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मोहम्मद गुफरान/प्रयागराज (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी बिसात बिछनी शुरू हो गई है. संगम नगरी प्रयागराज में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच होर्डिंग और पोस्टर के जरिए तीखा वार-पलटवार देखने को मिल रहा है. ब्राह्मण मतदाताओं और सोशल इंजीनियरिंग को लेकर दोनों दलों के नेता आमने-सामने आ गए हैं. इस पोस्टर वॉर ने प्रयागराज ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के सियासी पारे को चढ़ा दिया है.
'नेहरू वंशज को नहीं अपनाएगा ब्राह्मण'
प्रयागराज की सड़कों पर बीजेपी नेताओं श्रीशचंद्र दूबे और नितिन दुबे की तरफ से एक नया होर्डिंग लगाया गया है, जो चर्चा का केंद्र बना हुआ है. इस होर्डिंग के जरिए सीधे तौर पर कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधा गया है.
होर्डिंग पर लिखा गया है...
"ब्राह्मण शंख बजाएगा, लेकिन नेहरू वंशज को नहीं अपनाएगा। दलित, पिछड़ा साथ चलेगा और 2027 में तीसरी बार बीजेपी सरकार बनाएगा।"
कांग्रेस के पोस्टर पर बीजेपी का करारा जवाब
दरअसल, यह पूरा विवाद दो दिन पहले शुरू हुआ था जब आराधना मिश्रा (मोना) को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने एक होर्डिंग लगाया था. उस पोस्टर में कांग्रेसियों ने लिखा था कि "ब्राह्मण शंख बजाएगा और दलित, पिछड़ा व अल्पसंख्यक चलता जाएगा।"
कांग्रेस के इस स्लोगन पर पलटवार करते हुए अब बीजेपी ने शहर भर में नया पोस्टर चस्पा कर दिया है. बीजेपी नेताओं का दावा है कि प्रदेश का ब्राह्मण और समाज का हर वर्ग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नीतियों के साथ है और 2027 में उत्तर प्रदेश में लगातार तीसरी बार पूर्ण बहुमत की बीजेपी सरकार बनेगी.
2027 से पहले पोस्टर के जरिए सियासी संदेश
UP में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सभी प्रमुख दल अपनी राजनीतिक रणनीति और सामाजिक समीकरणों को धार देने में जुटे हैं. प्रयागराज का यह पोस्टर वार भी इसी राजनीतिक माहौल के बीच सामने आया है. खास तौर पर ब्राह्मण, दलित और पिछड़े वर्ग को लेकर दोनों पक्षों के संदेशों ने स्थानीय सियासी हलचल बढ़ा दी है. बीजेपी की ओर से लगाए गए होर्डिंग के जरिए कांग्रेस पर निशाना साधने वाले नेताओं का संदेश अब चर्चा में है. वहीं कांग्रेस की ओर से लगाए गए पहले के पोस्टर को लेकर भी राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं.फिलहाल प्रयागराज में लगे इन पोस्टरों ने 2027 से पहले यूपी की सियासत में सामाजिक समीकरणों और राजनीतिक नैरेटिव की लड़ाई को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है.