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Kalashtami Date 2026: कालाष्टमी व्रत भगवान काल भैरव को समर्पित है. हर माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर मासिक कालाष्टमी व्रत रखा जाता है. इसी तरह कार्तिक महीने की कालाष्टमी व्रत कब रखा जाएगा, भगवान काल भैरव की उपासना किस विधि से करें और इस दिन से जुड़े किन नियमों का पालन करना बहुत जरूरी है. आइए कार्तिक माह के कालाष्टमी व्रत से जुड़ी सभी जानकारियां यहां हासिल करें.
पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 1 नवंबर को दोपहर 02:51 बजे से शुरू होकर 2 नवंबर को दोपहर 01:10 बजे तक बनी रहेगी. कालाष्टमी व्रत पर निशिता काल का महत्व है. ऐसे में मासिक कालाष्टमी व्रत 1 नवंबर 2026 को रविवार के दिन रखा जाएगा.
कालाष्टमी के दिन सुबह स्नान कर साफ कपडे़ पहनें.
पूजा स्थल की सफाई करें और भगवान काल भैरव का ध्यान करें.
काल भैरव की प्रतिमा को चौकी पर स्थापित करें.
दीपक जलाएं और फूल अर्पित करें.
धूप, फल और अपनी श्रद्धा के अनुसार भगवान को भोग चढ़ाएं.
पूजा के दौरान भगवान शिव और काल भैरव के मंत्र जाप करें.
आरती कर पूजा को संपन्न करें और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करें.
पूजा करते समय मन में श्रद्धा भाव रखें. मन को शांत रखें. जरूरतमंदों की मदद करने की भावना रखें और इस दिन पशु-पक्षियों की सेवा करें. पूजा की सामग्री के लिए दीपक, धूप, फूल, फल और भोग जुटा लें. व्रत न रख पाएं तो फलाहार या सात्विक भोजन करें.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव के रौद्र रूप काल भैरव अनुशासन के प्रतीक हैं और धर्म के रक्षक माने गए हैं. कालाष्टमी पर भक्त जब काल भैरव की उपासना करते हैं तो उनके भय का नाश होता है और जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है. मान्यतानुसार, जब भक्त श्रद्धापूर्वक काल भैरव भगवान की पूजा करते हैं तो उनके साहस और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है.
(डिस्क्लेमर: यह लेख पंचांग, धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. सटीकता की पूरी कोशिश की गई है, फिर भी निर्णय से पहले विद्वान से परामर्श अवश्य करें.)