विशाल सिंह/लखनऊ: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर सियासी खींचतान की संभावना है. दोनों दलों के नेताओं के बयानों में गठबंधन में बड़े भाई की भूमिका को लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है. हालांकि, सीट बंटवारे पर दोनों दलों के बीच अंतिम सहमति क्या होगी, यह बातचीत के बाद ही स्पष्ट होगा. हाल ही में सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस ने अपनी चुनावी तैयारियों के तहत ए, बी और सी कैटेगरी की सीटों का खाका तैयार किया है, लेकिन चुनावी आंकड़े और पिछला रिकॉर्ड दोनों दलों के बीच खींचतान की पूरी कहानी बयां करते हैं.
साल 2022 के विधानसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस अलग अलग चुनाव लड़े थे. पिछले विधानसभा चुनाव में सपा ने आरएलडी और सुभासपा से गठबंधन के बावजूद 403 में से अकेले 111 सीटों पर जीत हासिल की थी. वहीं, कांग्रेस को 403 में सिर्फ दो सीटों पर जीत मिली थी. पिछले चुनाव में कुल 15 करोड़ 19 लाख 44 हज़ार 079 वोटर्स में से 60.2% यानी 9,15,25,592 मतदाताओं ने मतदान किया. इसमें सपा को 2 करोड़ 95 लाख 43 हज़ार 934 वोट मिले थे वहीं कांग्रेस को कुल 21 लाख 51 हजार 234 वोट मिले.
कुल 403 सीटों में से कांग्रेस ने दो सीटें जीतीं थीं. इन दो को छोड़ दें तो कांग्रेस को सिर्फ 19 सीटों पर 20 हज़ार से अधिक वोट्स मिले. 21 विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहां कांग्रेस को 10 हज़ार से 20 हज़ार के बीच वोट मिले. इनके अलावा 31 विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जहां कांग्रेस पार्टी को 5 हज़ार से 10 हज़ार के बीच में वोट्स मिले. यानी 19 21 31 को जोड़ लें तो ये नम्बर 71 बैठता है जहां कांग्रेस को पांच हज़ार से ऊपर वोट मिले.
जिन 73 सीटों (दो विधायकों को जोड़कर) पर कांग्रेस को पांच हज़ार से अधिक वोट मिले, उनमें 16 सीटों पर समाजवादी पार्टी को जीत मिली. ऐसे में जब सीट शेयरिंग पर बात होगी तो कांग्रेस उन सीटों की मांग सबसे पहले करेगी जहां उसे संतोषजनक वोट मिले. अगर पांच हज़ार से ऊपर वाली सीटों को संतोषजनक कहें तो ऐसी 71 सीटों में से सपा ने जिन 16 सीटों पर चुनाव जीता, वहां वो अपने सिटिंग विधायक वाली सीट तो गठबंधन में देगी नहीं. यानी अगर पांच हज़ार वोट को सीट की दावेदारी का आधार माना जाए तो भी इस हिसाब से 73 में से 16 सपा को सिटिंग विधायकों वाली सीटों को घटाने के बार कुल 57 सीटें ही बचती हैं. यानी कांग्रेस एक विधानसभा सीट पर पांच हज़ार वोट का आंकड़ा रख कर दावेदारी करे तो भी उसके पास 57 पर ही दावेदारी का दम दिखाई देता है.
ऐसे में अगर एक विधानसभा सीट पर औसत 400 बूथ मानें जाएं और कांग्रेस के पांच हज़ार वोटों से भाग दिया जाये तो औसत 12.5 वोट एक बूथ पर कांग्रेस को मिल रहे हैं. दस हज़ार वोटों वाली सीट पर ये आंकड़ा औसत हर बूथ पर 25 वोट का हो जाएगा. वहीं यही औसत अगर सपा की सीटों पर लगाए जाएं तो सपा को अगर औसत 50 हज़ार वोट एक विधानसभा मिले तो एक बूथ पर उसे कम से कम 125 वोट मिल रहे हैं. यानी कांग्रेस का दस गुना ज़्यादा वोट मिलते दिखाई दे रहे हैं.
कांग्रेस को 2022 के विधानसभा चुनाव में कुल 19 सीटों पर 20 हज़ार से ज़्यादा वोट मिले थे. सीटों को बात करें तो इनमें मथुरा की सदर, आगरा की खेरागढ़, हरदोई की बिलग्राम, रायबरेली की बछरावाँ, अमेठी की जगदीशपुर, कानपुर की किदवई नगर, गोंडा की गौरा, कुशीनगर की तमकुहीराज, देवरिया की रुद्रपूर, वाराणसी की पिंडरा, रायबरेली की सरैनी, अमेठी की गौरीगंज, कानपुर की गोविंदनगर, प्रयागराज की उत्तरी, प्रयागराज की कोराओं, बाराबंकी की जैदपुर, अमेठी की तिलोई, सिद्धार्थनगर की शोहरतगढ़ और वाराणसी की कैंट वो सीटें हैं जहां कांग्रेस को 20 हज़ार से ज़्यादा वोट मिले.इसी तरह 5 हज़ार से 10 हज़ार वोटों वाली कुल 31 सीटें हैं.