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West Asisa War: पश्चिम एशिया में एकबार फिर जंग की गूंज उठने लगी है. अमेरिका जल्द ईरान पर वापस ताबड़तोड़ फायरिंग कर सकता है. इसकी जानकारी गुरुवार ( 1 अक्टूबर 2026) को एक अमेरिकी अधिकारी ने एसोसिएटेड प्रेस (AP) को दी. ऑफिसर ने बताया कि US तकरीबन 9,000 सैनिकों को जहाजों के जरिए मिडिल ईस्ट भेज रहा है. वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ नए संभावित हमलों की चेतावनी दी है.
ट्रंप ने बुधवार ( 30 सितंबर 2026) को दुबई से इजरायल जा रहे विमान पर हुए हादसे को लेकर कहा कि शुरुआती संकेतों से पता चलता है कि भारतीय पायलट स्मित मच्छार पर चाकू से हमला करने और इजरायल जा रहे विमान को दुर्घटनाग्रस्त करने की कोशिश करने वाले को- पायलट का संबंध ईरान से था. व्हाइट हाउस में जब उनसे पूछा गया कि क्या हमले के पीछे के पायलट और तेहरान के बीच कोई संबंध है, तो ट्रंप ने कहा,' जो जानकारी मुझे मिल रही है उसके आधार पर मेरा जवाब हां है, लेकिन हम इस पर अभी काम कर रहे हैं.' ट्रंप ने पायलट के ईरान से संबंधित होने पर जवाबी कार्रवाई करने की बात कही है.
पश्चिम एशिया जाने वाले जहाजों में कुल मिलाकर 7,000 से ज्यादा नाविक और 2,000 मरीन सैनिक सवार हैं. इनमें USS थियोडोर रूजवेल्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप शामिल है, जिसे हाल ही में क्रूजर USS चोसिन के साथ तैनात किया गया. इसके अलावा USS माकिन आइलैंड एम्फीबियस रेडीनेस ग्रुप भी शामिल है, जिसमें USS जॉन पी. मुर्था और USS एंकोरेज एम्फीबियस लैंडिंग शिप शामिल हैं.
'इंडिया टुडे' की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस कदम का मतलब यह हो सकता है कि अक्टूबर 2026 के अंत तक 3 विमानवाहक पोत इस क्षेत्र में मौजूद होंगे. वहीं, मिडिल ईस्ट में पहले से ही तैनात सैनिकों के साथ नए सैनिकों की तैनाती से वहां नौसैनिकों की उपस्थिति बढ़कर 20,000 से ज्यादा हो जाएगी. नेवी ने आखिरी बार अप्रैल 2026 में मिडिल ईस्ट में 3 विमानवाहक पोत स्ट्राइक ग्रुप तैनात किए थे. यह साल 2003 के बाद पहली बार था.
USS जॉर्ज एच डब्लू बुश और USS जॉर्ज वाशिंगटन कैरियर्स USS बॉक्सर एम्फीबियस रेडीनेस ग्रुप के साथ पहले से ही इस क्षेत्र में मौजूद हैं. जॉर्ज वाशिंगटन को आमतौर पर प्रशांत महासागर में तैनात किया जाता है, लेकिन USS अब्राहम लिंकन के चालक दल के समुद्र में 260 दिनों से ज्यादा समय समुद्र बिताने के बाद, उसे पश्चिम एशिया में USS अब्राहम लिंकन की जगह लेने के लिए भेजा गया था.