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नंदन श्रीवास्तव/लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर 'पोस्टर वॉर' तेज हो गया है. राजधानी लखनऊ समेत राज्य के 15 प्रमुख जिलों में समाजवादी पार्टी (SP) और पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर निशाना साधा गया है. सपा अध्यक्ष तो सीधे तौर पर निशाना बनाते हुए तीखे और विवादित पोस्टर लगाए गए हैं. लखनऊ के नेशनल पीजी कॉलेज चौराहे समेत बलिया, मऊ, गाजीपुर, आजमगढ़, वाराणसी, बस्ती, हरदोई और सीतापुर जैसे जिलों में इन पोस्टरों के सामने आने से सियासी गलियारों में हड़कंप मच गया है. चस्पा किए गए पोस्टरों में सपा सरकार के कार्यकाल, परिवारवाद, भर्ती प्रक्रिया, माफिया और मुजफ्फरनगर दंगों जैसे मुद्दों को उठाते हुए पार्टी पर निशाना साधा गया है.
सामने आए इन पोस्टरों में माफिया अतीक अहमद, मुख्तार अंसारी और वरिष्ठ नेता आजम खान की तस्वीरें लगाई गई हैं. इन पोस्टरों पर शायरी और तुकबंदी के जरिए सपा सरकार के पुराने दौर पर गंभीर तंज कसे गए हैं. एक पोस्टर पर लिखा है— ‘सपाइयों का क्या भरोसा, चाय, समोसा, रस मलाई, सारे माफिया अपने भाई।’ वहीं दूसरे पोस्टर में लिखा गया है— ‘रसगुल्ला और रसमलाई, एक जाति की सत्ता आई।’
इन पोस्टरों के जरिए साल 2013 की UPPCS भर्ती परीक्षा का भी मुद्दा उठाया गया है. पोस्टर में दावा किया गया है कि उस दौरान 86 में से 56 भर्तियां एक जाति विशेष के लोगों की हुई थीं. इसके साथ ही परिवारवाद पर प्रहार करते हुए लिखा गया है— ‘दाल चावल और अचार, पार्टी मतलब एक परिवार।’ इन नारों के जरिए अखिलेश यादव और सपा की राजनीति पर सवाल खड़े किए गए हैं.
पोस्टरों में सपा शासनकाल की घटनाओं का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव की इफ्तार पार्टियों, मुजफ्फरनगर दंगों और कब्रिस्तान की बाउंड्रीवॉल के लिए 200 करोड़ रुपये के आवंटन पर भी कटाक्ष किया गया है. एक जगह लिखा गया है— ‘खैनी और बनारसी पान, बजट चला गया कब्रिस्तान।’ साथ ही एक अन्य पोस्टर में अखिलेश यादव पर कटाक्ष करते हुए ‘गिरगिटेश’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया है.
फिलहाल, प्रदेश के अलग-अलग जिलों में लगाए गए इन पोस्टरों के जरिए सपा और अखिलेश यादव को घेरने की कोशिश की गई है. इन पोस्टरों के लगने के बाद राजनीतिक पारा हाई हो गया है और इस पर तीखी प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया है.