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वैज्ञानिकों ने ब्रह्मांड की गहराई में एक ऐसा चमकीला हरा तारा खोज निकाला है, जिसे देखकर एक्सपर्ट्स भी हैरान हैं. वैज्ञानिकों ने हाल ही में अंतरिक्ष में एक ऐसे तारे को ढूंढा है जो हरे रंग की रहस्यमयी रोशनी बिखेर रहा है. अंतरिक्ष की इस दुनिया में रहस्यों की कोई कमी नहीं है, लेकिन जब कोई चीज एकदम अलग और चौंकानी वाली सामने आती है, तो सबका ध्यान उसकी तरफ खिंच जाता है.
क्या है इस तारे का नाम और यह कहां स्थित है?
इस अनोखे तारे का नाम वैज्ञानिकों ने WD J1330+6435 रखा है. यह हमारी धरती से लगभग 280 लाइट-इयर्स दूरी पर मौजूद है. यह तारा 'ड्रैको' नाम के नक्षत्र में छिपा हुआ है. एस्ट्रोनॉमर्स की एक टीम ने इस पर लंबी स्टडी की है, जिसकी रिपोर्ट 'आरएएस टेक्निक्स एंड इंस्ट्रूमेंट्स' नाम के जर्नल में पब्लिश हुई है. इस रिसर्च के सामने आने के बाद से ही स्पेस लवर्स के बीच सनसनी फैल गई है.
नॉर्मल तारे होते हैं दूसरे रंग के, फिर यह हरा क्यों है?
यूनिवर्सिटी ऑफ वार्विक के जाने-माने एस्ट्रोफिज़िसिस्ट मार्क हॉलैंड्स ने सीएनएन को बताया कि सामान्य तौर पर जो तारे हमें आसमान में दिखते हैं, वे या तो नीले, सफेद या फिर नारंगी रंग के होते हैं. लेकिन इस तारे का रंग एकदम अलग है. नॉर्मल स्टार्स की लिस्ट में इस तरह के हरे रंग का कोई तारा फिट ही नहीं बैठता है. यही वजह है कि वैज्ञानिक भी यह सोचने पर मजबूर हो गए हैं कि आखिर ऐसा कैसे संभव हो सकता है.
व्हाइट ड्वार्फ और सोडियम का खतरनाक खेल
असल में यह तारा एक 'व्हाइट ड्वार्फ' यानी सफेद बौना तारा है. व्हाइट ड्वार्फ उन तारों के अवशेष होते हैं जिनका न्यूक्लियर फ्यूल खत्म हो चुका होता है और वे अपनी बाहरी परतों को झाड़ चुके होते हैं. इस तारे का हरा रंग इसकी बहुत ही भारी और घनी हवा यानी एटमॉस्फेयर की वजह से है. इस तारे के अंदर सोडियम और हीलियम के बीच एक अजीब सा रिएक्शन होता है. जब सोडियम वहां की भारी गैसों और हीलियम के साथ रिएक्ट करता है, तो तारे से निकलने वाली रोशनी की वेवलेंथ पूरी तरह बदल जाती है. इसके अलावा कैल्शियम जैसे दूसरे एलिमेंट्स भी इसके स्पेक्ट्रम पर असर डालते हैं.
वैज्ञानिकों ने कैसे लगाया इस बात का पता?
अब सवाल यह आता है कि क्या वैज्ञानिकों ने इस तारे की कोई डायरेक्ट तस्वीर खींची है जिसमें यह हरा दिख रहा है. आपको बता दें कि सीधे फोटो खींचने के बजाय वैज्ञानिकों ने स्पेक्ट्रल डेटा और इंसानों की रंग पहचानने की क्षमता के मॉडल्स का इस्तेमाल करके यह कैलकुलेट किया है कि यह तारा असल में कैसा दिखाई देगा. इस डिजिटल और साइंटिफिक कैलकुलेशन से पता चला कि इस तारे का कुल रंग हरा बैठता है.
280 लाइट-इयर्स दूर होने का असली मतलब क्या है?
जब हम कहते हैं कि यह तारा 280 लाइट-इयर्स दूर है, तो इसका मतलब यह है कि प्रकाश को वहां से यहां तक पहुंचने में 280 साल का समय लगता है. यानी आज हम टेलीस्कोप से जिस तारे को देख रहे हैं, वह असल में वैसा है जैसा वो 280 साल पहले हुआ करता था. हम सीधे तौर पर पास्ट यानी भूतकाल को देख रहे होते हैं. यह बात अपने आप में काफी रोमांचक और दिमाग को हिला देने वाली है.
तारे का तापमान और आकार जानकर उड़ जाएंगे होश
इस व्हाइट ड्वार्फ तारे का तापमान करीब 4,000 डिग्री सेल्सियस है. यह बहुत ही ज्यादा कॉम्पैक्ट और छोटा है. हैरानी की बात तो यह है कि इसका साइज लगभग हमारी अपनी धरती के बराबर ही है, लेकिन इसका वजन बहुत ज्यादा है. इतने छोटे साइज में इतनी ज्यादा ऊर्जा और गर्मी होना किसी चमत्कार से कम नहीं है.