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आजमगढ़ के रानी की सराय थाना क्षेत्र के रुद्री गांव में साल 2007 में दशहरे के दिन हुए चर्चित दोहरे हत्याकांड में अदालत ने अहम फैसला सुनाया है. लंबे समय से चल रहे मुकदमे में रानी की सराय के ब्लॉक प्रमुख विपिन सिंह समेत 8 आरोपियों को दोषी करार दिया गया है, जबकि इसी मुकदमे के क्रॉस केस में जानलेवा हमले के मुकदमे में 6 आरोपियों को दोषी करार दिया है. कोर्ट के फैसले के बाद पुलिस ने दोषियों को हिरासत में लेकर मंडलीय कारागार भेजा गया. वहीं, इस मामले में सजा के बिंदु पर अदालत 29 अक्टूबर को फैसला सुनाएगी. यह फैसला कोर्ट नंबर एक के अपर सत्र न्यायाधीश कमलापति ने सुनाया.
दरअसल, रामजन्म सिंह निवासी रुदरी थाना रानी की सराय 21 अक्टूबर 2007 को दशहरे के दिन सुबह 9 बजे अपने दरवाजे पर बैठे हुए थे, तभी गांव के तत्कालीन प्रधान विपिन सिंह, राजेश सिंह, चुन्नू उर्फ़ रणविजय, बलवंत सिंह, राधेश्याम सिंह, छोटू उर्फ पंकज, लोकनाथ सिंह, जीवन प्रकाश तथा शिवदास सिंह हथियारों से लैस हो कर दरवाजे पर आ गए. विपिन सिंह के ललकारने पर ये लोग तालुकदार सिंह को गोली मार दी और राजेश सिंह ने पारसनाथ सिंह को गोली मार दिया. शेष लोगों ने रामजन्म सिंह, भतीजे अंकित सिंह और आशीष को लाठी डंडे से मारापीटा. मौके पर ही तालुकदार और पारस नाथ सिंह की मृत्यु हो गई.
आरोप था कि हथियारों से लैस हमलावरों ने लाइसेंसी राइफल, पिस्टल और अन्य असलहों का इस्तेमाल किया. इस मामले में पुलिस ने जांच पूरी करने के बाद न्यायालय में चार्जशीट दाखिल की. मुकदमा के दौरान आरोपी राधेश्याम सिंह की मृत्यु हो गई. इस मामले अभियोजन पक्ष की तरफ से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता ने कुल 17 गवाहों को न्यायालय में पेश किया. दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने सभी आरोपियों को हत्या का दोषी पाया.
उधर, इसी क्रॉस केस में वादी विपिन सिंह ने कातिलाना हमले की एफआईआर दर्ज कराई थी. इसके अनुसार, आरोपी रामदरस, आशीष सिंह, शक्ति सिंह, दीपक सिंह और रामजन्म सिंह ने उनके समर्थक बलवंत तथा अरविंद को बुरी तरह से मारा पीटा और असलहों से फायर किया, जिससे वादी विपिन सिंह के पैर में गोली लगी. इस मामले में पुलिस ने 6 आरोपियों के विरुद्ध चार्जशीट न्यायालय में दाखिल की. अभियोजन पक्ष की तरफ से कुल 22 गवाहों को न्यायालय में पेश किया गया. दोनों पक्षों के दलीलों को सुनने के बाद अदालत में सभी छह आरोपियों को मारपीट का दोषी पाया.
फैसले के दौरान अदालत परिसर में दोनों पक्षों के लोग और अन्यों की भीड़ जुटी रही. किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पुलिस सतर्क रही. अब आगे दोनों मामलों में सजा का निर्धारण संबंधित धाराओं, साक्ष्यों और अदालत के आदेश के आधार पर होगा. फिलहाल इस बहुचर्चित मामले में दोषसिद्धि के बाद अब सबकी निगाहें 29 अक्टूबर को होने वाली सजा की सुनवाई पर टिकी हैं.
(आजमगढ़ से वेदेन्द्र प्रताप शर्मा की रिपोर्ट)