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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के मलिहाबाद के कस्मंडी कला इलाके से दिल दहलाने वाली घटना सामने आई है. यहां शोहदे की प्रताड़ना और पुलिस की संवेदनहीनता से तंग आकर 11वीं कक्षा की 15 वर्षीय छात्रा ने खुदकुशी कर ली. बेटी की मौत के बाद जागे पुलिस महकमे ने आरोपी को तो गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन इस घटना ने खाकी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
मई से प्रताड़ित कर रहा था आरोपी
मृतका के पिता का आरोप है कि आरोपी युवक हंश कुमार काफी समय से उनकी नाबालिग बेटी को परेशान और प्रताड़ित कर रहा था. मई में भी आरोपी ने छात्रा के साथ मारपीट की थी. उस समय स्थानीय स्तर पर दोनों पक्षों के बीच समझौता करा दिया गया था, लेकिन आरोपी की हरकतें बंद नहीं हुईं. आरोप है कि 13 मई को उसने दोबारा छात्रा के साथ मारपीट और अभद्रता की.
18 दिन तक थाने का चक्कर काटते रहे पिता
आरोप है कि आरोपी की प्रताड़ना से परेशान पीड़ित पिता अपनी बेटी की सुरक्षा के लिए 13 अक्टूबर से लगातार थाने और कस्मंडी कला पुलिस चौकी के चक्कर काट रहे थे. 18 दिनों तक पिता की फरियाद को अनसुना किया जाता रहा. समय पर पुलिस कार्रवाई न होने से आरोपी के हौसले बुलंद होते गए और परेशान होकर मासूम ने खौफनाक कदम उठा लिया.
चौकी प्रभारी पर गिरी गाज
मासूम की खुदकुशी के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया. आनन-फानन में पुलिस ने आरोपी हंश कुमार के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया. इस मामले में प्रारंभिक जांच के दौरान पुलिसकर्मियों की घोर लापरवाही उजागर हुई. डीसीपी दक्षिण अमित आनंद ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कस्मंडी कला चौकी प्रभारी विवेक कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है और उनके खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दे दिए हैं.
पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल
इस घटना ने सीधे तौर पर पुलिसिया व्यवस्था पर गहरा दाग लगाया है. सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि जो पिता 18 दिनों तक न्याय के लिए भटकता रहा, उसकी बात समय रहते क्यों नहीं सुनी गई? अगर पुलिस ने शिकायत मिलते ही सख्त कदम उठाया होता, तो शायद आज एक 15 साल की मासूम जिंदा होती. अब देखना यह है कि विभागीय जांच में दोषी पाए जाने वाले अन्य पुलिसकर्मियों पर क्या सख्त कार्रवाई होती है.
(लखनऊ से नंदन श्रीवास्तव की रिपोर्ट)