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भारत से अमेरिका जाकर बसने वाले लोगों की कहानियां तो अक्सर सुनने को मिलती हैं, लेकिन अमेरिका से भारत के किसी छोटे गांव में आकर रहने का फैसला करने वाली कहानी कम ही देखने को मिलती है. Hope सिंह की कहानी भी इसी वजह से लोगों का ध्यान खींच रही है.
अमेरिका के जॉर्जिया राज्य के अटलांटा में पली-बढ़ी Hope फिलहाल बिहार के एक गांव में अपने भारतीय पति अभिषेक सिंह और बेटे के साथ रह रही हैं. उनके सोशल मीडिया वीडियो में अब शहर की चमक-दमक से ज्यादा गांव की जिंदगी दिखाई देती है. कहीं वह हाथ से कपड़े धोती नजर आती हैं, तो कहीं बर्तन साफ करती हैं. कई वीडियो में वह कुर्ता या साड़ी पहने हुए दिखाई देती हैं और भारतीय तरीके से खाना बनाती हैं.
Hope ने 2023 में अभिषेक सिंह से शादी की थी. अभिषेक होटल बिजनेस और हॉस्पिटैलिटी से जुड़े हुए हैं. Hope ने अक्टूबर 2025 में पहली बार भारत का दौरा किया था. इसके बाद वह अपने पति और बेटे के साथ करीब छह महीने के लिए बिहार में रहने आईं. उन्होंने अपने पति का सरनेम भी अपनाया है. हालांकि उनकी अमेरिकी नागरिकता अभी बरकरार है और वह भारत में OCI हासिल करने की प्रक्रिया में हैं. Hope के मुताबिक, भारत आने का फैसला अचानक लिया गया कोई एडवेंचर नहीं था. उनके मन में लंबे समय से अमेरिका के बड़े शहर की भागदौड़ से अलग एक ऐसी जिंदगी जीने की इच्छा थी, जिसमें परिवार, प्रकृति और अपने हाथों से काम करने की ज्यादा जगह हो.
Hope का कहना है कि अमेरिका में रहते हुए भी उनका सपना एक ऐसे घर का था, जहां जिंदगी कुछ हद तक खुद पर निर्भर हो. इसे वह 'होमस्टेड' लाइफ कहती हैं. इस तरह की जिंदगी में लोग अपने लिए सब्जियां उगाने, गार्डन बनाने, जानवर पालने और प्रकृति के करीब रहने की कोशिश करते हैं. Hope को बिहार के गांव में इसी तरह की जिंदगी का कुछ हिस्सा दिखाई देता है. उनका कहना है कि वह बड़े शहरों की कंक्रीट वाली जिंदगी से दूर जाकर ऐसी जगह रहना चाहती थीं, जहां उनका बेटा परिवार और प्रकृति के बीच बड़ा हो. उनके लिए सिर्फ ज्यादा सुविधाएं होना ही अच्छी जिंदगी की पहचान नहीं है.
Hope अमेरिका और बिहार की जिंदगी के बीच अंतर को छिपाती नहीं हैं. वह मानती हैं कि दोनों जगहों पर सुविधाओं और जीवनशैली में काफी फर्क है. लेकिन उनका कहना है कि इसका मतलब यह नहीं कि अमेरिका में जिंदगी हर मायने में बेहतर है. उनके अनुसार, अमेरिका में कई लोगों के पास आधुनिक सुविधाएं जरूर हैं, लेकिन उनके साथ महंगा घर, हेल्थकेयर, खाना और रोजमर्रा के खर्च भी जुड़े हैं. कई लोग काम में इतना समय लगा देते हैं कि परिवार और अपने लिए वक्त निकालना मुश्किल हो जाता है. Hope का कहना है कि बाहर से किसी दूसरे देश की जिंदगी ज्यादा अच्छी दिखाई दे सकती है, लेकिन जब आप खुद उस जिंदगी का हिस्सा बनते हैं तो उसके साथ आने वाली परेशानियां भी समझ में आती हैं.
Hope ने अमेरिका की फूड हैबिट्स को लेकर भी अपनी राय शेयर की. उनके मुताबिक, वहां बहुत से लोगों की डाइट पैकेज्ड और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड पर काफी निर्भर है. इसके मुकाबले वह बिहार में घर का बना खाना और ताजी चीजों से खाना तैयार करने को पसंद करती हैं. उनके Instagram वीडियो में वह भारतीय खाना बनाते हुए और रोटियां बेलते हुए भी नजर आती हैं. हालांकि, Hope की बात को अमेरिका में हर व्यक्ति की जिंदगी पर लागू नहीं किया जा सकता. वह अपने अनुभव और अपनी सोच के आधार पर दोनों जगहों की जिंदगी का फर्क बता रही हैं.
Hope के वीडियो देखकर शायद लगे कि उनके लिए सबसे मुश्किल काम हाथ से बर्तन या कपड़े धोना रहा होगा. लेकिन उनके मुताबिक असली परेशानी सिर्फ काम नहीं है. उन्होंने बताया कि अमेरिका में भी उनके घर में डिशवॉशर नहीं था, इसलिए हाथ से बर्तन धोना उनके लिए कोई नई बात नहीं थी. फर्क यह था कि वहां वह सिंक में साफ और गर्म पानी के साथ यह काम करती थीं. बिहार में वही काम जमीन पर बैठकर और अलग परिस्थितियों में करना उनके लिए ज्यादा बड़ा मानसिक बदलाव था. इसका मतलब काम वही था, लेकिन उसके आसपास की पूरी व्यवस्था बदल गई थी.
Hope ने अपनी सबसे बड़ी परेशानी बताते हुए कहा कि वह कई छोटी सुविधाओं को बहुत मिस करती हैं. जैसे साफ और गर्म पानी वाला सिंक, जब चाहें तब गर्म पानी से नहाना या बिना ज्यादा तैयारी के घर से निकलकर अपना छोटा-मोटा काम कर लेना. अमेरिका में ये चीजें उनकी रोज की जिंदगी का हिस्सा थीं. इसलिए उन्होंने उन्हें कभी अलग से 'सुविधा' के रूप में सोचा ही नहीं था. बिहार आने के बाद उन्हें महसूस हुआ कि जिन चीजों को वह सामान्य मानती थीं, वे असल में हर जगह आसानी से उपलब्ध नहीं होतीं. इसी एहसास को वह अपने लिए इस बदलाव का सबसे बड़ा हिस्सा मानती हैं.
Hope के मुताबिक, बिहार के गांव और अमेरिका के बीच अंतर सिर्फ सड़क, पानी, घर या दूसरी सुविधाओं तक सीमित नहीं है. यहां लोगों के रहने का तरीका, परिवार की भूमिका और महिलाओं से जुड़ी उम्मीदें भी काफी अलग हैं. उन्होंने खास तौर पर गांवों में महिलाओं की जिंदगी को लेकर अपनी चिंता जाहिर की. उनका कहना है कि कई जगह महिलाओं पर घर और परिवार की जिम्मेदारियों का दबाव ज्यादा होता है. समाज की उम्मीदों से अलग चलने पर उन्हें लोगों की बातों और जजमेंट का सामना भी करना पड़ सकता है. लेकिन Hope गांव की जिंदगी को सिर्फ मुश्किलों के तौर पर नहीं देखना चाहतीं.
Hope का कहना है कि गांव की जिंदगी में बहुत कुछ ऐसा भी है, जिसे वह दिल से पसंद करती हैं. परिवार का साथ, पड़ोस और कम्युनिटी की भावना, घर का बना खाना, भारतीय कपड़े और बेटे का दादा-दादी जैसे परिवार के लोगों के करीब रहना उन्हें अच्छा लगता है. उनके लिए यह अनुभव सिर्फ अमेरिका बनाम भारत की तुलना करना नहीं है. वह अपनी जिंदगी के दोनों पहलुओं को सोशल मीडिया पर दिखाना चाहती हैं. उनका कहना है कि भारत की खूबसूरती और यहां की मुश्किलें दोनों को ईमानदारी से दिखाना जरूरी है.
Hope को बिहार में जो चीज सबसे ज्यादा पसंद आई, उनमें से एक उनके बेटे को मिलने वाला परिवार का साथ है. उन्होंने कहा कि अमेरिका में एक कहावत है कि बच्चे को बड़ा करने के लिए पूरा गांव चाहिए. बिहार में उन्हें इसका मतलब अपनी जिंदगी में महसूस हुआ. उनका बेटा परिवार के कई लोगों के बीच रह रहा है और उसे रिश्तों का वह नेटवर्क मिल रहा है, जिसे Hope बहुत खास मानती हैं. वह घर के बने खाने और परिवार के मजबूत रिश्तों को भी अपनी इस जिंदगी का बड़ा हिस्सा बताती हैं.
अलग संस्कृति में शादी और फिर दूसरे देश में जाकर रहना आसान नहीं होता. Hope के लिए भी यह बदलाव हमेशा आसान नहीं रहा. लेकिन वह कहती हैं कि उनके पति ने उन्हें अकेले एडजस्ट करने के लिए नहीं छोड़ा. उनके मुताबिक, रिश्ते में सिर्फ एक व्यक्ति से समझौते की उम्मीद नहीं होनी चाहिए. दोनों को बीच का रास्ता निकालना पड़ता है. Hope अपने पति की तारीफ करते हुए कहती हैं कि वह उनकी बात की इज्जत करते हैं, उन्हें बराबर का साथी मानते हैं और मुश्किल समय में उनका साथ देते हैं. उनके लिए यही वजह है कि वह हजारों किलोमीटर दूर अमेरिका से भारत तक आने के फैसले को अपनी शादी और परिवार से जोड़कर देखती हैं.
Hope Instagram और YouTube के जरिए अपनी जिंदगी रिकॉर्ड कर रही हैं. उनका मकसद सिर्फ गांव की तस्वीर दिखाना नहीं है, बल्कि एक मल्टीकल्चरल शादी में आने वाली खुशियों और मुश्किलों को भी सामने रखना है. उनकी कहानी में न तो अमेरिका पूरी तरह परफेक्ट नजर आता है और न ही बिहार की जिंदगी किसी सपने जैसी. दोनों जगहों की अपनी सुविधाएं, परेशानियां और अलग अनुभव हैं. शायद यही इस कहानी की सबसे दिलचस्प बात है. अटलांटा से बिहार तक पहुंची Hope ने सिर्फ अपना पता नहीं बदला, बल्कि जिंदगी को देखने का नजरिया भी बदला है. उनके लिए सबसे बड़ा सबक यही रहा कि रोज की जिंदगी में शामिल छोटी-छोटी सुविधाओं की कीमत तब समझ आती है, जब वे अचानक आपकी पहुंच से बाहर हो जाएं. और इसी के साथ उन्हें यह भी महसूस हुआ कि आराम से भरी जिंदगी और परिवार, रिश्तों और अपनेपन से जुड़ी जिंदगी हमेशा एक ही चीज नहीं होती.