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Blue Drum Case final verdict/मेरठ: पश्चिमी उत्तर प्रदेश के चर्चित 'सौरभ हत्याकांड' में आज, 30 सितंबर को मेरठ की डिस्ट्रिक्ट कोर्ट अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाने जा रही है. अदालत में फैसला आने से ठीक पहले चौधरी चरण सिंह जिला कारागार (मेरठ जेल) में बंद आरोपी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला की गतिविधियों में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है.
जेल में पूजा-पाठ और भक्ति में जुटी मुस्कान
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फैसले की घड़ी नजदीक आते ही जेल के अंदर मुस्कान की दिनचर्या में काफी बदलाव आया है. मुस्कान पहले की तुलना में जेल में ज्यादातर समय धार्मिक गतिविधियों में बिता रही है. वह रोजाना सुबह-शाम आरती-पूजा करने के साथ-साथ सुंदरकांड का पाठ और भगवान शिव की पूजा कर रही है. अपनी मासूम बेटी पीहू की देखभाल के अलावा मुस्कान को जितना भी समय मिलता है, वह मंदिर या अपनी बैरक में हाथ जोड़कर प्रार्थना करने में ही लगा रही है.
गुमसुम और शांत पड़ा है प्रेमी साहिल
वहीं दूसरी ओर, हत्याकांड का दूसरा मुख्य आरोपी और मुस्कान का प्रेमी साहिल जेल में काफी शांत और गुमसुम देखा जा रहा है. साहिल पिछले करीब चार-पांच दिन से खामोश है. वह किसी से ज्यादा बातचीत नहीं कर रहा. जेल अधिकारियों के अनुसार, साहिल अन्य बंदियों या कैदियों से बहुत कम बातचीत कर रहा है. वह ज्यादातर समय अकेला रहता है और खुद को जेल के अपने दैनिक कामों तक ही सीमित रखता है.
17 सितंबर को पूरी हुई थी अंतिम बहस
सौरभ हत्याकांड में जिला जज की अदालत में 17 सितंबर को दोनों पक्षों की अंतिम बहस पूरी हो गई थी. इसके बाद अदालत ने 30 सितंबर को फैसले की तारीख तय की. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, मामले की सुनवाई के दौरान करीब 126 पेशियां हुईं और अभियोजन पक्ष की ओर से 22 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए. कोर्ट में अभियोजन पक्ष ने मामले से जुड़े परिस्थितिजन्य और वैज्ञानिक साक्ष्य पेश किए. वहीं, बचाव पक्ष ने अपनी दलीलें रखते हुए चश्मदीद गवाह नहीं होने का तर्क दिया. अब अदालत इन साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर निर्णय करेगी.
आज कोर्ट में क्या होगा?
पहले दोष पर फैसला: जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा सबसे पहले यह फैसला सुनाएंगे कि साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर मुस्कान और साहिल सौरभ की हत्या के 'दोषी' हैं या नहीं. यदि अदालत दोनों को दोषी ठहराती है, तो इसके बाद सजा की अवधि (फांसी या उम्रकैद) पर दोनों पक्षों के वकीलों के बीच अलग से बहस होगी.