लंदन की टेम्स नदी के किनारे रविवार का माहौल बाकी दिनों से बिल्कुल अलग था. नदी के सामने बड़ी संख्या में लोग जमा थे और चारों तरफ भक्ति संगीत और मंत्रों की आवाज सुनाई दे रही थी. सामने बहती टेम्स और किनारे जलते बड़े-बड़े दीपों ने पूरे माहौल को खास बना दिया.
यह लंदन में पहली बार था, जब टेम्स नदी के किनारे गंगा आरती की गई. इस आयोजन का नाम रखा गया था 'Ganga Aarti on the Thames: A Ceremony of Light'. इसका मतलब टेम्स पर गंगा आरती को रोशनी और आभार के एक खास समारोह के रूप में पेश किया गया.
भारत में गंगा के किनारे होने वाली आरती दुनिया भर में अपनी अलग पहचान रखती है. शाम के वक्त घाटों पर एक साथ जलते दीप, घंटियों की आवाज और मंत्रोच्चार का नजारा लोगों को अपनी ओर खींचता है. लंदन में हुए इस आयोजन में भी इसी भावना को सामने लाने की कोशिश की गई. हालांकि यहां गंगा नहीं, बल्कि टेम्स नदी थी. आयोजकों का कहना था कि इसका मकसद किसी नदी को दूसरी नदी से जोड़ना नहीं, बल्कि प्रकृति, जीवन और उसके प्रति आभार की भावना को सामने लाना था.
इस कार्यक्रम में ब्रिटेन के अलग-अलग हिस्सों से हिंदू और साउथ एशियन समुदाय के लोग पहुंचे. आध्यात्मिक नेताओं के साथ कई हिंदू संगठनों के प्रतिनिधि भी कार्यक्रम में मौजूद रहे. ऐतिहासिक ओल्ड रॉयल नेवल कॉलेज, ग्रीनविच के सामने हुए इस आयोजन में जब कई स्टेप वाले बड़े तेल के दीप जलाए गए तो पूरा किनारा रोशनी से जगमगा उठा. प्रार्थना, संगीत और मंत्रोच्चार के बीच लोगों ने इस पल को अपने कैमरों में भी कैद किया. अब इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. जो भी यह वीडियो देख रहा है, उसे बनारस की गंगा आरती याद आ रही है.
UK में टेम्स नदी पर पहली बार गंगा आरती हुई। रविवार को लंदन में टेम्स नदी के किनारे हज़ारों लोग पहली बार हुई गंगा आरती के लिए इकट्ठा हुए। यह रोशनी और आभार व्यक्त करने का एक समारोह था। 'टेम्स पर गंगा आरती: रोशनी का एक समारोह' का आयोजन चिन्मय मिशन UK ने सालाना 'टोटली टेम्स'… pic.twitter.com/nuOJxqv2eZ
— Zee News (@ZeeNews) September 14, 2026
चिन्मय मिशन UK की रेजिडेंट टीचर ब्रह्मचारिणी श्रीप्रिया चैतन्य ने इस आयोजन की भावना समझाते हुए कहा कि पीढ़ियों से लोग गंगा के किनारे नदी, प्रकृति और जीवन को बनाए रखने वाली चीजों के प्रति आभार जताने के लिए इकट्ठा होते रहे हैं. उनके मुताबिक, टेम्स पर गंगा आरती भी इसी भावना को लेकर आयोजित की गई. इसका मकसद लोगों को एक साथ लाना, उम्मीद और एकता की भावना पैदा करना और प्रकृति के प्रति आभार जताना था.
यह कार्यक्रम सिर्फ गंगा आरती तक सीमित नहीं था. इसे चिन्मय मिशन की स्थापना के 75 साल पूरे होने के मौके पर हो रहे ग्लोबल सेलिब्रेशन का भी हिस्सा बनाया गया. चिन्मय मिशन की शुरुआत 1951 में हुई थी. यह संगठन वेदांत की शिक्षा, आध्यात्मिक विकास और समाज सेवा से जुड़े काम करता है. आज इसके दुनिया भर में 350 से ज्यादा सेंटर बताए जाते हैं. चिन्मय मिशन UK ने इस आयोजन को अपने संस्थापक स्वामी चिन्मयानंद की विरासत से भी जोड़ा. संगठन के मुताबिक, स्वामी चिन्मयानंद ने वेदांत की प्राचीन सोच को लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़ने के लिए अपना जीवन समर्पित किया था.
इस आयोजन की एक खास बात यह भी रही कि पूरी गंगा आरती जमीन पर ही आयोजित की गई. कार्यक्रम से जुड़ी कोई भी सामग्री टेम्स नदी में नहीं डाली गई, न ही कुछ नदी में बहाया या छोड़ा गया. आयोजकों ने इस बात को खास तौर पर स्पष्ट किया. इसके पीछे मकसद धार्मिक आयोजन के साथ-साथ पर्यावरण को लेकर जिम्मेदारी का संदेश देना भी था.
चिन्मय मिशन UK ने कहा कि गंगा आरती हमें याद दिलाती है कि प्राकृतिक दुनिया को हल्के में नहीं लेना चाहिए. प्रकृति के प्रति आभार केवल पूजा या प्रार्थना के जरिए नहीं, बल्कि उसकी देखभाल और जिम्मेदारी से भी जताया जाना चाहिए. यानी टेम्स के किनारे हुई इस आरती में धार्मिक भावना के साथ पर्यावरण का संदेश भी जोड़ा गया. लोगों से अपील की गई कि नदियों और प्रकृति के साथ सम्मान और जिम्मेदारी का व्यवहार किया जाए.
इस खास आयोजन को लेकर लोगों की दिलचस्पी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कार्यक्रम पूरी तरह सोल्ड आउट रहा. बड़ी संख्या में लोग इसे देखने पहुंचे. आयोजकों को उम्मीद है कि टेम्स पर हुई यह पहली गंगा आरती आने वाले समय में टोटली टेम्स फेस्टिवल का नियमित हिस्सा बन सकती है. अगर ऐसा होता है तो लंदन में रहने वाली भारतीय और साउथ एशियन कम्युनिटी के लिए यह हर साल मिलने वाला एक खास मौका बन जाएगा.
टेम्स के किनारे हुई यह पहली गंगा आरती अपने आप में भारत और ब्रिटेन के बीच किसी औपचारिक कार्यक्रम से ज्यादा एक भावनात्मक जुड़ाव का पल रही. हजारों किलोमीटर दूर रहने वाले लोगों ने अपने देश की एक जानी-पहचानी परंपरा को एक नई जगह पर महसूस किया. हालांकि आरती टेम्स के किनारे हुई, लेकिन उसके पीछे की भावना वही रही जो हमारे भारत में होती है. प्रकृति के प्रति आभार, जीवन के प्रति सम्मान और लोगों को एक साथ जोड़ने की कोशिश. शायद यही वजह है कि लंदन में हुई यह पहली गंगा आरती सिर्फ एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और पर्यावरण के संदेश को दुनिया के सामने रखने वाला खास मौका बन गई.