हथियार खरीदने के लिए किया जा रहा है.

बड़े ही गुप्त तरीके से चल रहा पूरा खेल

रिपोर्ट के मुताबिक ईरान की यह एजेंसियां कथित तौर पर विदेशी लोगों और शेल कंपनियों के जरिए अपने नेटवर्क को बनाया हुआ है. रॉयटर्स ने कहा कि अमेरिका ने इजरायल की खुफिया एजेंसी के साथ मिलकर इस नेटवर्क की जांच की. इस दौरान पता चला था कि ईरान की कथित एजेंसियों के नाम MOD से शुरू होते हैं और इसके आगे 5 या 6 अंकों का नंबर होता है. इन एजेंसियों के दस्तावेजो की जांच करके पता चला कि इनमें से ज्यादातर एजेंसियां 2013 में बनाई गई थीं. उस समय अमेरिकी प्रतिबंधों से ईरान का तेल कारोबार प्रभावित हो रहा था.

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About the Author

K. Raj Mishra

K. Raj Mishra

कर्मराज मिश्रा ज़ी न्यूज (डिजिटल) टीम में बतौर चीफ सब एडिटर कार्यरत हैं. वे यहां देश-विदेश की राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लिखते हैं. कानपुर यूनीवर्सिटी से पत्रकारिता में मास्टर की डिग्री हासिल करके IBN-7 न्यूज चैनल से इंटर्नशिप की. इसके बाद खबर फास्ट, नेशन लाइव और साधना न्यूज न्यूज चैनलों में काम करने के बाद डिजिटल का रुख किया और 2017 से 2020 तक हिंदुस्थान समाचार न्यूज एजेंसी में बतौर सीनियर सब एडिटर काम किया. इसके बाद News Nation, India Ahead के बाद वर्तमान में Z Media का हिस्सा हैं. मीडिया में 10 साल के कार्यकाल के दौरान यूपी, बिहार, छत्तीसगढ़ और दिल्ली विधानसभा चुनावों के अलावा 2019 और 2024 का लोकसभा चुनाव कवर किया है.
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