आगजनी, लूटपाट और आंसू गैस… फ्रांस में सड़कों पर संग्राम, पुलिस से भिड़े प्रदर्शनकारी, 250 से ज्यादा गिरफ्तार
फ्रांस में जारी प्रदर्शन अब हिंसक हो गए हैं. शनिवार को कई जगहों पर प्रदर्शनकारी और पुलिस के बीच झड़पें देखने को मिलीं. साथ ही पुलिस ने भी कई लोगों को हिरासत में ले लिया है.
फ्रांस के अंदर जारी प्रदर्शनों ने अब हिंसक रूप लेना शुरू कर दिया है. शनिवार को राजधानी पेरिस में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के समूहों के बीच झड़पें हुईं, जिसमें पुलिस ने नकाब और मास्क पहने लोगों को पीछे धकेलने के लिए आंसू गैस का इस्तेमाल किया. अल जजीरा ने बताया कि पुलिस बड़ी संख्या में स्टन ग्रेनेड और आंसू गैस का इस्तेमाल कर रही थी.
इन प्रदर्शनों में छात्र, शिक्षक, ट्रेड यूनियन और फिर से एक्टिव हो रहा ‘येलो वेस्ट’ आंदोलन एक साथ शामिल होने वाले हैं. येलो वेस्ट आंदोलन उन आम लोगों का आंदोलन है, जिन्होंने 2018 में फ्रांस में बढ़ती महंगाई और जीवनयापन की लागत के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किए थे. शनिवार को पेरिस के सिटी सेंटर के उत्तर-पूर्व में मौजूद प्लेस डे ला रिपब्लिक चौक और आसपास की सड़कों पर बड़ी तादाद में दंगों को कंट्रोल करने वाली पुलिस तैनात की गई थी. खबरों के मुताबिक, पुलिस पहले ही दर्जनों लोगों को हिरासत में ले चुकी थी.
इकट्ठा होने से पहले ही हिरासत शुरू
अल-जजीरा के मुताबिक प्रदर्शन की शुरुआत शांतिपूर्ण तरीके से होनी थी, लेकिन प्रदर्शनकारी ठीक से जुट भी नहीं पाए थे कि पुलिस ने उन्हें घेरना शुरू कर दिया. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को अपनी घेराबंदी के बीच फंसा दिया. इसी दौरान तनाव और झड़पें शुरू हुईं.
स्थानीय मीडिया ने बताया कि मार्से शहर में प्रदर्शनकारियों ने सिटी हॉल में घुसकर तोड़फोड़ की और शहर के व्यावसायिक इलाके में दुकानों को लूट लिया. वहीं, लियोन शहर में स्थानीय मीडिया की खबरों के मुताबिक, पर्यटन कार्यालय में आग लगा दी गई.
250 से ज्यादा लोग किए गए गिरफ्तार
फ्रांस के गृह मंत्रालय के मुताबिक, शनिवार दोपहर तक देशभर में विरोध प्रदर्शन की 140 घटनाएं दर्ज की गई थीं. इनमें कुल 32800 लोग शामिल हुए थे. मंत्रालय ने बताया कि अब तक देशभर में 250 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका था.
फ्रांस में हो रहे प्रदर्शन महंगाई, ईंधन और खाने-पीने की चीजों की बढ़ती कीमतों, भारी टैक्स और सरकार के बजट संकट के खिलाफ हो रहे हैं. हालांकि, इन प्रदर्शनों में अब कई वर्गों की अलग-अलग नाराजगी भी जुड़ गई है.
- ईंधन, भोजन और रोजमर्रा की जरूरतों की बढ़ती कीमतों से आम लोगों का खर्च बढ़ रहा है.
- प्रदर्शनकारियों में नाराजगी है कि टैक्स ज्यादा देना पड़ रहा है, जबकि उनकी आर्थिक परेशानियां कम नहीं हो रही हैं.
- फ्रांस पर राष्ट्रीय कर्ज और बजट घाटे का दबाव है. सरकार खर्च कम करने और बजट को संभालने के उपाय तलाश रही है.
- स्कूलों की खराब सुविधाओं को लेकर छात्र पहले से प्रदर्शन कर रहे हैं. कुछ छात्रों ने पुलिस कार्रवाई में गंभीर चोटें लगने की शिकायत भी की है.
- अलग-अलग वर्ग अपनी समस्याओं और मांगों को लेकर आंदोलन में शामिल हो रहे हैं. इससे प्रदर्शन का दायरा बढ़ गया है.
- 2018 में ईंधन की बढ़ती कीमतों के खिलाफ शुरू हुआ येलो वेस्ट आंदोलन फिर सक्रिय हो रहा है. इससे मौजूदा प्रदर्शनों को और ताकत मिल सकती है.