)
गोरखपुर के रजही चौराहे पर बुधवार को दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान बड़ा हादसा हो गया. हाईटेंशन करंट की चपेट में आने से तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि सात अन्य लोग झुलस गए. बताया जा रहा है कि प्रतिमा विसर्जन के लिए निकली ट्रैक्टर-ट्रॉली पर सवार लोग 11 हजार वोल्ट हाईटेंशन लाइन की चपेट में आ गए. हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई. आनन-फानन में घायलों को बीआरडी मेडिकल कॉलेज के नेहरू अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है. घटना के बाद बिजली आपूर्ति बंद करने और दोबारा चालू किए जाने की प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. हालांकि, हादसे की पूरी वजह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी.
गोरखपुर के रजही चौराहे पर बुधवार को दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के दौरान अचानक बड़ा हादसा हो गया. जंगल अयोध्या प्रसाद में स्थापित प्रतिमा को विसर्जन के लिए ट्रैक्टर-ट्रॉली से ले जाया जा रहा था. इसी दौरान ट्रॉली पर प्रतिमा के साथ खड़े लोग हाईटेंशन बिजली लाइन की चपेट में आ गए. बताया जा रहा है कि 11 हजार वोल्ट की बिजली लाइन से संपर्क होने के बाद ट्रॉली पर मौजूद लोग करंट की चपेट में आ गए. हादसे में तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि सात लोग झुलस गए. घटना के बाद विसर्जन जुलूस में अफरा-तफरी मच गई.
स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया. सभी सात झुलसे लोगों को बीआरडी मेडिकल कॉलेज के नेहरू अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराए जाने की जानकारी सामने आई है. इस हादसे के बाद बिजली आपूर्ति बंद करने और दोबारा शुरू करने की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं. प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, विसर्जन जुलूस को देखते हुए बिजली आपूर्ति बंद की गई थी, लेकिन आरोप है कि जुलूस के रजही चौराहे पर पहुंचने के दौरान आपूर्ति दोबारा शुरू हो गई, जिसके बाद यह हादसा हुआ.
अब सवाल है कि जब विसर्जन जुलूस के दौरान हाईटेंशन लाइन से खतरे की आशंका थी, तो सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए गए? बिजली आपूर्ति दोबारा किसके निर्देश पर और किन परिस्थितियों में शुरू हुई? क्या बिजली विभाग और जुलूस आयोजकों के बीच समुचित समन्वय था?. इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे. फिलहाल बिजली आपूर्ति से जुड़ी परिस्थितियों और हादसे के कारणों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है.
प्रतिमा विसर्जन के दौरान हुए इस हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है, जिस जुलूस में लोग धार्मिक आस्था के साथ शामिल हुए थे, वहां अचानक हुए हादसे के बाद मातम छा गया. तीन लोगों की मौत और सात लोगों के झुलसने की घटना ने सार्वजनिक आयोजनों के दौरान बिजली सुरक्षा के इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. फिलहाल सबसे अहम है घायलों का समुचित इलाज और हादसे की निष्पक्ष जांच. यह स्पष्ट होना जरूरी है कि हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने की परिस्थितियां क्या थीं और बिजली आपूर्ति से जुड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया गया था या नहीं.
(गोरखपुर से नागेन्द्र मणि त्रिपाठी की रिपोर्ट)