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UP Assembly Elections 2027: उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा बयान देकर हलचल तेज कर दी है. देवरिया में आयोजित सुभासपा की ‘सामाजिक समरसता रैली’ को संबोधित करते हुए ओपी राजभर ने दावा किया कि आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश चार अलग-अलग हिस्सों में विभाजित होगा. उनका यह बयान सामने आने के बाद यूपी की सियासत में चर्चा तेज हो गई है.
पूर्वांचल राज्य का मुख्यमंत्री राजभर समाज का बेटा ही बनेगा
मंच से जनता को संबोधित करते हुए ओपी राजभर ने कहा कि जब उत्तर प्रदेश का विभाजन होकर चार राज्य बनेंगे, तो उनमें से पूर्वांचल राज्य का मुख्यमंत्री राजभर समाज का बेटा ही बनेगा. उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और सियासी गलियारों में नई बहस छिड़ गई है.
27 फीसदी आरक्षण में हिस्सेदारी की मांग
रैली के दौरान ओपी राजभर ने अति पिछड़ों और वंचितों के हक का मुद्दा जोर-शोर से उठाया. उन्होंने 27 प्रतिशत अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आरक्षण के विभाजन और वर्गीकरण की मांग को दोहराते हुए कहा कि जब तक आरक्षण का सही बंटवारा नहीं होगा, तब तक सबसे निचली पायदान पर खड़े समाज को उसका वाजिब हक नहीं मिल सकेगा.
विपक्षी दलों पर बोला तीखा हमला
चुनावी माहौल के बीच अपने संबोधन के दौरान कैबिनेट मंत्री ने समाजवादी पार्टी (सपा), कांग्रेस और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि इन दलों ने लंबे समय तक सत्ता में रहते हुए पिछड़ों और शोषितों को केवल वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया, लेकिन उनके अधिकारों की बात आने पर हमेशा वादाखिलाफी की. उन्होंने सपा, कांग्रेस और बसपा की राजनीति पर सवाल उठाते हुए अपने समाज के लोगों से राजनीतिक रूप से सजग रहने की अपील की. रैली में उन्होंने प्रदेश सरकार की योजनाओं और रोजगार से जुड़े दावों का भी उल्लेख किया.
पूर्वांचल में वोटबैंक पर पकड़ मजबूत करने की कवायद
यूपी के चार हिस्सों में विभाजन और "पूर्वांचल में राजभर समाज के सीएम" का दांव खेलकर ओपी राजभर 2027 के चुनावों से पहले पूर्वांचल के राजभर और अति-पिछड़े वोट बैंक पर अपनी राजनीतिक सौदेबाजी (Bargaining Power) बढ़ाना चाहते हैं. OBC आरक्षण के भीतर बंटवारे की मांग उठाकर वे यह संदेश दे रहे हैं कि 2027 के गठबंधन में उनकी अहमियत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. वे एनडीए (NDA) गठबंधन के भीतर रहकर भी अति-पिछड़ों के 'इकलौते नुमाइंदे' के रूप में अपनी छवि बनाए रखना चाहते हैं. समाजवादी पार्टी के 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) और जातिगत जनगणना के नैरेटिव का मुकाबला करने के लिए राजभर क्षेत्रीय पहचान (पूर्वांचल) और अति-पिछड़ा कार्ड खेल रहे हैं, ताकि सपा-कांग्रेस गठबंधन को इस बेल्ट में बढ़त बनाने से रोका जा सके.
ओपी राजभर का यह बयान महज एक चुनावी घोषणा नहीं, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पूर्वांचल में अपनी सीटों का दायरा बढ़ाने, बीजेपी (गठबंधन सहयोगी) पर दबाव बनाने और अति-पिछड़े मतदाताओं को एकजुट रखने की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है.
राजभर का 'यूपी चार हिस्सों में बंटेगा और पूर्वांचल का मुख्यमंत्री राजभर समाज का बेटा होगा' वाला बयान अब राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है. हालांकि, यह फिलहाल राजभर का राजनीतिक दावा और उनकी प्रस्तावित क्षेत्रीय पुनर्गठन की बात है, न कि उत्तर प्रदेश के विभाजन का कोई घोषित सरकारी फैसला.