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अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद खाड़ी देशों में मचे घमासान के बीच ईरान ने कहा है कि अमेरिका अगर उस पर सैन्य दबाव कम करता है और उसके बंदरगाहों पर लगी रोक हटाता है, तो वह 7 दिन में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोल सकता है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के एक बड़े अधिकारी ने मंगलवार को यह बात कही. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज समुद्र का एक बेहद अहम रास्ता है. यहां से दुनिया के कई देशों को तेल और गैस भेजी जाती है.
ईरान का कहना है कि अमेरिका को पहले साफ तौर पर बताना होगा कि वह लड़ाई नहीं, बल्कि बातचीत के जरिए इस मामले को सुलझाना चाहता है. इसके बाद दोनों देश बातचीत शुरू करने के लिए एक तारीख और पूरी प्रक्रिया तय कर सकते हैं. ईरान का एक प्रतिनिधिमंडल इस समय संयुक्त राष्ट्र की बैठक के लिए न्यूयॉर्क में है. ईरान ने कहा है कि उसके प्रतिनिधियों के पास अमेरिका से बातचीत शुरू करने का पूरा अधिकार है.
अमेरिका को दी चेतावनी
रविवार को ईरान की सेना ने कहा था कि उसे खबर मिली है कि अमेरिका कुछ दूसरे देशों की मदद से फिर सैन्य कार्रवाई शुरू करने की तैयारी कर रहा है. ईरान ने साफ कहा था कि अगर अमेरिका ने ऐसा किया तो वह इसका जवाब देगा. तेहरान का कहना है कि अगर अमेरिका इस इलाके में अपनी सैन्य गतिविधियां और दबाव कम करता है, तो ईरान जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और बातचीत शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ सकता है. ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान भी पहले कह चुके हैं कि अमेरिकी नाकेबंदी खत्म होने की स्थिति में होर्मुज को खोला जा सकता है.
ट्रंप और पेजेशकियान की मुलाकात नहीं
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन मंगलवार को न्यूयॉर्क पहुंचे. लेकिन ईरानी अधिकारी के मुताबिक, उनकी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात नहीं होगी. ईरान ने कहा है कि अमेरिका के साथ लड़ाई खत्म करने के लिए बातचीत न्यूयॉर्क में दूसरे देशों की मदद से हो सकती है. ईरान ने 16 सितंबर को अपना प्रस्ताव कुछ मध्यस्थों के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया था. ईरान का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र की बैठक अमेरिका के लिए बातचीत शुरू करने का अच्छा मौका है. लेकिन इसके लिए अमेरिका को पहले कुछ ठोस कदम उठाने होंगे.
मोजतबा खामेनेई की मंजूरी के बाद आगे बढ़ा प्रस्ताव
ईरान ने अमेरिका के सामने एक नया प्रस्ताव रखा है. इसके तहत तेहरान ने अपने बंदरगाहों की नाकेबंदी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़ी अमेरिकी सैन्य गतिविधियों को खत्म करने की मांग की है. प्रस्ताव को ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई और सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की मंजूरी मिलने की बात कही गई है. यह जानकारी क्योडो न्यूज ने मंगलवार को एक वरिष्ठ ईरानी सरकारी अधिकारी के हवाले से दी.
मीडिएटर्स के जरिए वॉशिंगटन तक पहुंचा प्रस्ताव
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने यह प्रस्ताव मध्यस्थ देशों के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया है. तेहरान की योजना न्यूयॉर्क में होने वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान मध्यस्थ देशों के साथ इस पहल पर चर्चा करने की है. ईरानी अधिकारी ने राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच सीधी मुलाकात की संभावना से इनकार किया है. हालांकि, उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका बातचीत को लेकर गंभीरता और प्रतिबद्धता दिखाता है तो समझौते की दिशा में आगे बढ़ने की गुंजाइश है. ईरान और अमेरिका के बीच जारी टकराव का सीधा असर ऊर्जा बाजार और वैश्विक समुद्री कारोबार पर पड़ा है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में शामिल है.
बंदरगाहों पर पाबंदियां भी बड़ा मुद्दा
यह प्रस्ताव ऐसे वक्त आया है जब ईरानी बंदरगाहों पर लगी पाबंदियों और होर्मुज में समुद्री आवाजाही पर तनाव का असर कच्चे तेल के निर्यात पर पड़ रहा है.तेहरान पहले भी बातचीत दोबारा शुरू करने के लिए कई शर्तें रख चुका है. इनमें ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी खत्म करना और विदेशों में फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियों को बहाल करना शामिल है. नए प्रस्ताव के जरिए ईरान ने अब बातचीत का रास्ता फिर खोलने का संकेत दिया है. हालांकि, आगे की प्रक्रिया इस बात पर निर्भर करेगी कि अमेरिका इन शर्तों पर किस तरह प्रतिक्रिया देता है.