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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने बयानों को लेकर अक्सर चर्चा में रहते हैं. इस बार उन्होंने एक ऐसा दावा किया है जिसने राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी बहस छेड़ दी है. ट्रंप का कहना है कि उनके लेखन कार्य को देखते हुए उन्हें प्रतिष्ठित 'पुलित्जर पुरस्कार' से सम्मानित किया जाना चाहिए था.
बुधवार (21 अक्टूबर) को आयोजित एक रैली के दौरान ट्रंप ने न केवल पुलित्जर पुरस्कार पर अपना दावा ठोका, बल्कि रूस जांच से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए यह पुरस्कार जीतने वाले पत्रकारों की जमकर आलोचना भी की. इसके साथ ही, उन्होंने दुनिया भर में कई युद्धों को रुकवाने का श्रेय लेते हुए एक बार फिर से नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने पर अपनी नाराजगी जाहिर की.
रैली को संबोधित करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने आरोप लगाया कि 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में रूसी दखल की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों ने पूरी तरह से गलत और भ्रामक खबरें चलाई थीं. उन्होंने कहा कि गलत रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों और मीडिया संस्थानों को इतना बड़ा सम्मान नहीं मिलना चाहिए था. यह पूरा मामला साल 2018 का है, जब दिग्गज अमेरिकी समाचार पत्रों 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' और 'द वॉशिंगटन पोस्ट' को रूस-ट्रंप संबंधों की खोजी रिपोर्टिंग के लिए संयुक्त रूप से पुलित्जर पुरस्कार दिया गया था. इन रिपोर्टों में दावा किया गया था कि 2016 के चुनाव में रूस ने हस्तक्षेप किया था और ट्रंप की चुनावी टीम के साथ उसके संपर्कों की जांच चल रही थी.
Trump: I didn't get the Nobel Prize. I didn't get the Pulitzer. I should have gotten the Pulitzer for writing too. https://t.co/OAuyWm7to4
— Acyn (@Acyn) October 22, 2026
ट्रंप शुरुआत से ही इन सभी खबरों को पूरी तरह से मनगढ़ंत और 'फेक न्यूज' बताते आए हैं. उन्होंने कई बार पुलित्जर बोर्ड से इन अखबारों का पुरस्कार वापस लेने की मांग भी की है. हालांकि, साल 2022 में पुलित्जर बोर्ड ने ट्रंप की इस मांग को साफ तौर पर खारिज कर दिया था. बोर्ड ने स्वतंत्र समीक्षा के बाद कहा था कि ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जो यह साबित कर सके कि पुरस्कार विजेता खबरें बाद में गलत पाई गई थीं.
पुलित्जर पर अपना दावा ठोकते हुए ट्रंप ने अपने लेखन करियर का भी परोक्ष रूप से हवाला दिया. आपको बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप अब तक कुल 19 किताबें लिख चुके हैं. उनकी सबसे प्रसिद्ध और चर्चित किताब साल 1987 में आई 'द आर्ट ऑफ द डील' (The Art of the Deal) थी, जिसने उन्हें एक लेखक और बिजनेसमैन के रूप में अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई थी. पुलित्जर पुरस्कार को पत्रकारिता के क्षेत्र में दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित सम्मान माना जाता है. हालांकि, यह केवल पत्रकारिता तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह साहित्य (किताबों), नाटक (ड्रामा) और संगीत (म्यूजिक) की विभिन्न श्रेणियों में भी दिया जाता है. इसी आधार पर ट्रंप का मानना है कि उनके साहित्यिक योगदान को देखते हुए वे इस पुरस्कार के हकदार हैं.
ट्रंप के इस दावे के सामने आते ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई. ढेरों यूज़र्स ने उनके इस बयान पर चुटकी ली और उनकी लेखन क्षमता व बोलने की शैली पर सवाल उठाए.
एक यूज़र ने ट्रंप के बयान पर तंज कसते हुए लिखा, 'जो इंसान बच्चों के लिए एक छोटी सी किताब तक नहीं लिख सकता, उसे सच में लगता है कि उसे पुलित्जर पुरस्कार मिलना चाहिए?'
वहीं, एक अन्य यूज़र ने ट्रंप के भाषण देने और वाक्यों के गठन के तरीके का मजाक उड़ाते हुए लिखा, 'ट्रंप को लेखन के लिए पुलित्जर चाहिए? वे अंग्रेजी भाषा के साथ ऐसा बर्ताव करते हैं जैसे उसे बंधक बना रखा हो. उनके बोले गए वाक्यों का मतलब समझने के लिए तो किसी विशेष खोजी दल (इन्वेस्टिगेशन टीम) की जरूरत पड़ जाएगी.'
पुलित्जर पुरस्कारों की बात करें तो 2026 की आधिकारिक सूची के अनुसार, कुल 25 श्रेणियों में यह सम्मान दिए गए थे. इनमें पत्रकारिता, साहित्य, नाटक, संगीत और एक विशेष सम्मान शामिल था. दिलचस्प बात यह है कि इन पुरस्कारों की सूची में ट्रंप सरकार की नीतियों, फैसलों और उनके कामकाज के तरीकों पर की गई तीखी और निष्पक्ष रिपोर्टिंग को भी शामिल किया गया था और उन पत्रकारों को सम्मानित किया गया था जिन्होंने ट्रंप प्रशासन की अंदरूनी कहानियों को जनता के सामने रखा.
रैली के दौरान ट्रंप के भाषण में केवल पुलित्जर की ही टीस नहीं दिखी, बल्कि उन्होंने नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर भी अपनी भड़ास निकाली. ट्रंप ने एक बार फिर दोहराया कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान दुनिया के कई हिस्सों में चल रहे गंभीर संघर्षों और युद्धों को रुकवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. उन्होंने कहा कि उनके इतने बड़े कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार से वंचित रखा गया, जो कि पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है.
ट्रंप पहले भी कई मंचों से यह शिकायत दर्ज करा चुके हैं कि विश्व स्तर पर शांति स्थापित करने के उनके काम को वैश्विक समुदाय द्वारा सही तरीके से नहीं सराहा गया. कुल मिलाकर, डोनाल्ड ट्रंप का यह ताजा बयान उनके पुराने रुख को ही दर्शाता है, जहां वे खुद को मीडिया और वैश्विक संस्थानों के पक्षपात का शिकार बताते रहे हैं. हालांकि, उनके इन दावों ने एक बार फिर राजनीतिक चर्चाओं और इंटरनेट पर मीम्स के बाजार को गर्म कर दिया है.