पति बीमार था, दो बेटियों की जिम्मेदारी थी... लोगों के तानों की परवाह किए बिना डिलीवरी करने निकलीं हेमपुष्पा, आज बनीं मिसाल
रायपुर की हेमपुष्पा कभी घर संभालने वाली हाउसवाइफ थीं, लेकिन पति की तबीयत खराब हुई तो परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई. दो साल पहले उन्होंने स्विगी में डिलीवरी पार्टनर के तौर पर काम शुरू किया. इसके लिए पहले स्कूटी चलाना सीखा और लोगों की बातें भी सुनीं. अब अप्रैल-मई 2026 के बीच रायपुर में सबसे ज्यादा स्विगी ऑर्डर पूरे करने वाली महिला डिलीवरी पार्टनर के तौर पर उनकी पहचान बनी है.
कुछ साल पहले तक हेमपुष्पा की जिंदगी बाकी घरेलू महिलाओं की तरह ही थी. दिन का ज्यादातर समय परिवार और अपनी दो बेटियों की देखभाल में गुजरता था. घर संभालना, बच्चों की पढ़ाई देखना और पति के साथ परिवार की जिम्मेदारियां निभाना ही उनकी हर रोज की जिंदगी थी.
लेकिन अचानक से उनके पति की तबीयत खराब होने के बाद हालात बदल गए. घर की कमाई पर असर पड़ा और परिवार चलाने की जिम्मेदारी धीरे-धीरे हेमपुष्पा के कंधों पर आ गई. उस वक्त उनके सामने सबसे बड़ा सवाल यही था कि घर कैसे चलेगा और बेटियों की पढ़ाई कैसे जारी रहेगी.
नौकरी करनी थी, लेकिन परिवार भी संभालना था
हेमपुष्पा के लिए सिर्फ कमाई शुरू करना ही काफी नहीं था. उनके पति की तबीयत ठीक नहीं थी और दो बेटियां भी थीं. ऐसे में उन्हें ऐसा काम चाहिए था, जिसमें कमाई के साथ परिवार के लिए समय भी निकाला जा सके. इसी दौरान उनके पति ने उन्हें स्विगी में डिलीवरी पार्टनर के तौर पर काम करने का सुझाव दिया. शुरुआत में यह फैसला उनके लिए आसान नहीं था. उन्हें स्कूटी चलाना तक नहीं आता था. लेकिन परिवार की जरूरत ने उन्हें पीछे हटने नहीं दिया.
पहले सीखी स्कूटी चलाना
डिलीवरी का काम शुरू करने के लिए हेमपुष्पा ने सबसे पहले स्कूटी चलाना सीखा. उनके लिए यह सिर्फ ड्राइविंग सीखना नहीं था, बल्कि अपने घर को संभालने की दिशा में पहला कदम था. स्कूटी सीखने के बाद उन्होंने स्विगी के साथ डिलीवरी पार्टनर के तौर पर काम शुरू किया. प्लेटफॉर्म से जुड़े साथियों ने भी शुरुआत में उनका हौसला बढ़ाया. करीब दो साल पहले शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे उनकी जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया.
लोगों ने हतोत्साहित किया, लेकिन नहीं रुकीं
हेमपुष्पा की राह में सिर्फ ड्राइविंग सीखना ही चुनौती नहीं थी. जब उन्होंने डिलीवरी का काम शुरू किया तो पड़ोस और रिश्तेदारों में से कुछ लोगों ने उन्हें हतोत्साहित किया. एक महिला का स्कूटी लेकर शहर में ऑर्डर डिलीवर करने निकलना शायद कुछ लोगों को सामान्य नहीं लगा. उन्हें तरह-तरह की बातें सुननी पड़ीं. लेकिन हेमपुष्पा ने उन बातों को अपनी मंजिल के बीच नहीं आने दिया. उनका साफ कहना था कि जब उनके पति बीमार थे, तब मुश्किल वक्त में किसी ने उनकी मदद नहीं की. ऐसे में वह लोगों की सोच की चिंता क्यों करें. उनकी प्राथमिकता अपने पति और बेटियों की जरूरतें पूरी करना थी.
बेटियों की पढ़ाई को बनाया पहला लक्ष्य
काम शुरू करने के बाद हेमपुष्पा की सबसे बड़ी कोशिश अपने परिवार की आर्थिक हालत सुधारना रही. उनकी मेहनत का असर घर पर भी दिखाई देने लगा. उन्होंने अपनी दोनों बेटियों का एडमिशन इंग्लिश मीडियम स्कूल में कराया. बच्चों की पढ़ाई बेहतर हो, इसके लिए उन्होंने कमाई का बड़ा हिस्सा परिवार पर लगाया. उनके लिए डिलीवरी सिर्फ नौकरी नहीं थी, बल्कि बेटियों के भविष्य को बेहतर बनाने का जरिया बन गई. वह चाहती हैं कि उनकी बेटियां आगे चलकर अपने पैरों पर खड़ी हों और उन्हें उन मुश्किलों का सामना न करना पड़े, जिनसे वह खुद गुजरी हैं.
घर को भी बनाया बेहतर
दो साल की मेहनत का असर सिर्फ बेटियों की पढ़ाई तक सीमित नहीं रहा. हेमपुष्पा ने अपने घर की मरम्मत कराई और उसे बेहतर बनाने की दिशा में भी काम किया. उन्होंने घर में दूसरा फ्लोर बनवाया. इसके साथ ही ग्राउंड फ्लोर को किराए पर देने की व्यवस्था की. मतलब, एक तरफ वह रोज डिलीवरी करके कमाई कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ घर को भविष्य के लिए आर्थिक सहारा बनाने की कोशिश भी कर रही हैं. उनका मानना है कि धीरे-धीरे उनका परिवार आर्थिक रूप से ज्यादा मजबूत और सुरक्षित स्थिति में पहुंच जाएगा.
अप्रैल-मई में बनीं रायपुर की टॉप महिला डिलीवरी पार्टनर
लगातार मेहनत करने वाली हेमपुष्पा के सफर में हाल ही में एक खास उपलब्धि भी जुड़ी. अप्रैल और मई 2026 के बीच रायपुर में सबसे ज्यादा स्विगी ऑर्डर पूरे करने वाली महिला डिलीवरी पार्टनर के तौर पर उन्हें पहचान मिली. यह उपलब्धि इसलिए भी खास है, क्योंकि उन्होंने डिलीवरी का काम किसी शौक या अतिरिक्त कमाई के लिए नहीं, बल्कि परिवार की जरूरत के समय शुरू किया था. दो साल में उन्होंने न सिर्फ इस काम को सीखा, बल्कि इसमें अपनी अलग पहचान भी बनाई.
त्योहारों में भी बढ़ा देती हैं काम के घंटे
हेमपुष्पा अब अपने काम को लेकर पूरी तरह सहज हैं. वह बताती हैं कि उन्हें अपना काम पसंद है. जब भी मौका मिलता है, वह ज्यादा घंटे काम करती हैं. खास तौर पर त्योहारों के दौरान जब ऑर्डर बढ़ते हैं, तब वह लंबे समय तक डिलीवरी करती हैं. उनके लिए ज्यादा काम का मतलब परिवार की जरूरतों के लिए थोड़ी और कमाई है. इसके बावजूद वह अपनी बेटियों और पति के लिए समय निकालने की कोशिश करती हैं. यही संतुलन उनके सफर को और खास बनाता है.
अब कमाई से ज्यादा संतुष्टि मायने रखती है
हेमपुष्पा के लिए आज सबसे बड़ी खुशी यह है कि वह अपने परिवार की जिम्मेदारी खुद उठा पा रही हैं. वह कहती हैं कि अब उनकी कमाई अच्छी हो रही है और वह अपने परिवार, घर और पति की देखभाल कर पा रही हैं. उनकी बातों में किसी बड़ी महत्वाकांक्षा की बजाय एक संतोष नजर आता है. वह चाहती हैं कि उनका परिवार धीरे-धीरे आर्थिक रूप से सुरक्षित हो और बेटियों का भविष्य अच्छा बने.
हेमपुष्पा की कहानी सिर्फ डिलीवरी की कहानी नहीं
हेमपुष्पा की कहानी को सिर्फ एक महिला के डिलीवरी पार्टनर बनने की कहानी मानना शायद अधूरा होगा. यह उस वक्त खुद को संभालने की कहानी है, जब परिवार मुश्किल दौर से गुजर रहा था. पति की बीमारी के बाद उन्होंने जिम्मेदारी से भागने के बजाय नया रास्ता चुना. स्कूटी नहीं आती थी तो सीखी. लोगों ने रोका तो उनकी बातों को पीछे छोड़ा. काम शुरू किया तो लगातार मेहनत की. इसी मेहनत ने उन्हें रायपुर में सबसे ज्यादा ऑर्डर पूरे करने वाली महिला डिलीवरी पार्टनर की पहचान दिलाई. उनका सफर यह भी दिखाता है कि कमाई का मौका मिलने पर महिलाएं सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि पूरे परिवार की स्थिति बदल सकती हैं. हेमपुष्पा आज भी डिलीवरी कर रही हैं और आगे भी स्विगी के साथ अपनी यह यात्रा जारी रखना चाहती हैं.