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देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति और कांग्रेस संगठन के भीतर से एक बड़ी खबर सामने आ रही है. पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत पार्टी आलाकमान के निर्देशों को दरकिनार करते हुए अपनी 'जन संवाद यात्रा' निकालने पर अड़ गए हैं. उन्होंने सोमवार को तय अपने सभी कार्यक्रमों को यथावत रखने का फैसला किया है और यात्रा स्थगित करने से साफ इनकार कर दिया है.
आलाकमान सख्त, कुमारी शैलजा ने चिट्ठी लिखकर दी चेतावनी
हरीश रावत द्वारा प्रदेश संगठन (PCC) से अलग अपनी समानांतर यात्रा निकालने की घोषणा से कांग्रेस का केंद्रीय नेतृत्व काफी नाराज है. उत्तराखंड की प्रदेश प्रभारी और महासचिव कुमारी शैलजा ने हरीश रावत को एक पत्र लिखकर तत्काल प्रभाव से अपनी यात्रा को रद्द करने का निर्देश दिया है.
पार्टी ने एकजुटता का दिया हवाला
उत्तराखंड की प्रभारी महासचिव कुमारी शैलजा ने हरीश रावत को चिट्ठी लिखी, जिसमें कहा गया कि आप जो यात्रा निकाल रहे हैं, उसको लेकर आपने पीसीसी से कोई चर्चा नहीं की है. कांग्रेस नेतृत्व ने कहा कि अगले कुछ महीनो में विधानसभा चुनाव होने हैं इसलिए पार्टी में एकजुटता की जरूरत है. 'समानांतर कोई यात्रा निकालना पार्टी के हित में नहीं, इसलिए आप अपनी यात्रा को आगे ना बढ़ाएं. पार्टी ने कहा कि आपने कई विवादित बयान भी दिए हैं. बता दें कि पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का जनता के बीच संपर्क स्थापित करने को लेकर सोमवार से जन संवाद यात्रा निकालने का कार्यक्रम है. कांग्रेस नेताओं के मुताबिक व्यापारियों, किसानों और आम जनता की समस्याओं को समझने के लिए इस यात्रा को निकालने का कार्यक्रम था.
क्या है हरीश रावत की 'जन संवाद यात्रा'?
पूर्व सीएम हरीश रावत ने जनता, व्यापारियों और किसानों से सीधा संवाद कायम करने और उनकी समस्याओं को समझने के उद्देश्य से सोमवार से इस यात्रा का ऐलान किया था.हालांकि, कांग्रेस नेताओं के बीच इस बात का खौफ है कि चुनाव से ठीक पहले हरीश रावत का यह कदम संगठन के भीतर गुटबाजी को और बढ़ा सकता है. तमाम नसीहतों और आलाकमान के कड़े रुख के बावजूद हरीश रावत के तेवरों से साफ है कि वे झुकने को तैयार नहीं हैं, जिससे उत्तराखंड कांग्रेस में अंदरूनी कलह और गहरी हो गई है.
खजान दास ऑन हरीश रावत
इस मामले पर उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री खजान दास ने पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत को लेकर कहा है कि उनका अनुभव बहुत ज्यादा है. ब्लॉक की राजनीति से केंद्र और राज्य की राजनीति में बड़े पदों तक वह पहुंचे हैं. एक पूर्व मुख्यमंत्री को इस तरीके से चेतावनी पत्र जारी करना कांग्रेस की गुटबाजी को दिखाता है. भले ही कांग्रेस का अपना मामला हो लेकिन कहीं ना कहीं वरिष्ठ नेता का सड़क पर अपमान किया जा रहा है.
वहीं खजान दास ने भाजपा नेता दिनेश चंद्र आर्य को राज्यसभा चुनाव का प्रत्याशी बनाए जाने को लेकर कहा है कि भाजपा जाति की राजनीति नहीं करती है बल्कि सभी को उचित सम्मान देती है. वह किसी भी जाति का हो धर्म का भी हो जाति और क्षेत्रीय संतुलन के हिसाब से एक बेहतरीन फैसला लिया गया है. कांग्रेस जाति की राजनीति करती है और कांग्रेस को एक बड़ा संदेश दे दिया गया है.
ऐसे में कांग्रेस हाईकमान की आपत्ति के बाद अब उत्तराखंड कांग्रेस में संगठन बनाम व्यक्तिगत जनसंपर्क कार्यक्रम को लेकर सियासी चर्चा तेज हो गई है. आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि रावत यात्रा को लेकर क्या कदम उठाते हैं और प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व के साथ इस मुद्दे पर आगे किस तरह का समन्वय बनता है.