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बंगाल की खाड़ी में ड्रैगन का नया 'फंदा': मोंगला पोर्ट के लिए बांग्लादेश को दिया 'चंदा', भारत की चौखट पर मंडराया खतरा

चीन ने बांग्लादेश के मोंगला पोर्ट के मॉडर्नाइजेशन के लिए भारी-भरकम रकम लोन के तौर पर दी है. मोंगला पोर्ट भारत की सीमा से 80 किमी दूर है. इस वजह से यह रणनीतिक रूप से भारत के लिए बेहद अहम हो जाता है.

Written By Rachit Kumar
Published: Oct 13, 2026, 08:14 AM IST | Updated: Oct 13, 2026, 08:25 AM IST
Image Credit: मोंगला पोर्ट रणनीतिक रूप से बेहद अहम है.
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बांग्लादेश ने अपने दूसरे सबसे बड़े समुद्री बंदरगाह मोंगला पोर्ट के एक्सपेंशन और मॉडर्नाइजेशन के लिए चीन के साथ 32,10,32,54,240 रुपये के रियायती लोन समझौते पर दस्तखत किए हैं. यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब देश भर में इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में चीन का दबदबा बढ़ रहा है. हालांकि, चीन की क्षेत्रीय मौजूदगी पर भारत की कड़ी नजर भी है.

सरकारी समाचार एजेंसी बांग्लादेश संगबाद संस्था (BSS) ने सोमवार को बताया कि यह समझौता शनिवार को बांग्लादेश के आर्थिक संबंध विभाग (ERD) और चीन के एक्सपोर्ट-इंपोर्ट बैंक के बीच हुआ.  ERD के अनुसार, चीन 2 प्रतिशत की रियायती ब्याज दर पर फंड देगा. इसे चुकाने की अवधि 20 साल होगी, जिसमें पांच साल का ग्रेस पीरियड (छूट की अवधि) भी शामिल है.

इस फंड का इस्तेमाल 'मोंगला पोर्ट सुविधाओं के एक्सपेंशन और मॉडर्नाइजेशन प्रोजेक्ट के लिए किया जाएगा. इस प्रोजेक्ट में दो कंटेनर टर्मिनल और खास कार्गो-हैंडलिंग यार्ड का कंस्ट्रक्शन शामिल है. इस प्रोजेक्ट का मकसद बंदरगाह की हैंडलिंग क्षमता को बढ़ाना और इसके इन्फ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करना है.

कहां है मोंगला पोर्ट

मोंगला पोर्ट पसुर नदी के पूर्वी किनारे पर है, जो बंगाल की खाड़ी से लगभग 71 नॉटिकल मील ऊपर की ओर है. यह भारतीय सीमा से लगभग 80 किलोमीटर दूर है, इसलिए इस बंदरगाह के आसपास होने वाला कोई भी डेवलपमेंट रणनीतिक रूप से भारत के लिए अहम है.

क्यों भारत के लिए क्यों चिंता की बात?

नया समझौता बांग्लादेश में मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के मोंगला पोर्ट के पास 110 एकड़ ज़मीन पर प्रस्तावित 'इंडियन इकोनॉमिक जोन' प्रोजेक्ट को रद्द करने के एक साल बाद हुआ है. बांग्लादेश ने इसका कारण यह बताया कि भारत सरकार की तरफ से चुने गए डेवलपर तय समय-सीमा के भीतर कंस्ट्रक्शन वर्क शुरू करने में नाकाम रहे.

यह जमीन 2015 में हुए एक द्विपक्षीय समझौते के तहत भारत के लिए तय की गई थी. इसके बाद भारत सरकार ने इस साइट को विकसित करने के लिए हीरानंदानी ग्रुप की सहायक कंपनी 'एविटा कंस्ट्रक्शन्स' को नियुक्त किया था.

क्यों अहम है यह प्रोजेक्ट?

भारत से जुड़ा प्रोजेक्ट रद्द होने और फिर भारतीय सीमा के पास स्थित एक पोर्ट के एक्सपेंशन के लिए चीन से मिले बड़े लोन के कारण यह मामला लाइमलाइट में आ गया है. हालांकि ये दोनों घटनाएं अलग-अलग हैं. लेकिन इनके समय से पता चलता है कि पड़ोसी देशों के साथ बांग्लादेश के आर्थिक और रणनीतिक संबंधों का नक्शा बदल रहा है.

भारत पहले भी बांग्लादेश में चीन की बढ़ती मौजूदगी, खासकर भारतीय सीमा के पास रणनीतिक रूप से संवेदनशील इलाकों में चल रहे प्रोजेक्ट्स को लेकर चिंता जता चुका है. मोंगला का भारतीय सीमा के करीब होना और बंगाल की खाड़ी तक इसकी पहुंच इस पोर्ट की क्षेत्रीय अहमियत को और बढ़ाती है.

चीन के लिए, पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए फाइनेंसिंग बांग्लादेश के साथ आर्थिक संबंध गहरे करने का एक जरिया है. बांग्लादेश को रियायती लोन से ट्रांसपोर्ट और कार्गो-हैंडलिंग सुविधाओं को अपग्रेड करने के लिए फंड मिलता है. हालांकि, यह एक्सपेंशन दक्षिण एशियाई इन्फ्रास्ट्रक्चर में चीन की बढ़ती भूमिका, जिसमें पाकिस्तान के साथ उसका जुड़ाव भी शामिल है को लेकर क्षेत्रीय चिंताओं के बीच हो रहा है.

जैसे-जैसे बांग्लादेश इस प्रोजेक्ट पर आगे बढ़ रहा है, उसके इन्फ्रास्ट्रक्चर की जरूरतों, चीन के साथ संबंधों और भारत के साथ आर्थिक सहयोग के बीच संतुलन क्षेत्रीय संबंधों में एक अहम फैक्टर बना रहेगा.

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रचित कुमार जी न्यूज डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर हैं. देश, दुनिया और डिफेंस की खबरों को आसान भाषा में बताने में महारत हासिल है. जी न्यूज से मई 2022 में जुड़े और शिफ्ट देखने का 12 साल से ज्यादा का अनुभव है. जी न्यूज में Best Performer अवॉर्ड भी मिल चुका है. जी न्यूज, आजतक और एबीपी न्यूज में शिफ्ट देखते हुए महामहिम, बिहार के बाहुबली सीरीज शुरू की और कई एक्सप्लेनर खबरों पर काम किया.  इंडिया न्यूज और जनसत्ता में शिफ्ट देखने के साथ-साथ ट्रैफिक लाने वाली खबरों को तवज्जो दी. नवभारत टाइम्स से करियर की शुरुआत हुई और वहां तकरीबन ढाई साल तक फ्रंट पेज 2 और देश-विदेश के पन्नों की जिम्मेदारी संभाली. जर्नलिज्म में पोस्टग्रेजुएट और IIMC से डिप्लोमा करने  वाले रचित कुमार 13 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में काम कर रहे हैं. आप Rachit.kumar@India.com पर सीधे ईमेल कर इनसे जुड़ सकते हैं. 
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