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दुनिया एक बार फिर महायुद्ध के मुहाने पर खड़ी नजर आ रही है.रूस के वोल्गोग्राड शहर से एक ऐसी सनसनीखेज खबर लीक हुई है, जिसने अमेरिका और पश्चिमी देशों के होश उड़ा दिए हैं.रिपोर्ट के मुताबिक, व्लादिमीर पुतिन की अनुभवी सेना अब चीनी सैनिकों को ताइवान पर कब्जे के लिए खौफनाक मिलिट्री ट्रेनिंग दे रही है.रूस से गुरिल्ला युद्ध के गुर सीख रही चीनी सेना क्या ताइवान पर किसी बड़े हमले की तैयारी कर रही है.चलिए आपको बताते हैं.
रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि व्लादिमीर पुतिन की अनुभवी सेना चीनी सैनिकों को खौफनाक मिलिट्री ट्रेनिंग दे रही है. मकसद साफ है ताइवान पर कब्जे के लिए चीन को युद्ध का असली अनुभव देना. यानी ताइवान पर कब्जे के लिए चीन ने तैयारी शुरू कर दी है. अमेरिका और पश्चिमी देश अब तक ये मानकर चल रहे थे कि यूक्रेन युद्ध में चीन सिर्फ रूस को ड्रोन इंजन और कलपुर्जे बेचकर आर्थिक मुनाफा कमा रहा है.
लेकिन परदे के पीछे का असली खेल अब बेनकाब हो चुका है.यूरोपीय खुफिया एजेंसियों के हाथ जो गुप्त दस्तावेज लगे हैं, उनके मुताबिक साल 2024 से ही चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी यानी PLA का एक खास दस्ता दक्षिण-पश्चिम रूस के वोल्गोग्राड शहर के पास एक सीक्रेट मिलिट्री बेस पर ट्रेनिंग ले रहा है.
ये वही खतरनाक बेस है, जिसका इस्तेमाल रूस की मशहूर 8वीं आर्मी करती है. वही सेना जिसने पूर्वी यूक्रेन के मोर्चों पर सबसे भीषण जंग लड़ी है.
साल 1979 के वियतनाम वॉर के बाद से चीन की सेना ने कोई बड़ा युद्ध नहीं लड़ा है.ऐसे में चीनी अफसरों को यूक्रेनी मोर्चों पर खूनखराबा देख चुके रूसी जनरलों से तीन मोर्चों पर गुरिल्ला ट्रेनिंग मिल रही है.
शहरी गुरिल्ला वॉर यानी तंग गलियों और बहुमंजिला इमारतों के मलबे के बीच दुश्मन का सफाया करना. ट्रेंच और माइनफील्ड्स बंकरों को पलक झपकते नेस्तनाबूद करना और बारूदी सुरंगों का खतरनाक इस्तेमाल. इसके अलावा, एयर असॉल्ट यानी दुश्मन के सबसे सुरक्षित कंट्रोल रूम को रातोंरात तबाह करना.
रूस सिर्फ ट्रेनिंग तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वो चीन को अपनी सबसे घातक सैन्य तकनीक भी ट्रांसफर कर रहा है. रूस चीन को अकुला-क्लास पनडुब्बी तकनीक और अकॉस्टिक डेटा दे रहा है, ताकि चीनी पनडुब्बियां अमेरिकी सोनार रडार को चकमा देकर समंदर के भीतर साइलेंट किलर बन सकें.
उधर, अमेरिका और ताइवान ने मिलकर हेलस्केप नाम की एक खौफनाक रणनीति बनाई है, जिसके तहत ताइवान जलडमरूमध्य में हजारों ड्रोन भरकर चीनी जहाजों के बेड़े को समंदर में ही दफन करने की योजना है.
लेकिन ब्लैक सागर में यूक्रेनी ड्रोनों से सबक लेते हुए रूस की मदद से चीन अब अपने युद्धपोतों को पूरी तरह ड्रोन-प्रूफ बना रहा है. इतना ही नहीं, दोनों देशों ने मिलकर एलन मस्क के स्टारलिंक सैटेलाइट नेटवर्क को अंतरिक्ष में ही जाम करने का प्लान तैयार कर लिया है.
यही नहीं, S-500 से भी खतरनाक मिसाइल डिफेंस सिस्टम तैयार करने का मास्टरप्लान बना लिया है, जो अमेरिकी हाइपरसोनिक मिसाइलों को हवा में ही राख बना देगा.
चीन और ताइवान का विवाद दशकों पुराना है. बीजिंग ताइवान को अपना विद्रोही प्रांत मानता है और जरूरत पड़ने पर बलपूर्वक कब्जा करने की धमकी देता है.वहीं, लोकतांत्रिक ताइवान खुद को एक संप्रभु और स्वतंत्र देश मानता है.
अमेरिका के समर्थन से ताइवान अपनी संप्रभुता की रक्षा कर रहा है और यही तनातनी अब दुनिया के अगले महायुद्ध का सबसे बड़ा केंद्र बनती जा रही है.
यूक्रेन युद्ध के बाद से पुतिन और शी जिनपिंग की ये जुगबंदी अब ग्लोबल पावर गेम को पूरी तरह पलटने लगी है. दुनिया एक ऐसे बारूद पर बैठी है, जहां जरा सी चूक पूरी पृथ्वी को राख बना सकती है.अमेरिका और पश्चिमी देशों के लिए अब ये सिर्फ चिंता नहीं, बल्कि अस्तित्व की सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है.