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देश के सबसे बड़े कारोबारी घराने टाटा ग्रुप के अंदर चल रही कलह आजकल सुर्खियों में है. नमक से लेकर सॉफ्टवेयर तक में फैले टाटा ग्रुप को लेकर इस समय राजनीति खूब गरमाई हुई है. विपक्ष की तरफ से आरोप लगाया जा रहा है कि सरकार इस ग्रुप को तोड़ने की कोशिश कर रही है. लेकिन पूरे मामले पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पहली बार बयान दिया है. टाटा ट्रस्ट और टाटा संस के बीच चल रही तनातनी से कॉरपोरेट वर्ल्ड के साथ ही राजनीतिक गलियारों में भी भूचाल आ गया है. हर किसी की दिलचस्पी इसी में है कि आखिर टाटा ग्रुप के अंदर चल क्या रहा है? इस बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पूरे मामले पर खुलकर बोला है.
मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान वित्त मंत्री सीतारमण से जब टाटा ग्रुप में चल रही कलह को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा यह बहुत ही नाजुक मामला है. उन्होंने बताया कि टाटा की ब्रांड वैल्यू और पारसी कम्युनिटी का देश के विकास में योगदान ऐतिहासिक रहा है. सीतारमण ने यह भी कहा कि टाटा ग्रुप देश की इकोनॉमी का बहुत ही अहम हिस्सा है. इसलिए इस विवाद को बाहरी दखल के बजाय आपसी समझदारी और सूझबूझ से सुलझा लिया जाना चाहिए. इससे कंपनी का कामकाज सामान्य तरीके से चलता रहेगा.
टाटा ग्रुप से जुड़ा यह विवाद तब और ज्यादा गरमा गया जब कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए. राहुल गांधी ने अपने आरोपों में कहा कि सरकार जानबूझकर टाटा ग्रुप को अस्थिर करने और उसे नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रही है. विपक्ष के नेता ने यह भी कहा कि सरकार देश के बिजनेस घरानों को राजनीतिक फायदों के लिए इस्तेमाल कर रही है. इन आरोपों का जवाब देते हुए वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा इस तरह के मामलों में राजनीतिक रोटियां सेकने के बजाय मैच्योरिटी की जरूरत होती है. सरकार इस तरह की राजनीति में विश्वास नहीं रखती.
वित्त मंत्री की तरफ से बयान सामने आने के बाद लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सरकार टाटा ग्रुप के इस विवाद में किसी तरह का हस्तक्षेप करेगी. इस तरह के सवाल पर वित्त मंत्री ने इसे बेहद संवेदनशील मामला बताया और कहा कि इस टिप्पणी करना सही नहीं होगा. उन्होंने यह भी कहा कि टाटा संस और टाटा ट्रस्ट के बीच का पूरा मामला दोनों पक्षों की कारोबारी समझ और आपसी तालमेल से आसानी से सुलझ सकता है. सरकार का मानना है कि इस तरह के कॉर्पोरेट मामलों में राजनीति के बजाय समझदारी से काम लेना चाहिए. इस तरह के कदम से देश के निवेशकों और आम जनता का भरोसा बना रहेगा.
वित्त मंत्री सीतारमण ने विपक्ष के उन आरोपों को भी खारिज कर दिया, जिसमें कहा जा रहा था कि सरकार देश में लोकतंत्र को कमजोर कर रही है. उन्होंने कहा कि यदि चुनाव प्रणाली या लोकतंत्र खतरे में होता तो कर्नाटक, तेलंगाना और हिमाचल प्रदेश में विपक्षी पार्टियां अपनी सरकार कैसे बना लेतीं. उन्होंने विपक्ष को यह भी नसीहत दी कि संसद के बाहर मॉक पार्लियामेंट चलाने या डिबेट से वॉकआउट करने के बजाय उन्हें सदन के अंदर सरकार के सवालों का सामना करना चाहिए. इस दौरान वित्त मंत्री ने अक्टूबर में जीएसटी कलेक्शन में हुई 23 प्रतिशत की बंपर बढ़ोतरी का भी जिक्र किया.