जिसे खत्म मान लिया था, वही फिर लौटा! 4 साल बाद टीम इंडिया में एंट्री, 6-7 घंटे की मेहनत ने बदली भुवनेश्वर की कहानी
भुवनेश्वर कुमार की 4 साल बाद टीम इंडिया में वापसी हुई है. IPL 2026 में 28 विकेट लेने वाले इस तेज गेंदबाज ने फिटनेस के लिए रोज 6-7 घंटे मेहनत की है.
भारतीय क्रिकेट में वापसी करना आसान नहीं होता, खासकर तब जब कोई तेज गेंदबाज चार साल तक टीम इंडिया से बाहर रहा हो, लेकिन भुवनेश्वर कुमार ने अपनी मेहनत, शानदार प्रदर्शन और फिटनेस के दम पर एक बार फिर नेशनल टीम का दरवाजा खटखटा दिया. न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 इंटरनेशनल सीरीज के लिए चुने जाने के बाद 36 साल के इस गेंदबाज की खूब चर्चा हो रही है. उनकी वापसी के पीछे IPL में शानदार प्रदर्शन से लेकर फिटनेस पर घंटों काम करने तक की पूरी कहानी है.
भुवनेश्वर कुमार ने 22 नवंबर 2022 को न्यूजीलैंड के खिलाफ भारत के लिए अपना आखिरी मैच खेला था. इसके बाद उन्हें लंबे समय तक टीम इंडिया में जगह नहीं मिली. अब करीब चार साल बाद एक बार फिर उन्हें न्यूजीलैंड के खिलाफ पांच मैचों की टी20 इंटरनेशनल सीरीज के लिए भारतीय टीम में शामिल किया गया है. भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की ओर से टीम का ऐलान होने के बाद 16 सदस्यीय टीम में भुवनेश्वर का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाले नामों में शामिल रहा. इस दौरान वह इंटरनेशनल क्रिकेट से दूर जरूर रहे, लेकिन घरेलू क्रिकेट और IPL में लगातार सक्रिय रहे.
4 साल बाद टीम इंडिया में एंट्री
22 नवंबर, 2022 को भुवनेश्वर कुमार ने न्यूजीलैंड के खिलाफ भारत के लिए अपना आखिरी मैच खेला था. चार साल बाद, वह उसी टीम के खिलाफ भारतीय T20I टीम में लौटे हैं. उनकी वापसी इस हफ्ते की शुरुआत में हुई, जब BCCI ने न्यूजीलैंड में होने वाली पांच मैचों की T20I सीरीज के लिए भारतीय टीम का ऐलान किया. 16 सदस्यों वाली टीम में 36 साल के इस खिलाड़ी का नाम सबसे ज्यादा चर्चा का विषय रहा. इस बीच के चार सालों में उन्हें भारत की टीम में नहीं चुना गया. वह इंटरनेशनल क्रिकेट के रेगुलर खिलाड़ी से घरेलू टीम के लीडर बन गए और उन्होंने एक ऐसा फिटनेस रूटीन अपनाया, जिसमें उनके साथ करीब से काम करने वाले व्यक्ति के अनुसार, हर दिन घंटों मेहनत करनी पड़ती थी.
कैसे बदली भुवनेश्वर की कहानी?
टीम इंडिया में वापसी से कुछ महीने पहले, उन्होंने IPL 2026 में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के लिए 16 मैचों में 28 विकेट लिए और उस सीजन में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले संयुक्त खिलाड़ी बने. RCB के लगातार दूसरी बार IPL खिताब जीतने के दौरान, उन्होंने 17.89 की औसत और 7.95 की इकॉनमी रेट से विकेट लिए. IPL के बाद, भुवनेश्वर ने UPT20 लीग में लखनऊ फाल्कन्स की कप्तानी करते हुए टीम को फाइनल तक पहुंचाया. उन्होंने 11 मैचों में 16.57 की औसत और 6.82 की इकोनॉमी रेट से 14 विकेट लिए.
शरीर में चर्बी का प्रतिशत 19% से घटकर 14% हो गया
भुवनेश्वर के पर्सनल स्ट्रेंथ और कंडीशनिंग कोच सूर्य प्रताप यादव ने टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए एक इंटरव्यू में कहा, 'सबसे ज्यादा ध्यान बॉडी कंपोजिशन (शरीर की बनावट) पर दिया गया. हमारा ज्यादा ध्यान मसल मास बढ़ाते हुए शरीर की चर्बी कम करने पर था. जैसे-जैसे एथलीट की उम्र बढ़ती है, मांसपेशियों का कम होना एक चिंता का विषय बन जाता है, इसलिए हमने स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, प्रोटीन लेने और सप्लीमेंटेशन पर काफी काम किया.' भुवनेश्वर के शरीर में चर्बी का प्रतिशत 19% से घटकर 14% हो गया है, जबकि उनका वजन वही बना हुआ है, जो मांसपेशियों के बढ़ने का संकेत है. सूर्य प्रताप ने इस साल मई में टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया था, 'उनकी ताकत काफी बढ़ गई है, और इससे उन्हें ज्यादा जोर लगाने और तेजी से दौड़ने में मदद मिली है.'
दिन में करते हैं 6-7 घंटे ट्रेनिंग
भुवनेश्वर के पर्सनल स्ट्रेंथ और कंडीशनिंग कोच सूर्य प्रताप यादव ने आगे कहा, 'अनुशासन सबसे बड़ी बात है. वह अपने शरीर की कमजोरियों को समझते हैं और उन पर पहले से ही काम करते हैं. हम हर दिन लगभग एक घंटा रिहैब और चोट से बचने वाली एक्सरसाइज पर लगाते हैं. इसके साथ ही, हम रिकवरी, हाइड्रेशन, नींद, प्रोटीन लेने और सप्लीमेंट्स पर भी बहुत ध्यान देते हैं. ये सभी चीजें उन्हें पूरे सीजन फिट रहने में मदद करती हैं.' सूर्य प्रताप यादव ने कहा था, 'लोग जितना सोचते हैं, उससे कहीं ज्यादा, वह (भुवनेश्वर) दिन में 6-7 घंटे ट्रेनिंग करते हैं. इसमें जिम सेशन, रिहैबिलिटेशन का काम, रिकवरी रूटीन, बैटिंग प्रैक्टिस, बॉलिंग प्रैक्टिस और अलग-अलग माहौल में ट्रेनिंग शामिल है. भले ही यह हमेशा सोशल मीडिया पर न दिखे, लेकिन वह हर दिन जो मेहनत करते हैं, वह जबरदस्त है.'
भुवनेश्वर ने घरेलू क्रिकेट में खेलना जारी रखा
36 साल के तेज गेंदबाज के लिए उस वर्कलोड को उतनी ही सावधानी से मैनेज करना होता है जितनी सावधानी से बॉलिंग की जाती है. भुवनेश्वर का तरीका यह था कि इस रूटीन को अपनी क्रिकेट जिंदगी का हिस्सा बना लिया जाए, न कि इसे सिर्फ वापसी की कोशिश के लिए रखा जाए. भारत की टीम से बाहर होने के बाद के साल उन्होंने कॉम्पिटिटिव क्रिकेट से दूर नहीं बिताए. भुवनेश्वर घरेलू क्रिकेट में उत्तर प्रदेश के लिए एक अहम खिलाड़ी बने रहे और सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी और विजय हजारे ट्रॉफी जैसे टूर्नामेंट में बॉलिंग अटैक की कमान संभाली. IPL भी एक और लगातार चलने वाली चीज रही. उन्होंने नेशनल टीम में वापसी की उम्मीद पहले ही छोड़ दिया था, लेकिन कड़ी मेहनत जारी रही. भुवनेश्वर लंबे समय से भारत के सबसे असरदार स्विंग गेंदबाजों में से एक रहे हैं, खासकर तब जब नई गेंद से मूवमेंट मिलती है. विदेशों में उनका रिकॉर्ड शानदार रहा है.