भाषा चुनें
  • Hindi
  • English
  • Marathi
  • Bengali
  • Tamil
  • Malayalam
  • Gujarati
  • Telugu
  • Kannada
  • Odisha
  • Z Bharat
  • ZEE PHH
  • ZEE Business
  • WION
राज्य चुनें
  • उत्तर प्रदेश
  • उत्तराखण्ड
  • मध्य प्रदेश
  • छत्‍तीसगढ़
  • हरियाणा
  • दिल्ली
  • बिहार
  • झारखण्ड
  • राजस्‍थान
  • हिमाचल प्रदेश
  • हिन्दीEnglishमराठीবাংলাதமிழ்മലയാളംગુજરાતીతెలుగుಕನ್ನಡଓଡ଼ିଶାZ BharatPHHBusinessWION
  • facebookyoutubetwitterlinkedinwhatsapp
Zee News Hindi
App
Zee News Hindi
  • News
  • वीडियो
  • फोटोज़
  • रील्स
  • लाइव ब्लॉग
  • राज्य चुनें

Add Zee Business As A Preferred Source
App
  • लेटेस्ट न्यूज़
  • देश
  • खेल
  • दुनिया
  • मनोरंजन
  • बिजनेस
  • ओरिजनल
  • टेक
  • धर्म
  • ऑटो
  • एजुकेशन
  • एस्ट्रोलॉजी
  • राशिफल
  • LIVE टीवी
  • लेटेस्ट न्यूज़
  • देश
  • खेल
  • दुनिया
  • मनोरंजन
  • बिजनेस
  • ओरिजनल
  • टेक
  • धर्म
  • ऑटो
  • एजुकेशन
  • एस्ट्रोलॉजी
  • राशिफल
  • ज़ी न्यूज़ हिंदी
  • /खेल
  • /क्रिकेट
  • /कोर्ट केस, गुटबाजी और भारी बवाल: एक राज्य की लड़ाई, सैकड़ों खिलाड़ियों का भविष्य दांव पर, आखिर क्रिकेट प्रशासन की गलती कौन भुगतेगा?

कोर्ट केस, गुटबाजी और भारी बवाल: एक राज्य की लड़ाई, सैकड़ों खिलाड़ियों का भविष्य दांव पर, आखिर क्रिकेट प्रशासन की गलती कौन भुगतेगा?

अरुणाचल प्रदेश क्रिकेट में गुटबाजी और कोर्ट केस के कारण अंडर-19 टीम वीनू मांकड़ ट्रॉफी से बाहर हो गई है. अब 11 अक्टूबर से शुरू होने वाली रणजी ट्रॉफी में टीम की भागीदारी पर भी संकट मंडरा रहा है.

Written ByTarun Verma
Published: Oct 09, 2026, 08:25 AM IST|Updated: Oct 17, 2026, 11:38 PM IST
joinshare
कोर्ट केस, गुटबाजी और भारी बवाल: एक राज्य की लड़ाई, सैकड़ों खिलाड़ियों का भविष्य दांव पर, आखिर क्रिकेट प्रशासन की गलती कौन भुगतेगा?
Image Credit: Arunachal Pradesh Cricket in Crisis

About the Author

Tarun Verma

Tarun Verma

तरुण वर्मा ज़ी न्यूज़ हिंदी डिजिटल में स्पोर्ट्स डेस्क में कार्यरत हैं. तरुण वर्मा फरवरी 2021 से ज़ी न्यूज का हिस्सा हैं. तरुण वर्मा किसी भी मैच का बारीकी से विश्‍लेषण करने में माहिर हैं. तरुण वर्मा को क्रिकेट व अन्य खेलों से जुड़ी ख़बरों के विभिन्न एंगल्स पर साइड स्टोरीज़ करने के अलावा खिलाड़ियों पर स्‍पेशल पैकेजेस बनाने में बहुत रुचि है. क्रिकेट व अन्य खेलों से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी ज़ी न्यूज़ के पाठकों तक पहुंचाने की ज़िम्मेदारी तरुण वर्मा बख़ूबी निभाते हैं. तरुण वर्मा को क्रिकेट खेलने, किताबें पढ़ने और घूमने का बहुत शौक है. तरुण वर्मा साल 2016 में गौतम गंभीर के कोच संजय भारद्वाज का इंटरव्यू कर चुके हैं. तरुण वर्मा खेलों के कई बड़े-बड़े इवेंट्स को कवर करने का अनुभव रखते हैं. ज़ी न्यूज़ से जुड़ने से पहले तरुण वर्मा इंडिया टुडे ग्रुप मीडिया (Aajtak.in) संस्थान का भी हिस्सा रह चुके हैं. आप Tarun.Verma@India.com पर सीधे ईमेल कर इनसे जुड़ सकते हैं. तरुण वर्मा एक दशक से पत्रकारिता में सक्रिय हैं.
Read More

ट्रेंडिंग

  • न्यूज़
  • फोटो
  • वीडियो
हरियाणा में धान के गेट पास नहीं कटे तो भड़के किसान, करनाल-कैथल रोड किया जाम

हरियाणा में धान के गेट पास नहीं कटे तो भड़के किसान, करनाल-कैथल रोड किया जाम

2

कौन है धौलपुर की लेडी डॉन पूजा? जो 3 साल तक पुलिस को दे रही था चकमा, जयपुर से हुई गिरफ्तार

3

अतीक अहमद के अवैध साम्राज्य पर फिर चला पुलिस का डंडा; मदनलाल के नाम दर्ज 30 करोड़ की 14 बेनामी संपत्तियां कुर्क

4

जान से खिलवाड़? घंटों इंतजार के बाद भी नहीं मिली 108 एंबुलेंस, मालवाहक में ऑक्सीजन सिलेंडर बांधकर मरीज पहुंचे अस्पताल

5

'गुस्सा और बेबसी महसूस हुई', शिल्पा राव का शो बीच में रोके जाने पर भड़के पति; बोले-हम नहीं भूलेंगे

logo
  • contact us
  • privacy policy
  • legal
  • investor info
  • advertise with us
© 1998-2026 Indiadotcom Digital Private Limited, All Rights Reserved.

भारत जैसे देश में करोड़ों लोगों की भीड़ से निकलकर नेशनल क्रिकेट टीम में जगह बनाने के लिए खिलाड़ियों को कई सालों तक एड़ियां रगड़नी पड़ती है, लेकिन जब क्रिकेट की जिम्मेदारी संभालने वाले प्रशासनिक संघ आपसी विवाद में उलझ जाएं, तो इसका नुकसान युवा खिलाड़ियों को उठाना पड़ता है. अरुणाचल प्रदेश में कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है. राज्य की अंडर-19 पुरुष टीम प्रशासनिक विवाद और कोर्ट केस के कारण वीनू मांकड़ ट्रॉफी में हिस्सा नहीं ले सकी. अब सवाल यह है कि क्या इस खींचतान के चलते राज्य की टीम रणजी ट्रॉफी से भी बाहर हो जाएगी.

अरुणाचल प्रदेश को गुरुवार को भुवनेश्वर के KIIT क्रिकेट स्टेडियम में वीनू मांकड़ ट्रॉफी के प्लेट ग्रुप में सिक्किम के खिलाफ अपना पहला मुकाबला खेलना था, लेकिन राज्य क्रिकेट संघ में चल रहे विवाद और हाई कोर्ट के अंतरिम आदेश के कारण टीम मैदान पर नहीं उतर सकी. ऐसे में मुकाबले में अरुणाचल प्रदेश को हार का सामना करना पड़ सकता है और बीसीसीआई के खेलने के नियमों के मुताबिक विरोधी टीम को पूरे अंक मिल सकते हैं.

ये भी पढ़ें- Analysis: 66,445 रन का महाविस्फोट! धोनी-विराट-रोहित में कौन है कप्तानी का असली बाहुबली? रिकॉर्ड्स बता देंगे सबसे बड़े चैंपियन की ताकत

कोर्ट केस, गुटबाजी और भारी बवाल

अरुणाचल क्रिकेट एसोसिएशन (ACA) के भीतर विवाद कई जिला क्रिकेट संघों की आपत्तियों के बाद बढ़ा. लोअर सियांग, अपर सुबनसिरी, कामले, तवांग, वेस्ट सियांग और पापुम पारे के छह जिला क्रिकेट संघों ने राज्य कार्यकारिणी के चुनाव में कथित नियम उल्लंघन का आरोप लगाया. इन संघों ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए नए सिरे से चुनाव कराने की मांग की.

एक राज्य की लड़ाई, सैकड़ों खिलाड़ियों का भविष्य दांव पर

अरुणाचल क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष नबाम विवेक और अन्य पदाधिकारियों के खिलाफ कानूनी चुनौती के बाद गुवाहाटी हाई कोर्ट की ईटानगर पीठ ने संघ के कामकाज पर अंतरिम रोक लगा दी. इसके चलते राज्य क्रिकेट संघ की प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हुई. बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने बताया कि मामला अदालत में लंबित होने के कारण फिलहाल संघ के पास कामकाज संभालने वाली प्रभावी व्यवस्था नहीं है.

सैकिया के मुताबिक, सितंबर के पहले सप्ताह में मामले की सुनवाई पूरी हो गई थी, लेकिन अदालत का फैसला अभी आना बाकी है. इसी वजह से वीनू मांकड़ ट्रॉफी के लिए टीम तैयार करने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी. इस विवाद का असर अंडर-19 महिला टी20 ट्रॉफी में राज्य की भागीदारी पर भी पड़ा है.

ये भी पढ़ें- भुवनेश्वर का कमबैक: 20 तेज गेंदबाज, 3 ऑलराउंडर... भारत ने किस-किसको दिया मौका? 4 साल में लंबी हो गई लिस्ट

अरुणाचल के सामने सबसे बड़ी चुनौती

अरुणाचल प्रदेश के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती रणजी ट्रॉफी में हिस्सा लेने की है. टूर्नामेंट 11 अक्टूबर से शुरू होने वाला है. प्लेट ग्रुप में शामिल अरुणाचल प्रदेश को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में नागालैंड के खिलाफ अपना पहला मुकाबला खेलना है. हालांकि, राज्य क्रिकेट संघ में जारी प्रशासनिक संकट के कारण टीम की भागीदारी पर अनिश्चितता बनी हुई है. देवजीत सैकिया ने भी माना कि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि अरुणाचल प्रदेश रणजी ट्रॉफी में खेल पाएगा या नहीं. उन्होंने कहा कि सभी लोग अदालत के फैसले का इंतजार कर रहे हैं. मामला न्यायालय में लंबित होने के कारण बीसीसीआई भी सीधे हस्तक्षेप नहीं कर सकता.

विवाद अदालत तक पहुंचा

मामले से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि अरुणाचल क्रिकेट एसोसिएशन से जुड़े दो या तीन अलग-अलग गुट खुद को असली और वैध संगठन बता रहे हैं. आपसी विवाद अदालत तक पहुंचने के कारण राज्य में क्रिकेट गतिविधियों को संभालने वाली मान्यता प्राप्त संस्था का कामकाज प्रभावित हुआ है. सूत्र के अनुसार, मौजूदा हालात में बीसीसीआई के लिए राज्य के प्रतिनिधियों से संपर्क करना भी मुश्किल हो गया है, क्योंकि यह स्पष्ट नहीं है कि अरुणाचल क्रिकेट की ओर से आधिकारिक तौर पर कौन बात कर सकता है. सूत्र ने इस स्थिति की तुलना बिहार क्रिकेट एसोसिएशन में पहले रहे प्रशासनिक गतिरोध से भी की, जिसके कारण वहां लंबे समय तक राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भागीदारी प्रभावित हुई थी.

खिलाड़ी इसकी भारी कीमत चुका रहे

सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त प्रशासकों की समिति (CoA) की सिफारिशों के बाद, 2018 में अरुणाचल प्रदेश को अन्य पूर्वोत्तर राज्यों के साथ BCCI की पूर्ण सदस्यता दी गई थी. चल रही प्रशासनिक खींचतान पर नाराजगी जताते हुए सूत्र ने आगे कहा, 'जब युवा क्रिकेटरों के करियर से ज्यादा अहमियत निजी स्वार्थ और पदों की होड़ को दी जाती है, तो ऐसा ही होता है. खिलाड़ी इसकी भारी कीमत चुका रहे हैं, उनका विकास रुक गया है और उनकी महत्वाकांक्षाएं बर्बाद हो रही हैं.'

सूत्र ने कहा, 'लेकिन सच तो आखिरकार सामने आएगा ही. जो लोग इस मामले के केंद्र में हैं, उन्हें इससे हो रहे नुकसान को समझना होगा और अपने निजी स्वार्थों से ऊपर अरुणाचल के युवा टैलेंट के भविष्य को रखना होगा. अगर हम अभी इन बच्चों के भविष्य के बारे में नहीं सोचेंगे, तो राज्य में क्रिकेट का भविष्य पूरी तरह खत्म हो जाएगा.'

Add Zee News as a Preferred Source
TAGS:
Cricket