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टाटा ग्रुप के अंदर चल रही उठापटक थमने का नाम नहीं ले रही है. कुछ दिन पहले ही टाटा ट्रस्ट के चेयरमैन नोएल टाटा ने टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन के री-अपॉइंटमेंट को लेकर सवाल उठाए थे. अब एन चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति और कंपनी की लिस्टिंग को लेकर उठ रहे सवालों के बीच सेबी (SEBI) का बड़ा बयान सामने आया है. सेबी (SEBI) चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने साफ किया कि रेग्युलेटर पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है. उन्होंने कहा कि सेबी (SEBI) टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस में चल रहे गवर्नेंस से जुड़े मामलों को बेहद करीब से मॉनिटर कर रहा है. हालांकि, टाटा संस खुद लिस्टेड कंपनी नहीं है. लेकिन ग्रुप की दूसरी 26 कंपनियां शेयर बाजार में लिस्टेड हैं.
भारत चैम्बर इन्वेस्टर्स फोरम के एक कार्यक्रम के दौरान सेबी (SEBI) चेयरमैन ने यह साफ किया कि टाटा संस और उसकी लिस्टेड कंपनियों के नियम अलग-अलग हैं. उन्होंने कहा कि टाटा संस (Tata Sons) के लेवल पर कुछ अंदरूनी मामले हो सकते हैं. लेकिन जो कंपनियां मार्केट में लिस्टेड हैं, उन्हें एलओडीआर (LODR) नियमों का पूरी तरह पालन करना होगा. प्रमोटर्स और लिस्टेड एंटीटीज को हर हाल में नियमों का पालन करना होगा.
टाटा ग्रुप का हालिया विवाद एन. चंद्रशेखरन में यह विवाद चंद्रशेखरन को टाटा संस (Tata Sons) का चेयरमैन फिर से नियुक्त किये जाने और कंपनी को शेयर मार्केट में लिस्ट करने को लेकर शुरू हुआ है. टाटा ट्रस्ट (Tata Trusts) पास टाटा संस की 66 फीसदी हिस्सेदारी है, जबकि Shapoorji Pallonji ग्रुप के पास इसकी करीब 18.4 फीसदी शेयर है. दूसरी तरफ टाटा ग्रुप की 7 लिस्टेड कंपनियों के पास भी टाटा संस (Tata Sons) में 11.92 फीसदी की हिस्सेदारी है.
एक एडवाइजरी फर्म की रिपोर्ट के अनुसार टाटा स्टील, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स, टाटा केमिकल्स, टाटा पावर, इंडियन होटल्स, टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट और टाटा इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन के पास टाटा संस के शेयर हैं. इन 7 कंपनियों में करीब 1.77 करोड़ शेयरहोल्डर अकाउंट्स जुड़े हुए हैं. यही कारण है कि SEBI इस पूरे मामले पर सावधानी से नजर रख रहा है. हालांकि, सेबी चेयरमैन की तरफ से यह साफ किया गया कि अभी तक किसी नियम के उल्लंघन का मामला सामने नहीं आया है और न ही किसी तरह की सीधी कार्रवाई के संकेत दिये गए हैं.