)
ऑनलाइन फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म Zomato से खाना ऑर्डर करना अब कुछ यूजर्स के लिए महंगा हो गया है. कंपनी ने Cash on Delivery यानी डिलीवरी के समय कैश से भुगतान करने वाले ऑर्डर पर नया चार्ज लगाना शुरू किया है. जोमैटो पर लगने वाले इस चार्ज को ऐप पर Pay on Delivery Fee के नाम से दिखाया जा रहा है. शुरुआत में यह फीस 5 रुपये बताई जा रही है, लेकिन कुछ यूजर्स के बिल में यह चार्ज 7 रुपये से लेकर 20 रुपये तक दिखाई दे रहा है. कुछ मीडिया रिपोर्ट में यह चार्ज 30 रुपये तक बढ़ने की भी बात कही गई है.
खास बात यह है कि अगर कस्टमर ऑनलाइन पेमेंट करता है तो उसे यह एक्स्ट्रा चार्ज नहीं देना होगा. UPI, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड या नेट बैंकिंग जैसे डिजिटल पेमेंट ऑप्शन सेलेक्ट करने पर कस्टमर्स से Pay on Delivery Fee नहीं लगाया जा रहा है.
Zomato का यह नया चार्ज ऑर्डर करने के दौरान लगने वाले चार्ज से अलग है. यानी यह प्लेटफॉर्म फीस, रेस्टोरेंट की पैकिंग फीस, डिलीवरी चार्ज और GST के साथ ही लिया जाएगा. ऐसे में Cash on Delivery सेलेक्ट करने वाले कस्टमर्स के लिए खाने की कीमत के साथ पैकिंग, डिलीवरी, प्लेटफॉर्म और अब कैश पेमेंट से जुड़ा चार्ज भी जुड़ सकता है.
फिलहाल Swiggy ने इस तरह का कोई अलग चार्ज शुरू नहीं किया है. ऐसे में दोनों कंपनियों के बीच मुकाबले के बीच Zomato का यह फैसला कस्टमर्स के लिए बड़ा बदलाव माना जा रहा है.
Zomato पर हर दिन लगभग 23 से 25 लाख ऑर्डर किए जाते हैं. अगर कंपनी हर Cash on Delivery ऑर्डर पर सिर्फ 5 रुपये का एक्स्ट्रा चार्ज लेती है, तो इससे हर दिन लगभग 1.25 करोड़ रुपये तक की अतिरिक्त कमाई हो सकती है. हालांकि सभी कस्टमर्स Cash on Delivery का इस्तेमाल नहीं करते हैं. इसके बाद भी अगर बड़ी संख्या में ऑर्डर पर यह फीस लागू होती है तो कंपनी की सालाना कमाई में सैकड़ों करोड़ रुपये का इजाफा हो सकता है.
फूड डिलीवरी कंपनियों की तरफ से अलग अलग चार्ज लेना कोई नहीं बात नहीं है. अप्रैल 2023 में Zomato और Swiggy ने प्लेटफॉर्म फीस की शुरुआत सिर्फ 2 रुपये प्रति ऑर्डर से की थी. अब यह फीस बढ़कर 14.99 रुपये प्रति ऑर्डर तक पहुंच गई है. इसके ऊपर 18 प्रतिशत GST भी अलग से लगता है.
भले ही 2 रुपये से बढ़कर लगभग 15 रुपये तक पहुंचा यह चार्ज एक छोटे बदलाव जैसा लगे, लेकिन करोड़ों ऑर्डर होने के कारण इससे कंपनियों को बड़ी कमाई होती है. रिपोर्ट के अनुसार ई-कॉमर्स और फूड डिलीवरी कंपनियां ऐसे छोटे छोटे चार्ज से सालाना लगभग 3,500 करोड़ से 4,000 करोड़ रुपये तक कमा सकती हैं.
Zomato का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब देश के फूड डिलीवरी और क्विक कॉमर्स मार्केट में मुकाबला तेजी से ढ़ रहा है. Rapido का Only प्लेटफॉर्म और Flipkart की नई Eat In सर्विस भी इस मार्केट में कदम रख रही है, जिसके बाद इन प्लेटफॉर्म के बीच मुकाबला और भी बढ़ जाएगा.
अगर आप भी Cash on Delivery जैसे चार्ज से बचना चाहते हैं, तो फिलहाल आप अभी ऑनलाइन पेमेंट का ऑप्शन सेलेक्ट कर सकते हैं.