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आशीष श्रीवास्तव/सुल्तानपुर: उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय निषाद ने एक जनसभा के दौरान विवादित बयान देकर नया सियासी बखेड़ा खड़ा कर दिया है. सुल्तानपुर में कार्यकर्ताओं और समर्थकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि अगर कोई उन पर हाथ उठाता है, तो उसका हाथ तोड़ दो, ज़मानत कराने का काम उनका (संजय निषाद का) रहेगा.
सदर विधायक द्वारा आयोजित था महासम्मेलन
यह पूरा मामला सुल्तानपुर जिले के कूरेभार क्षेत्र का है, जहां निषाद पार्टी की ओर से एक बड़े महासम्मेलन का आयोजन किया गया था. इस कार्यक्रम के आयोजक सुल्तानपुर की सदर विधानसभा सीट से निषाद पार्टी के विधायक राज बाबू उपाध्याय थे. इसी जनसभा को मुख्य अतिथि के तौर पर संबोधित करने कैबिनेट मंत्री संजय निषाद पहुंचे थे.
मंच से खुलेआम दी चेतावनी
मंच से अपने समर्थकों का हौसला बढ़ाने के दौरान संजय निषाद के बोल बिगड़ गए. उन्होंने कानून-व्यवस्था की परवाह किए बिना कार्यकर्ताओं से सीधा आह्वान किया कि वे किसी के सामने न झुकें और अगर कोई हिंसा या हमला करने की कोशिश करे तो उसका मुंहतोड़ जवाब दें.
राजनीतिक मुद्दों का भी जिक्र
जनसभा में संजय निषाद ने निषाद समाज के अधिकार, आरक्षण और सम्मान से जुड़े मुद्दे भी उठाए. उन्होंने कार्यकर्ताओं से संगठन को मजबूत करने और गांव-गांव सक्रिय रहने की अपील की. आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए उन्होंने समाज के लोगों से एकजुट रहने का आह्वान भी किया. संजय निषाद ने अपने संबोधन में विपक्षी दलों पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि जो निषाद समाज के हित की बात करेगा, समाज उसके साथ खड़ा रहेगा.
संजय निषाद के इस आक्रामक और विवादित बयान का वीडियो सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं गर्म हो गई हैं. विपक्ष ने सत्तारूढ़ गठबंधन के मंत्री के इस तरह के बयान पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं.
राजनीतिक मायने क्या हैं?
संजय निषाद का यह बयान ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो रही हैं. निषाद पार्टी अपने सामाजिक आधार को मजबूत करने के साथ-साथ निषाद समुदाय के मुद्दों को राजनीतिक तौर पर प्रमुखता देती रही है. ऐसे में सुल्तानपुर के महासम्मेलन में दिया गया यह आक्रामक संदेश समुदाय के बीच राजनीतिक एकजुटता और संगठनात्मक सक्रियता बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है.
वहीं, निषाद पार्टी बीजेपी के साथ गठबंधन में है. ऐसे में संजय निषाद का अपने सामाजिक आधार के बीच इस तरह मुखर होना गठबंधन की राजनीति के साथ-साथ अपनी पार्टी की अलग राजनीतिक पहचान और सामाजिक पकड़ मजबूत रखने के प्रयास से भी जोड़कर देखा जा सकता है. हालांकि, बयान के राजनीतिक असर को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगी.