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किसी बड़े कॉम्पिटिशन में जीत का ऐलान हो और सामने लाखों लोगों की भीड़ हो, तो उस पल की खुशी का अंदाजा लगाना मुश्किल है. दुबई में 29 अक्टूबर को कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला. 11 साल की मायार ओथमान अल शोरबागी का नाम जैसे ही विजेता के तौर पर पुकारा गया, वह अपनी सीट से उछल पड़ी.
खुशी से भावुक मायार घुटनों के बल बैठ गई और उसने जमीन को चूमकर अपना आभार जताया. इसके बाद उसकी आंखों से आंसू निकल पड़े. यह सिर्फ एक ट्रॉफी जीतने का पल नहीं था, बल्कि महीनों की मेहनत और किताबों के साथ बिताए समय का नतीजा था.
गल्फ न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, मायार को यह सम्मान दुबई वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में आयोजित अरब रीडिंग चैलेंज के दसवें संस्करण में मिला. यूएई के उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और दुबई के शासक शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने उसे विजेता की ट्रॉफी सौंपी. इस दौरान एक ऐसा पल भी आया, जिसने वहां मौजूद लोगों का ध्यान खींच लिया. शेख मोहम्मद ने मायार के सिर को चूमा और उसे गले लगाया. इसके बाद उन्होंने अपने कपड़ों पर लगा बैज उतारकर मायार के कपड़ों पर लगा दिया. इतनी बड़ी शख्सियत से यह सम्मान पाकर बच्ची की खुशी और बढ़ गई.
गल्फ न्यूज के अनुसार, अरब रीडिंग चैलेंज कोई छोटा-मोटा स्कूल कॉम्पिटिशन नहीं है. इस बार इसमें 60 देशों के कुल 4 करोड़ 28 हजार 428 छात्रों ने हिस्सा लिया. इतने बड़े कॉम्पिटिशन में सबसे आगे निकलना मायार के लिए बड़ी उपलब्धि है. मायार ने इस कॉम्पिटिशन के दौरान 60 किताबें पढ़ीं. इसके बाद अपने देश में आयोजित चयन प्रक्रिया में 1.76 करोड़ से ज्यादा प्रतिभागियों के बीच से मिस्र की प्रतिनिधि के तौर पर चुनी गई. फाइनल तक पहुंचने के लिए उसे कई स्तरों पर अपनी पढ़ने और समझने की क्षमता साबित करनी पड़ी.
कॉम्पिटिशन के लास्ट राउंड में छह फाइनलिस्ट पहुंचे थे. सभी को लाइव ऑडियंस के सामने सवालों के जवाब देने थे. हर प्रतिभागी को जवाब देने के लिए सिर्फ एक मिनट का समय दिया गया था. इसके बाद दर्शकों की वोटिंग ने भी विजेता चुनने में भूमिका निभाई. मायार ने इस चुनौती को पार करते हुए पहला स्थान हासिल किया. अपनी जीत के बाद उसने इसका श्रेय परिवार और स्कूल को दिया. गल्फ न्यूज से बातचीत में उसने बताया कि उसकी मां, पिता और परिवार के बाकी लोगों ने हमेशा पढ़ने के उसके शौक को बढ़ावा दिया. स्कूल से भी उसे ऐसा माहौल मिला, जहां वह अपनी पसंद को आगे बढ़ा सकी.
मायार की पढ़ने में दिलचस्पी एक दिन में नहीं बनी. उसने बताया कि शुरुआत में उसे कविताएं पसंद थीं. धीरे-धीरे यह शौक किताबों और अरबी भाषा के प्रति गहरी दिलचस्पी में बदल गया. यही लगाव उसे इस बड़े मंच तक ले आया. मायार का मानना है कि पढ़ाई और जानकारी हासिल करना बच्चों के भविष्य के लिए बहुत जरूरी है. उसने दूसरे बच्चों को भी किताबें पढ़ने की आदत डालने की सलाह दी. उसके अनुसार, ज्ञान की मदद से मुश्किलों का सामना किया जा सकता है और बेहतर भविष्य बनाया जा सकता है.
मायार के सपने सिर्फ किताबें पढ़ने और कॉम्पिटिशन जीतने तक सीमित नहीं हैं. वह आगे चलकर मिस्र की सूचना मंत्री बनना चाहती है. अरबी भाषा से उसका खास लगाव है और वह चाहती है कि इस भाषा की पहचान और सांस्कृतिक अहमियत बनी रहे. इतनी कम उम्र में देश की जिम्मेदारी से जुड़े पद का सपना देखना उसकी सोच को दिखाता है. मायार का कहना है कि शिक्षा और ज्ञान समाज को आगे बढ़ाने के जरूरी रास्ते हैं.
इस जीत के साथ मायार को 5 लाख दिरहम की इनामी राशि मिली है. लेकिन इस रकम को लेकर उसका एक ऐसा इरादा सामने आया है, जिसने लोगों का दिल जीत लिया. द नेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, मायार इस पैसे से अपने स्कूल में लाइब्रेरी बनवाने में मदद करना चाहती है. यानी जिन किताबों ने उसे दुनिया के इतने बड़े मंच तक पहुंचाया, वह चाहती है कि उसके स्कूल के दूसरे बच्चों को भी पढ़ने के लिए ज्यादा किताबें मिलें. यह फैसला उसकी जीत को और खास बना देता है.
अरब रीडिंग चैलेंज के दसवें संस्करण में पिछले साल के मुकाबले प्रतिभागियों की संख्या में 24 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई. यह दिखाता है कि इस प्रतियोगिता के जरिए बच्चों में पढ़ने की आदत को बढ़ावा मिल रहा है. मायार की कहानी भी इसी कोशिश की एक मिसाल है. 11 साल की उम्र में उसने 60 किताबें पढ़ीं, करोड़ों छात्रों के बीच मुकाबला किया और अपने देश के लिए खिताब जीता. अब उसकी इच्छा है कि दूसरे बच्चे भी किताबों से जुड़ें और आगे बढ़ें. शायद यही वजह है कि उसकी जीत की कहानी सिर्फ एक इनाम या ट्रॉफी तक सीमित नहीं रह गई है.