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अफ्रीकी देशों में इबोला वायरस से संक्रमित मरीजों की संख्या में बड़ी तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. 3 अफ्रीकी देशों (युगांडा, दक्षिण सूडान और कांगो) में इस वायरस ने कोहराम मचा रखा है. अब नाइजीरिया में भी इबोला संक्रमित मरीज मिलने से हड़कंप मच गया है. राजधानी अबुजा में इबोला संक्रमण बीमारी के पहले मामले की पुष्टि की गई है. देश के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, युगांडा से यात्रा करके लौटी एक महिला संक्रमित थी. स्वास्थ्य अधिकारियों ने मरीज के संपर्क में आए 44 लोगों की पहचान कर उनकी निगरानी शुरू कर दी है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के अनुसार, नाइजीरिया पांचवां देश है, जहां इबोला वायरस से संक्रमित मरीज मिला हो.
महिला ने युगांडा की यात्रा की थी
डब्ल्यूएचओ के अनुसार, यह मामला इबोला के बुंडीबुग्यो वायरस से जुड़ा है. कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआर कांगो) में 15 मई को इस प्रकोप की घोषणा के बाद नाइजीरिया पांचवां देश बन गया है, जहां इस वायरस का मामला सामने आया है. नाइजीरिया के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, महिला में 7 अक्टूबर को संक्रमण के लक्षण दिखाई देने लगे थे. इसके बाद उसे 11 अक्टूबर को अबुजा के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया. 20 अक्टूबर को प्रयोगशाला जांच में संक्रमण की पुष्टि हुई. फिलहाल, महिला को आइसोलेशन में रखकर उपचार दिया जा रहा है. युगांडा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि महिला वहां केवल कुछ समय के लिए रुकी थी और वह डीआर कांगो के पूर्वी हिस्से में कारोबारी यात्रा पर गई थी. संक्रमण कहां हुआ, इसकी जांच जारी है.
केन्या में इबोला का भयावह स्वरूप
वहीं, युगांडा ने इबोला के मामलों से साफ इनकार कर किया है. युगांडा की सरकार ने कहा कि उसके यहां इबोला का कोई सक्रिय मरीज नहीं मिला है. इस बीच, केन्या में भी संक्रमण के मामले बढ़कर नौ हो गए हैं. अफ्रीका रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (अफ्रीका सीडीसी) के महानिदेशक जीन कासेया ने मौजूदा स्थिति को गंभीर बताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मदद की अपील की है. कांगो में इस प्रकोप के कारण हजारों लोगों की मौत हो चुकी है. अधिकारियों के सामने संक्रमण को रोकने, मरीजों की समय पर पहचान करने और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की चुनौती है. क्षेत्र में लोगों की आवाजाही और संघर्ष प्रभावित इलाकों तक सीमित पहुंच के कारण स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन में भी कठिनाइयां आ रही हैं.
इबोला को लेकर नाइजीरिया की तैयारियां
अब नाइजीरिया में भी इबोला से संक्रमित मरीज पाया गया है. वैसे नाइजीरिया ने जून में ही इबोला से निपटने के लिए एक विशेष कार्यबल गठित किया था. देश की रोग नियंत्रण एवं रोकथाम एजेंसी ने निगरानी बढ़ाने, संदिग्ध मरीजों की पहचान, प्रयोगशाला जांच, संपर्कों का पता लगाने और अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण के उपायों को मजबूत करने की जानकारी दी है.
क्य है इबोला वायरस?
इबोला वायरस एक बेहद खतरनाक और जानलेवा वायरस है. यह वायरस शरीर के अंगों को नुकसान पहुंचाता है और रक्त वाहिकाओं को कमजोर कर देता है. इस वायरस से संक्रमित व्यक्ति के शरीर के अंदर कोशिकाएं टूटने लगती हैं, जिसकी वजह से भारी ब्लीडिंग होने लगती है और मरीज की मौत भी हो जाती है. पहले इसे 'इबोला ब्लीडिंग फीवर' के नाम से जाना जाता था. इस वायरस से संक्रमित व्यक्ति को शुरुआत में तेज बुखार आता है और पूरे बदन में दर्द महसूस होता है. सिरदर्द और गले में खराश के साथ व्यक्ति को बहुत कमजोरी महसूस होती है. इन लक्षणों पर ध्यान ना दिया जाए तो गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं. यह वायरस मच्छरों के काटने से फैलता है. इसके अलावा संक्रमित व्यक्ति के खून, पसीना, लार, उल्टी, पेशाब या वीर्य के सीधे संपर्क में आने से भी वायरस के फैलने का खतरा रहता है.
कितना खरतनाक है यह वायरस?
पश्चिम अफ्रीका में 2014 से 2016 के बीच फैले इबोला प्रकोप में करीब 11,000 लोगों की मौत हुई थी. नाइजीरिया भी उस समय प्रभावित देशों में शामिल था, हालांकि उसने संक्रमण को नियंत्रित कर लिया था. मौजूदा प्रकोप के तेजी से कई देशों तक फैलने के कारण स्वास्थ्य एजेंसियां सतर्कता बरत रही हैं. डब्ल्यूएचओ ने क्षेत्रीय देशों से निगरानी, प्रयोगशाला जांच, संपर्कों की पहचान और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा के उपाय मजबूत रखने को कहा है.
रिपोर्ट- आईएएनएस