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'पैसे तो मिलते हैं, लेकिन बहुत कुछ छूट जाता है': कनाडा में रह रही भारतीय महिला ने बताया जिंदगी का वो सच, जो डॉलर से नहीं मिलता

विदेश जाकर अच्छी कमाई करना आज लाखों भारतीयों का सपना है. कनाडा में रह रही भारतीय महिला कनुप्रिया ने सोशल मीडिया पर विदेश की जिंदगी का ऐसा पहलू दिखाया है, जिसे अक्सर कम ही लोग देखते हैं. उनका कहना है कि बाहर रहने वाले लोग पैसे और बेहतर लाइफ के साथ कई ऐसी चीजें छोड़ देते हैं, जिनकी कीमत डॉलर में नहीं लगाई जा सकती.

Written By Santosh Kumar Mishra
Published: Sep 28, 2026, 01:32 PM IST | Updated: Sep 28, 2026, 02:12 PM IST
Image Credit: @kanutalescanada | भारतीय महिला ने दिखाई विदेश में रहने वालों की असली तस्वीर
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विदेश जाने की बात होते ही अक्सर लोगों के दिमाग में सबसे पहले अच्छी सैलरी, डॉलर में कमाई और बेहतर लाइफस्टाइल की तस्वीर आती है. सोशल मीडिया पर भी विदेश में रहने वाली जिंदगी का यही हिस्सा ज्यादा दिखाई देता है. लेकिन कनाडा में रह रही भारतीय महिला कनुप्रिया ने इसी कहानी का दूसरा पहलू लोगों के सामने रखा है.

उन्होंने अपने इंस्टाग्राम पर शेयर किए एक वीडियो में बताया है कि विदेश में रहने वाले लोग सिर्फ पैसे नहीं कमाते, बल्कि इसके बदले कई चीजों की कीमत भी चुकाते हैं. उनके मुताबिक, जो लोग दूर से सिर्फ डॉलर देखते हैं, वे उस अकेलेपन और दूरी को नहीं देख पाते, जो इसके साथ आती है. इनमें परिवार से दूरी, त्योहारों की कमी और बीमारी में अकेले सब संभालना शामिल है.

दो-तीन साल बाद घर लौटो तो बदल जाते हैं माता-पिता

कनुप्रिया ने कहा कि विदेश में रहने वाले लोग कई बार दो या तीन साल बाद घर लौटते हैं. तब उन्हें एहसास होता है कि इस दौरान उनके माता-पिता काफी बूढ़े हो चुके हैं. यह बात शायद सबसे ज्यादा उन लोगों को छूती है, जो नौकरी या पढ़ाई के लिए अपने शहर और देश से दूर हैं. फोन पर हर रोज बात हो सकती है, वीडियो कॉल पर चेहरा भी दिखाई दे सकता है, लेकिन माता-पिता के साथ बिताया हुआ वक्त वापस नहीं आता. यही वजह है कि विदेश की अच्छी कमाई के साथ परिवार से दूर रहने की कीमत भी जुड़ी हुई है.

घर में शादी हो तो वीडियो कॉल से शामिल होना

कनुप्रिया ने बताया कि विदेश में रहने वालों के लिए परिवार के कई खास मौके वीडियो कॉल तक सिमट जाते हैं. घर में कोई शादी हो, कोई बड़ा फंक्शन हो या परिवार में कोई खास मौका, वे हर बार वहां मौजूद नहीं हो पाते. जब घर के लोग एक जगह बैठकर बातें कर रहे होते हैं, खाना खा रहे होते हैं और साथ में खुशियां मना रहे होते हैं, तब विदेश में रहने वाला व्यक्ति फोन की स्क्रीन के दूसरी तरफ से उस पल का हिस्सा बनता है. वीडियो कॉल से चेहरा सामने जरूर आ जाता है, लेकिन घर में मौजूद होने वाली बात अलग होती है.

 

 

बीमारी में सबसे ज्यादा महसूस होती है घर की कमी

कनुप्रिया ने विदेश की जिंदगी का एक और मुश्किल हिस्सा बीमारी को बताया. उनका कहना है कि जब इंसान विदेश में अकेला बीमार पड़ता है तो उसे अपनी छोटी-बड़ी जरूरतें भी खुद ही संभालनी पड़ती हैं. दवा लेनी है तो खुद जाना है. खाना बनाना है तो खुद बनाना है. कभी तबीयत ज्यादा खराब हो तो डॉक्टर के पास भी खुद जाना पड़ सकता है. कई बार हालत ऐसी होती है कि मन करता है कोई अपना बस पास बैठ जाए, लेकिन घर वाले हजारों किलोमीटर दूर होते हैं. यही वो पल हैं जब कमाई से ज्यादा परिवार की मौजूदगी की जरूरत महसूस होती है.

त्योहार आते हैं, लेकिन छुट्टी नहीं मिलती

भारत में त्योहारों का मतलब सिर्फ पूजा या छुट्टी नहीं होता. त्योहार आते ही परिवार एक साथ बैठता है, घर में खाना बनता है और रिश्तेदार मिलने आते हैं. लेकिन विदेश में रहने वालों के लिए हर त्योहार पर घर लौट पाना आसान नहीं होता. कनुप्रिया ने कहा कि जब घर पर लोग त्योहार मना रहे होते हैं, उस समय विदेश में रहने वाला व्यक्ति कई बार काम कर रहा होता है. दूरी की वजह से वह उन छोटी-छोटी खुशियों को मिस कर देता है, जो घर पर रहकर सामान्य लगती हैं.

'डॉलर गिनते हैं तो ये त्याग भी गिनिए'

कनुप्रिया की बात का सबसे बड़ा संदेश यही है कि विदेश की जिंदगी को सिर्फ कमाई के चश्मे से नहीं देखना चाहिए. उन्होंने लोगों से कहा कि अगर वे विदेश में रहने वालों की कमाई और डॉलर गिनते हैं, तो उनके साथ जुड़े दर्द को भी समझें. किसी दूसरे देश में रहकर पैसा कमाना निश्चित तौर पर नए मौके देता है, लेकिन हर व्यक्ति का अनुभव एक जैसा नहीं होता. किसी के लिए यह करियर का बड़ा कदम हो सकता है, तो किसी के लिए परिवार से लंबी दूरी का मुश्किल फैसला.

सोशल मीडिया पर लोगों ने कहा- बिल्कुल सच

कनुप्रिया की पोस्ट सामने आने के बाद कई लोगों ने उनकी बात से खुद को जोड़कर देखा. खासकर विदेश में रह रहे लोगों ने कहा कि इस तरह की बातें वही समझ सकता है, जिसने परिवार से दूर रहकर जिंदगी बिताई हो. एक यूजर ने लिखा, 'बिल्कुल सच बात कही आपने.' एक दूसरे यूजर ने कहा कि विदेश में रहने वाले लोग ही इस बात को पूरी तरह समझ सकते हैं. वहीं एक अन्य यूजर ने लिखा कि वह कनुप्रिया की बातों से खुद को जोड़कर देख पा रहा है.

विदेश की जिंदगी का पूरा सच सिर्फ बैंक बैलेंस नहीं

विदेश जाना किसी के लिए सपना पूरा होने जैसा हो सकता है. अच्छी नौकरी, बेहतर कमाई और नई जिंदगी इसके बड़े हिस्से हैं. लेकिन इस कहानी का दूसरा हिस्सा भी उतना ही असली है. कनुप्रिया की बातों ने इसी अनदेखे हिस्से पर ध्यान खींचा है. परिवार की शादी में वीडियो कॉल, त्योहार पर काम, बीमारी में खुद दवा और खाना संभालना और सालों बाद घर लौटकर माता-पिता को उम्रदराज देखना ऐसी चीजें हैं, जिन्हें किसी बैंक बैलेंस में नहीं गिना जा सकता. आखिर में सवाल विदेश जाने या न जाने का नहीं है. बात सिर्फ इतनी है कि बाहर की चमक देखते समय उसके पीछे छूट जाने वाली जिंदगी को भी समझा जाए. क्योंकि कुछ रिश्तों और पलों की कीमत डॉलर में नहीं, सिर्फ साथ रहने के वक्त में होती है.

(Disclaimer: प्रिय पाठक, हमारी यह खबर पढ़ने के लिए शुक्रिया. यह खबर इंटरनेट पर मौजूद डिटेल्स को एकत्रित करके बनाई गई है. Zee News इसके प्रमाणिकता, दावों और सत्यता की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी फैसले से पहले संबंधित आधिकारिक विभाग से संपर्क जरूर करें.)

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About the Author

संतोष मिश्रा जी न्यूज में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. वह पिछले 4.5 वर्षों से डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं. ट्रैवल, फीचर, ऑफबीट, ट्रेंडिंग और वायरल खबरों के साथ-साथ टेक और साइंस से जुड़ी खबरों में भी उनकी विशेष विशेषज्ञता है. उनकी खबरें अपनी विश्वसनीयता और सटीक जानकारी के लिए जानी जाती हैं. आसान और सहज भाषा में लिखे गए उनके कंटेंट को पाठक काफी पसंद करते हैं. सोशल मीडिया की दुनिया (Instagram, X, Reddit, Threads और Facebook) पर उनकी अच्छी पकड़ है. वह ट्रेंडिंग विषयों पर लगातार नजर रखते हैं और फ्रेश व यूनिक खबरें पाठकों तक पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं. संतोष मिश्रा इससे पहले News Nation और India Ahead जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी काम कर चुके हैं. उन्होंने बुंदेलखंड विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) किया है.
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