हमारा अगला विश्लेषण संतान की क्रूरता से जुड़ा हुआ है। हमारे समाज में संतानों को बुढ़ापे की लाठी कहा जाता है। लेकिन सोचिए जब यही बुढ़ापे की लाठी अपने ही माता-पिता की पीठ पर पड़ने लगे तो फिर क्या कहेंगे? 65 साल के तुका तुकाराम राउत पर उनके ही दो बेटों ने हमला कर दिया। इसलिए आज हम इस सवाल का विश्लेषण करेंगे कि बुढ़ापे की लाठी बुजुर्गों की पीठ पर ही क्यों बरस रही है। मित्रों, आप मेरी बाई