'35 साल मेरा भाई रहा, अब बच्चों से पैसे लूं?' 13 साल पहले गुजर चुके दोस्त के परिवार से दुकानदार ने नहीं लिए पैसे, VIDEO वायरल
दोस्ती की कुछ कहानियां तो आपने बहुत सुनी होंगी. लेकिन सोशल मीडिया पर दोस्ती की मिसाल का एक ऐसा वीडियो वायरल हो रहा है, जिसने इसकी पूरी कहानी ही बदल दी. एक सब्जी के दुकानदार ने अपने 13 साल पहले मर चुके दोस्त के बेटे से सब्जियों के पैसे लेने से मना कर दिया. उसका कहना था कि सामान अपने ही घर जा रहा है, तो परिवार के लोगों से पैसे कैसे ले सकता है.
दोस्ती का मतलब अक्सर साथ घूमना, मुश्किल समय में मदद करना या एक-दूसरे के साथ खड़े रहना समझा जाता है. लेकिन कुछ रिश्ते ऐसे भी होते हैं, जो किसी इंसान के दुनिया से चले जाने के बाद भी खत्म नहीं होते. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा यह वीडियो इसी बात की याद दिलाता है.
वीडियो को इंस्टाग्राम यूजर भावेश ने शेयर किया है. वह अपने पिता के पुराने दोस्त की दुकान पर सब्जियां लेने पहुंचे थे. उनके पिता की साल 2013 में मौत हो गई थी, लेकिन उनके दोस्त ने परिवार से अपना रिश्ता आज तक बनाए रखा है. दुकान पर जो हुआ, उसे देखकर भावेश भी भावुक हो गए. भावेश के पिता को दुनिया छोड़े 13 साल हो चुके हैं, लेकिन उनकी 35 साल पुरानी दोस्ती आज भी वैसी ही बनी हुई है.
स्कूटर की डिग्गी भर गई, फिर भी पैसे लेने से इनकार
भावेश ने दुकान से इतनी सब्जियां खरीदीं कि उनके स्कूटर की डिग्गी पूरी तरह भर गई. आमतौर पर बाजार में सामान खरीदने के बाद ग्राहक दुकानदार को पैसे देता है और फिर अपने रास्ते निकल जाता है. लेकिन यहां मामला कुछ अलग था. भावेश वीडियो में बताते हैं कि उनके अंकल उनसे सब्जियों के पैसे नहीं ले रहे हैं. वह उन्हें पैसे देने की कोशिश करते हैं, लेकिन दुकानदार साफ मना कर देता है. उसके लिए यह कोई सामान्य खरीदारी नहीं थी. वह अपने पुराने दोस्त के बेटे को सामान दे रहा था, जिसे वह परिवार का ही हिस्सा मानता है.
'अपने ही घर में जा रहा है, परिवार से पैसे थोड़े लेते हैं'
वीडियो में दुकानदार की एक बात लोगों का दिल छू रही है. जब भावेश उससे पैसे लेने की बात करते हैं, तो वह सहज अंदाज में कहता है कि सामान अपने ही घर में जा रहा है, परिवार के लोगों से पैसे नहीं लिए जाते. उसकी इस बात में न कोई दिखावा है और न ही किसी एहसान का अहसास कराने की कोशिश. वह जिस अपनेपन के साथ पैसे लेने से मना करता है, वही इस वीडियो को खास बना देता है. उसके लिए दोस्त का बेटा कोई ग्राहक नहीं, बल्कि अपने परिवार का सदस्य है.
पिता को गुजरे 13 साल, दोस्ती को 35 साल
भावेश ने वीडियो में बताया कि उनके पिता की दुकान इस दुकानदार के ठेले के ठीक सामने हुआ करती थी. दोनों के बीच करीब 30 से 35 साल पुरानी दोस्ती थी. दोनों का हर रोज मिलना-जुलना, साथ वक्त बिताना और एक-दूसरे के सुख-दुख में शामिल होना था. यही कारण था कि धीरे-धीरे उनका यह रिश्ता परिवार जैसा बन गया. साल 2013 में भावेश के पिता इस दुनिया में नहीं रहे. वक्त बीतता गया, लेकिन उनके दोस्त ने परिवार से दूरी नहीं बनाई. पिता के जाने के करीब 13 साल बाद भी वह उनके बेटे के साथ उसी तरह पेश आता है, जैसे कोई अपना करता है. कई बार रिश्तों की असली पहचान तब होती है, जब कोई इंसान हमारे बीच नहीं रहता. ऐसे वक्त में उसके अपने किस तरह परिवार का साथ निभाते हैं, उससे पता चलता है कि उसने जिंदगी में कैसे रिश्ते बनाए थे.
अंकल के लिए कढ़ी-चावल लेकर वापस पहुंचा भावेश
दुकानदार ने जब सब्जियों के पैसे लेने से मना कर दिया, तो भावेश ने भी अपने तरीके से उनका आभार जताने का फैसला किया. वह बाद में उनके लिए उनकी पसंदीदा डिश कढ़ी-चावल लेकर वापस पहुंचे. यह छोटा सा कदम भी लोगों को काफी पसंद आ रहा है. एक तरफ दुकानदार अपने पुराने दोस्त के परिवार के प्रति प्यार दिखा रहा है, तो दूसरी तरफ भावेश भी उस रिश्ते की कद्र करते नजर आते हैं. यहां किसी ने बड़ी-बड़ी बातें नहीं कीं. बस एक ने पैसे नहीं लिए और दूसरे ने प्यार से खाना लाकर अपना धन्यवाद जता दिया.
सोशल मीडिया पर लोग बोले- यही होती है सच्ची दोस्ती
वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग दुकानदार की तारीफ कर रहे हैं. कई यूजर्स का कहना है कि आज के दौर में ऐसे रिश्ते कम देखने को मिलते हैं, जहां दोस्ती किसी फायदे या जरूरत पर निर्भर नहीं होती. एक यूजर ने लिखा कि यही वजह है कि दोस्ती में उम्र, हैसियत और दूसरी चीजें मायने नहीं रखतीं. एक अन्य यूजर ने कहा कि सच्ची दोस्ती ऐसी ही होती है. एक व्यक्ति ने अपना अनुभव शेयर करते हुए बताया कि जब वह छोटा था, तब उसके पिता का निधन हो गया था. उस मुश्किल वक्त में परिवार के कई लोग साथ नहीं थे, लेकिन उसके पिता का एक दोस्त लगातार उनके परिवार के साथ खड़ा रहा. उसने लिखा कि दुकानदार की यह बात कि परिवार से पैसे नहीं लेते, दोस्ती की असली अहमियत दिखाती है. एक अन्य यूजर ने भावेश से कहा कि अपने पिता की दोस्ती को देखकर उनके व्यक्तित्व को भी समझा जा सकता है. इतने साल बाद भी कोई दोस्त उनके परिवार को अपना मानता है, तो यह उस रिश्ते की गहराई बताता है.
कुछ रिश्ते इंसान के जाने के बाद भी जिंदा रहते हैं
इस वीडियो को देखने के बाद सबसे ज्यादा जो बात महसूस होती है, वह यह है कि सच्चे रिश्ते वक्त के साथ खत्म नहीं होते. भावेश के पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनके दोस्त के व्यवहार में उनकी दोस्ती आज भी दिखाई देती है. दुकानदार चाहता तो सब्जियों के पैसे लेकर रोज की तरह अपना काम कर सकता था. लेकिन उसने ऐसा नहीं किया. उसके लिए यह कमाई का मामला नहीं, बल्कि अपने दोस्त के परिवार के प्रति प्यार और अपनापन जताने का मौका था. शायद इसी वजह से यह वीडियो लोगों के दिलों तक पहुंच रहा है. जिंदगी में दौलत, काम और जरूरतें अपनी जगह हैं, लेकिन कुछ रिश्तों की कीमत पैसों से नहीं लगाई जा सकती.
(Disclaimer: प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर इंटरनेट पर मौजूद डिटेल्स को एकत्रित करके बनाई गई है. Zee News इसके प्रमाणिकता, दावों और सत्यता की पुष्टि नहीं करता है.)