Explainer: 24 टेस्ट खेलने वाले प्रज्ञान ओझा बनेंगे चीफ सिलेक्टर या कोई और मार लेगा बाजी? समझें पूरा समीकरण
बीसीसीआई को अजीत अगरकर के रिप्लेसमेंट की तलाश है, जिनका बतौर चीफ सिलेक्टर का कार्यकाल समाप्त हो चुका है. फिलहाल प्रज्ञान ओझा ये जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, लेकिन वो इस कुर्सी पर बने रहेंगे या नहीं, इसका फैसला कैसे होगा? आइए जानते हैं.
भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम के लिए चयनकर्ता का एक पद फिलहाल खाली है. बतौर चीफ सिलेक्टर अजीत अगरकर का कार्यकाल समाप्त हो गया है और बीसीसीआई को नए मुख्य चयनकर्ता की तलाश है. वर्तमान में पूर्व भारतीय स्पिनर प्रज्ञान ओझा को अंतरिम चीफ सिलेक्टर की जिम्मेदारी मिली है. लेकिन वो इस कुर्सी पर बने रहेंगे या नहीं इसका फैसला आने वाले समय में होगा. अजीत अगरकर के मुख्य चयनकर्ता का पद छोड़ने के बाद, भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने अपनी पुरुष चयन समिति में एक खाली पद के लिए नए आवेदन मंगाए हैं.
अगरकर का कार्यकाल 4 अक्टूबर को खत्म हो गया. भारत के पूर्व तेज गेंदबाज ने 18 सितंबर को हुई भारतीय क्रिकेट बोर्ड की सालाना आम बैठक के बाद बोर्ड को बता दिया था कि वे अपना कॉन्ट्रैक्ट आगे नहीं बढ़ाना चाहते. बीसीसीआई ने एक आधिकारिक बयान जारी कर ऐसे उम्मीदवारों की तलाश शुरू की है जो टेस्ट, वनडे, T20I में सीनियर नेशनल पुरुष टीम को चुनने की जिम्मेदारी संभाल सकें.
चीफ सिलेक्टर चुने जाने की प्रतिक्रिया क्या है?
BCCI की विज्ञप्ति के अनुसार, आवेदक ने कम से कम 7 टेस्ट मैच, या 30 फर्स्ट-क्लास मैच, या कम से कम 10 वनडे और 20 फर्स्ट-क्लास मैच खेले हों. आवेदक को खेल से संन्यास लिए हुए कम से कम पांच साल हो चुके हों. बता दें कि कोई भी व्यक्ति जो BCCI के 'मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन' और 'नियम और विनियमों' में परिभाषित किसी भी क्रिकेट समिति का कुल मिलाकर पांच साल तक सदस्य रहा हो, वह पुरुषों की चयन समिति का सदस्य बनने के लिए पात्र नहीं होगा.
चीफ सिलेक्टर की जिम्मेदारी क्या होती है?
- सही और पारदर्शी तरीके से सीनियर नेशनल पुरुष टीम के लिए सबसे अच्छे खिलाड़ियों को चुनना, साथ ही टैलेंट की पहचान करना और टीम के लिए मजबूत बैकअप (बेंच स्ट्रेंथ) तैयार करना.
- घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मैचों के जरिए खिलाड़ियों को खोजना और उनका आकलन करना और सभी फॉर्मेट में सीनियर नेशनल पुरुष टीम के चयन और विकास में योगदान देना.
- जरूरत पड़ने पर टीम की मीटिंग में शामिल होना और घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मैच देखने के लिए यात्रा करना.
- टीम के प्रदर्शन पर हर तीन महीने में मूल्यांकन रिपोर्ट तैयार करके BCCI की एपेक्स काउंसिल को सौंपना.
- टीम चयन के बारे में मीडिया से बात करना.
- हर फॉर्मेट में टीम के लिए कप्तान नियुक्त करना.
कैसे होगा प्रज्ञान ओझा की किस्मत का फैसला?
पूर्व भारतीय स्पिनर प्रज्ञान ओझा मुख्य चयनकर्ता की कुर्सी संभालेंगे या नहीं? इसका फैसला आवेदकों की योग्यता के आधार पर निर्भर करेगा. इसे उदाहरण से समझते हैं. प्रज्ञान ओझा ने भारत के लिए 24 टेस्ट खेले हैं. अगर कोई आवेदक इससे अधिक टेस्ट खेलने वाला होता है तो वो चीफ सिलेक्टर बनने की रेस में आगे निकल जाएगा. इसका मतलब ये है कि प्रज्ञान ओझा तभी चीफ सिलेक्टर बनेंगे, जब किसी उचित आवेदक के पास 24 से कम टेस्ट खेलने का अनुभव होगा . इस स्थिति में भारत के लिए ज्यादा टेस्ट खेलने के आधार पर ओझा मुख्य चयनकर्ता बन जाएंगे. ये भी जानना जरूरी है कि बोर्ड की जोनल रोटेशन पॉलिसी के अनुसार, नया सदस्य वेस्ट ज़ोन से आएगा, जिस ज़ोन का प्रतिनिधित्व अजीत अगरकर ने किया था.
वेस्ट जोन से ही क्यों होना चाहिए?
BCCI की सिलेक्शन कमिटी एक सख्त जोनल सिस्टम के तहत काम करती है, जिसमें नॉर्थ, साउथ, ईस्ट, वेस्ट और सेंट्रल जोन से एक-एक प्रतिनिधि होता है. मुंबई के क्रिकेटर अगरकर चेयरमैन के तौर पर अपने पूरे कार्यकाल के दौरान वेस्ट जोन की सीट पर थे, इसलिए उनके हटने से वह खास रीजनल स्लॉट खाली हो गया है, न कि कोई ऐसी ओपनिंग जो किसी भी जोन के व्यक्ति के लिए खुली हो. इस सिस्टम के तहत, बोर्ड किसी भी योग्य पूर्व क्रिकेटर को नहीं चुन सकता. उनकी जगह लेने वाला व्यक्ति वेस्ट जोन के किसी एसोसिएशन (जैसे मुंबई, गुजरात, सौराष्ट्र, बड़ौदा, महाराष्ट्र या विदर्भ) से ही होना चाहिए.
कैसा रहा अजीत अगरकर का कार्यकाल?
पूर्व भारतीय तेज गेंदबाज अजीत अगरकर ने जुलाई, 2023 में मुख्य चयनकर्ता की कुर्सी संभाली थी. उनके कार्यकाल में भारत 2023 वनडे वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंचा, 2024 T20 वर्ल्ड कप जीता, 2025 चैंपियंस ट्रॉफी जीती और 2026 में T20 वर्ल्ड कप का अपना खिताब सफलतापूर्वक बचाया. हालांकि, उनके कार्यकाल के दौरान ही विराट कोहली, रोहित शर्मा और रविचंद्रन अश्विन जैसे दिग्गजों ने टेस्ट से संन्यास का ऐलान किया, जिसकी वजह से अगरकर की आलोचना भी हुई.
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