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सीएम योगी की कैसी रही दिवाली, वनटांगिया समाज को दी योजनाओं की सौगात

रविवार को देशभर में दिवाली मनाई गई. सीएम योगी ने गोरखपुर में वनटांगिया समाज के बीच दिवाली का त्यौहार मनाया.

सीएम योगी की कैसी रही दिवाली, वनटांगिया समाज को दी योजनाओं की सौगात
Image Credit: AI Image

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों को दीपावली की शुभकामनाएं दीं. सीएम योगी रविवार को गोरखपुर के वनटांगिया समाज के बीच पहुंचे. सीएम योगी ने वनटांगिया समुदाय के बच्चों, बुजुर्ग और महिलाओं के बीच दीपावली का त्यौहार मनाया. 
 

विकास योजनाओं की सौगात दी  

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, विकास का प्रकाश समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और हर घर में सुख, समृद्धि एवं सम्मान का दीप जले, यही दीपावली की सार्थकता है. इसी अंत्योदय भाव के साथ आज गोरखपुर के जंगल तिनकोनिया में वनटांगिया समाज के लिए ₹82 करोड़ से अधिक की 52 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया. साथ ही विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों को किट वितरित की.

वनटांगिया परिवारों के लिए सरकार प्रतिबद्ध

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वनटांगिया समाज के लोगों को दिवाली की शुभकामनाएं दीं. और कहा कि वनटांगिया परिवारों को शिक्षा, स्वास्थ्य और बेहतर जीवन के अवसर उपलब्ध कराने के लिए डबल इंजन सरकार प्रतिबद्ध है. सभी को महापर्व दीपावली की हार्दिक बधाई. 

कौन हैं वनटांगिया समुदाय?

वनटांगिया समुदाय का जीवन जंगलों के साथ जुड़ा रहा है. वनटांगिया समुदाय को ब्रिटिश शासन के दौरान जंगलों में पेड़ लगाने और उनकी देखभाल करने के लिए बसाया गया था. इनका ठिकाना जंगल में होता था. जंगल की देखभाल करके परिवार का भरण पोषण करते हैं. वनटांगिया समुदाय के बच्चों को शिक्षा के जरिए उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए योगी आदित्यनाथ के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ. हालांकि, बाद में गोरक्षनाथ हिंदू विद्यापीठ के नाम से गांव में स्कूल बना. आज वनटांगिया समुदाय के बच्चे शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं.

वनटांगिया कैसे पड़ा नाम?  

वनटांगिया शब्द का संबंध जंगल तैयार करने की एक विशेष पद्धति से है, जिसे टांगिया पद्धति कहा जाता है. आसान भाषा में समझें तो टांगिया पद्धति में नए पेड़ लगाए जाते थे. साथ ही खाली जमीनों में खेती की जाती थी. इससे एक तरफ पेड़ उगाए जाते थे. वहीं, खाली जमीन पर खेती कर फसल उगाई जाती थी. एक तरह का ये रोजगार का भी साधन था. इस व्यवस्था के तहत जंगलों में बसाए गए मजदूरों और उनके परिवारों को आगे चलकर वनटांगिया कहा जाने लगा.

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About the Author

Amitesh Pandey

Amitesh Pandey

अमितेश कुमार पांडेय डिजिटल पत्रकार हैं और ज़ी उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड (Zee UP-UK) की डिजिटल टीम में सीनियर सब-एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से ताल्लुक रखने वाले अमितेश को मीडिया जगत में 8 वर्षों से ज्यादा का अनुभव है. वे उत्तर प्रदेश की हाइपर-लोकल खबरों, क्राइम, प्रशासनिक गतिविधियों, राजनीतिक उठापटक और खेल जगत के मुद्दों पर पैनी नजर रखते हैं. खबरों की गहराई, ग्राउंड रियलिटी और तथ्य-आधारित डिजिटल कवरेज के लिए वे जाने जाते हैं.अमितेश के पास डेस्क एडिटिंग के साथ-साथ उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों से ग्राउंड रिपोर्टिंग का भी व्यावहारिक अनुभव है. अमितेश ने उत्तर प्रदेश के तीन प्रमुख शहरों- लखनऊ, प्रयागराज और गाज़ियाबाद में जमीनी स्तर पर रिपोर्टिंग की है. स्थानीय प्रशासन, जनसमस्याओं और राजनीतिक हलचलों की बेहतर समझ उन्हें ज़मीनी वास्तविकताओं को सटीक रूप से प्रस्तुत करने में मदद करती है. ज़ी मीडिया से पहले उन्होंने भारत के लिडिंग हिंदी न्यूज़ पेपर अमर उजाला, दैनिक जागरण और हिन्दुस्तान में काम करने का अनुभव है. अमितेश ने पत्रकारिता की पढ़ाई प्रयागराज से की है.अमितेश पांडेय से आप amitesh.pandey@india.com पर सीधे ईमेल कर संपर्क कर सकते हैं. इसके अलावा आप अमितेश से एक्स (ट्विटर) और लिंक्डइन पर कनेक्ट कर सकते हैं.
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