बेरोजगार बैठा है प्रिंसटन का टॉपर: नोबेल पुरस्कार में जिस रिसर्च का हुआ जिक्र, वो आज एक-एक नौकरी को तरसा
प्रिंसटन यूनिवर्सिटी से पीएचडी करने वाले 30 वर्षीय जैक वेस को 2300 से ज्यादा जॉब एप्लिकेशन्स के बाद भी नौकरी नहीं मिली. उनकी रिसर्च का जिक्र नोबेल कमिटी तक ने किया था. जानिए कैसे एक आईवी लीग ग्रेजुएट आज जॉब मार्केट के बुरे दौर से गुजर रहा है और पेरेंट्स के साथ रहने पर मजबूर है.
प्रिंसटन जैसी टॉप आईवी लीग यूनिवर्सिटी से पीएचडी करने वाले बंदे को 2300 से ज्यादा जगह अप्लाई करने के बाद भी एक परमानेंट जॉब नहीं मिली. सुनने में थोड़ा अजीब लगता है, लेकिन अमरीका के 30 साल के जैक वेस की कहानी यही कड़वी सच्चाई बयान करती है. जैक की जिस रिसर्च को नोबेल कमिटी तक ने सराहा था, आज वही जैक एक-एक इंटरव्यू के लिए तरस रहे हैं.
30 साल के जैक वेस कोई आम स्टूडेंट नहीं हैं. उन्होंने राइस यूनिवर्सिटी से अपनी ग्रेजुएशन टॉप रैंक्स के साथ पूरी की थी. इसके बाद साल 2018 में उनका सिलेक्शन दुनिया की सबसे पुरानी और नामी प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में पीएचडी प्रोग्राम के लिए हुआ. जैक ने केमिकल इंजीनियरिंग में अपनी पीएचडी पूरी की. उनकी रिसर्च बर्फ बनने के वैज्ञानिक सिद्धांतों और मॉलिक्यूल के आपसी जुड़ाव पर बेस्ड थी. उनकी यह रिसर्च इतनी सॉलिड थी कि साल 2024 में जब फिजिक्स का नोबेल प्राइस अनाउंस हुआ, तो नोबेल कमिटी ने अपनी रिपोर्ट में जैक की रिसर्च को एक मिसाल के तौर पर मेंशन किया. उन्होंने दिखाया था कि कैसे मशीन लर्निंग का इस्तेमाल करके साइंस में नए रास्ते खोले जा सकते हैं.
2300 जगह अप्लाई किया लेकिन हर जगह निराशा
अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद जैक को लगा था कि उनकी इस शानदार प्रोफाइल को देखकर बड़ी-बड़ी कंपनियां और रिसर्च लैब्स उन्हें तुरंत हायर कर लेंगी. शुरुआत में उन्होंने फार्मास्यूटिकल सेक्टर और नेशनल रिसर्च लैब्स में पोस्ट-डॉक्टोरल रोल्स के लिए ट्राई किया. जब वहां से कोई पॉजिटिव रिस्पॉन्स नहीं आया, तो जैक ने अपने फील्ड से हटकर भी अप्लाई करना शुरू कर दिया.
उन्होंने सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग से लेकर फ्रोजन क्रैब केक्स बेचने वाली एक कंपनी में खाना पकाने तक के रोल के लिए रिज्यूमे भेजा. वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले दो सालों में जैक 2300 से ज्यादा नौकरियों के लिए अप्लाई कर चुके हैं, लेकिन हर जगह से उन्हें या तो रिजेक्शन मिला या फिर कोई जवाब ही नहीं आया.
एलुमनाई नेटवर्क भी नहीं आया काम
जब सब रास्ते बंद दिखने लगे तो जैक ने प्रिंसटन और राइस यूनिवर्सिटी के अपने सीनियर्स और एलुमनाई नेटवर्क से कॉन्टैक्ट किया. उन्होंने सोचा कि शायद किसी सीनियर का रेफरेंस काम आ जाए और उन्हें कोई रास्ता मिल जाए. लेकिन वहां से भी उन्हें कोई ठोस मदद नहीं मिली. ज्यादातर लोगों ने उन्हें बस यही सलाह दी कि वे कंपनियों के करियर पेज को दोबारा चेक करते रहें और अप्लाई करते रहें. आज के दौर में जब हर कोई नेटवर्किंग को सबसे बड़ा हथियार बताता है, तब जैक के लिए यह तरीका भी पूरी तरह फ्लॉप साबित हुआ. नतीजा यह हुआ कि जैक को मजबूरी में यूटा के साल्ट लेक सिटी में अपने माता-पिता के घर वापस लौटना पड़ा.
एआई वाली पार्ट-टाइम नौकरी से भी हाथ धोना पड़ा
लगातार मिल रहे रिजेक्शंस के बीच जनवरी 2026 में जैक को थोड़ी राहत मिली. एक स्टार्टअप ने उन्हें एआई सिस्टम को ट्रेन करने के लिए पार्ट-टाइम एक्सपर्ट के रूप में रख लिया. यहां उन्हें 70 डॉलर प्रति घंटे के हिसाब से पेमेंट मिल रहा था. लेकिन इस जॉब में काम बिल्कुल फिक्स नहीं था. किसी हफ्ते उन्हें 20 घंटे काम मिल जाता तो किसी हफ्ते सिर्फ 4 घंटे ही काम करने को मिलता. धीरे-धीरे काम इतना कम हो गया कि हफ्तों तक उन्हें कोई असाइनमेंट ही नहीं मिला. आखिरकार मार्च के महीने में एक ग्रुप चैट मैसेज के जरिए जैक को बता दिया गया कि उनका कॉन्ट्रैक्ट खत्म किया जा रहा है. एआई के इस दौर में एआई ट्रेनिंग की जॉब भी उनके हाथ से निकल गई.
जब घरवाले भी रह गए हैरान
जैक के माता-पिता दोनों पेशे से डॉक्टर हैं. वे खुद इस बात को लेकर बेहद हैरान हैं कि इतना पढ़ने-लिखने के बाद भी उनके बेटे को एक अदद नौकरी क्यों नहीं मिल पा रही है. उनकी मां हॉली कार्वर्स ने तो खुद जैक के रिज्यूमे और जॉब एप्लिकेशन्स को बारीकी से चेक किया कि कहीं कोई गलती तो नहीं हो रही है. लेकिन उन्हें रिज्यूमे में कोई कमी नहीं मिली. उनकी मां का कहना है कि उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था कि प्रिंसटन से पीएचडी करने वाले उनके बेटे को जॉब पाने के लिए इतना संघर्ष करना पड़ेगा. उनके पिता भी इस पूरी स्थिति को देखकर हैरान हैं और समझ नहीं पा रहे हैं कि आखिर अमरीका के जॉब मार्केट को क्या हो गया है.