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Meerut Jail History: मेरठ के चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में 14 अक्टूबर का दिन ऐतिहासिक बन गया. पत्नी मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई है. कोर्ट के इस फैसले के बाद अब हर किसी के मन में एक ही सवाल है- आखिर दोनों को फांसी कब दी जाएगी? लेकिन फांसी की तारीख तय होने से पहले कानूनी प्रक्रिया के कई पड़ाव बाकी हैं. ऐसे में मेरठ जेल का इतिहास भी चर्चा में आ गया है. आखिर मेरठ जेल का इतिहास कितना पुराना है? यहां कब-कब फांसी दी गई और क्या सौरभ हत्याकांड के दोषियों को भी इसी जेल में फांसी होगी? आइए जानते हैं तमाम सवालों के जवाब?
मेरठ जेल कितना पुराना?
मेरठ जेल की स्थापना 1857 में हुई थी. साल 2021 में मेरठ जेल का नाम पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के नाम पर कर दिया गया है. सौरभ राजपूत हत्याकांड के दोषी मुस्कान और साहिल इसी जेल में बंद हैं. 19 मार्च 2025 को मेरठ पुलिस ने गिरफ्तार कर दोनों को जेल भेज दिया था. जेल में ही मुस्कान ने एक बेटी को जन्म दिया है, जिसका नाम 'राधा' है. 14 अक्टूबर को दोनों मेरठ जेल से ही वर्चुअल पेश हुए थे.
मुस्कान और साहिल को दिए गए नए नंबर
मेरठ जेल के अधीक्षक वीरेश राज शर्मा ने बताया कि फैसला आने के बाद डेढ़ मिनट तक दोनों रोते रहे. दोनों ने आपस में बात नहीं की. इन लोगों को लग रहा था कि उम्रकैद होगी. मेरठ जेल प्रशासन ने दोषियों को उनके अधिकारों के बारे में बताया है. दोनों अपील कर सकते हैं. अभी कोर्ट का विस्तृत आदेश नहीं आया है. आदेश आने के बाद बंदियों को नया नंबर और दोषी बंदियों को कपड़े पहनाए जाएंगे.
51 साल बाद दी जाएगी किसी को फांसी
कोर्ट द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद 51 साल बाद किसी को मेरठ जेल में फांसी दी जाएगी. इससे पहले 1975 में आखिरी बार मेरठ जेल में किसी को फांसी की सजा दी गई थी. 17 जुलाई 1975 को मुजफ्फरनगर के रहने वाले कर्म सिंह पुत्र हरि सिंह को मेरठ जेल में फांसी दी गई थी. आजादी के बाद पहली बार 1951 में काशीपुरा नैनीताल के रूप किशोर को फांसी दी गई थी. जेल रिकार्ड के मुताबिक, 1951 से 1975 तक 17 गुनाहगारों को फांसी दी जा चुकी है.
सुरेंद्र कोली को दी जानी थी फांसी
इससे पहले निठारी कांड के सुरेंद्र कोली को भी फांसी की सजा सुनाई गई थी. सितंबर 2014 को सुरेंद्र कोली को गाजियाबाद की डासना जेल में फांसी घर न होने की वजह से उसे मेरठ जेल लाया गया था. यहां 12 सितंबर 2014 को फांसी दी जानी थी. सुरेंद्र कोली मेरठ जेल में 18वां गुनहगार होता जिसे फांसी दी जाती, लेकिन ऐन मौके पर फांसी टाल दी गई थी. पिछले दिनों हरिद्वार में एक दुकान में उसका शव फांसी पर लटका मिला था. ऐसे में अगर मुस्कान और साहिल फांसी दी जाती है तो 18 और 19 गुनाहगार होंगे. 17 गुनहगारों को यहां फांसी दी जा चुकी है.
देश में कितने जल्लाद?
बता दें कि जानकारी के मुताबिक, दो में दो जल्लाद हैं. एक का नाम पवन जल्लाद दूसरा बंगाल का बाबू अहमद जल्लाद है. पवन का यह खानदानी पेशा है. उसकी चार पीढ़ियां यही काम कर रही हैं. उसके वंशज अंग्रेजों के लिए भी फांसी देने का काम करते थे. पवन के दादा कालू ने ही इंदिरा गांधी के हत्यारों सतवंत सिंह और केहर सिंह को को 1989 में फांसी दी थी. पवन के पिता मामू का सपना था कि कसाब और अफजल गुरु को फांसी दें, लेकिन ऐसा करने से पहले उनकी मृत्यु हो गई. हालांकि, फांसी देने वाले को कितनी रकम मिलती है अभी स्पष्ट नहीं है. सुरेंद्र कोली को पवन ही फांसी देने वाला था. फांसी से पहले तीन डेमो को फांसी देने का अभ्यास किया था.
यूपी के किन जेलों में फांसी घर
मुस्कान और साहिल को फांसी देने से पहले फांसी घर का निरीक्षण किया जाएगा. जब सुरेंद्र कोली को उनके पिलर कमजोर होने की बात सामने आई थी. अगर फांसी की डेट तय होती है तो मेरठ जेल में फांसीघर को व्यवस्थित किया जाएगा. मेरठ के अलावा लखनऊ, आगरा और प्रयागराज की नैनी सेंट्रल जेल में भी फांसीघर बना हुआ है. आगरा जेल में कैदी जुम्मन को पवन जल्लाद ने ही फांसी दी थी.
देश में अभी तक एक महिला को दी गई थी फांसी
आजाद भारत के इतिहास में अब तक सिर्फ एक ही महिला को फांसी दी गई है. उस महिला का नाम रतन बाई जैन था. उसे फरवरी 1955 को दिल्ली की तिहाड़ जेल में फांसी की सजा दी गई थी. इसके बाद से आज तक किसी महिला को फांसी नहीं दी गई है. अगर मुस्कान को फांसी दी जाती है तो वह दूसरी महिला होगी.